Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- रवासी (رواسي): पहाड़, जो ज़मीन को जमाए रखने के लिए मजबूत खूंटे की तरह हों।
- बारक (بارك): बरकत देना, यानी खैर और भलाई को बढ़ाना, उसमें लगातार भलाई रखना।
- अक़वात (أقوات): खाने-पीने की चीज़ें, रोज़ी, और जीवन की ज़रूरी चीज़ें।
- सवा (سواء): बराबर, पूरा, बिना किसी कमी या ज़्यादती के।
- साइलीन (سائلين): पूछने वाले, यानी जो इस बारे में जानना चाहें।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने अपनी क़ुदरत के नमूने पेश करते हुए बताया कि उसने ज़मीन में उसके ऊपर पहाड़ों को जमा दिया, जो खूंटों की तरह हैं। ये पहाड़ ज़मीन को जमाए रखते हैं ताकि वह अपने रहने वालों को लेकर डगमगाए नहीं। फिर उसने ज़मीन में बरकत रखी, यानी उसमें पानी, खेती, पेड़-पौधे, और दूध देने वाले जानवर पैदा किए, ताकि उसके रहने वालों के लिए हमेशा भलाई और रोज़ी का सिलसिला जारी रहे। और उसने ज़मीन में उसके रहने वालों की रोज़ी और ज़रूरत की चीज़ें एक अंदाज़े के साथ मुक़र्रर कर दीं — हर चीज़ को उसकी ज़रूरत के हिसाब से नाप-तौल कर रख दिया। यह सब कुछ चार दिनों के दौरान पूरा हुआ — दो दिन ज़मीन की पैदाइश के लिए और दो दिन पहाड़ों, बरकत और रोज़ी के इंतज़ाम के लिए। यह अवधि पूरी और बराबर है, बिना किसी कमी या ज़्यादती के, उन लोगों के लिए जो इसके बारे में पूछना चाहते हैं, ताकि वे अल्लाह की क़ुदरत को समझ सकें और उसकी तारीफ़ करें।
दावती पहलू:
यह आयत हमें अल्लाह की उस रहमत और हिकमत पर ग़ौर करने की दावत देती है जो उसने ज़मीन के इंतज़ाम में रखी है। ज़रा सोचिए — जिस ज़मीन पर हम चलते हैं, उसके लिए पहाड़ों को मज़बूत खूंटे बनाया, उसमें बरकत रखी, और हर इंसान और हर जानवर की रोज़ी का हिस्सा तय कर दिया। क्या यह उस रब की महानता और मेहरबानी की निशानी नहीं? जिसने आपकी रोज़ी का इंतज़ाम पहले से कर रखा है, उस पर भरोसा क्यों न करें? यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपने रब की नेमतों पर शुक्र करें, उसकी क़ुदरत को पहचानें, और अपनी ज़िंदगी में उसके हुक्मों को मानें। जब अल्लाह ने हमारी रोज़ी का इंतज़ाम इतनी हिकमत से किया है, तो हमें चाहिए कि हम उसकी इबादत में कोई कसर न छोड़ें और उसके दीन को अपनी ज़िंदगी में अपनाएँ। यही सच्ची कामयाबी है — दुनिया में इत्मिनान और आख़िरत में जन्नत की खुशखबरी।
📜 आयत 8-12 — सूरा फुस्सिलत
अनुवाद — फुस्सिलत 10
सूरा फुस्सिलत आयत 10 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उसी ने ज़मीन में उसके ऊपर से पहाड़ पैदा…सूरा आयत 10/54 — सूरा फुस्सिलत فصلت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा फुस्सिलत सुनें, सूरा फुस्सिलत अनुवाद, सूरा फुस्सिलत mp3, सूरा फुस्सिलत pdf. आयत 8–12. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा फुस्सिलत
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


