फुस्सिलत · 10/54
अनुवाद उच्चारण — फुस्सिलत
وَجَعَلَ فِيهَا رَوَاسِيَ مِن فَوْقِهَا وَبَارَكَ فِيهَا وَقَدَّرَ فِيهَا أَقْوَاتَهَا فِي أَرْبَعَةِ أَيَّامٍ سَوَاءً لِّلسَّائِلِينَ ۝١٠
Wa ja`ala feehaa rawaa siya min fawqihaa wa baaraka feehaa wa qaddara feehaaaa aqwaatahaa feee arba`ati ayyaamin sawaaa`al lissaaa`ileen
📖 हिंदी अर्थ
और उसी ने ज़मीन में उसके ऊपर से पहाड़ पैदा किए और उसी ने इसमें बरकत अता की और उसी ने एक मुनासिब अन्दाज़ पर इसमें सामाने माईशत का बन्दोबस्त किया (ये सब कुछ) चार दिन में और तमाम तलबगारों के लिए बराबर है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • रवासी (رواسي): पहाड़, जो ज़मीन को जमाए रखने के लिए मजबूत खूंटे की तरह हों।
  • बारक (بارك): बरकत देना, यानी खैर और भलाई को बढ़ाना, उसमें लगातार भलाई रखना।
  • अक़वात (أقوات): खाने-पीने की चीज़ें, रोज़ी, और जीवन की ज़रूरी चीज़ें।
  • सवा (سواء): बराबर, पूरा, बिना किसी कमी या ज़्यादती के।
  • साइलीन (سائلين): पूछने वाले, यानी जो इस बारे में जानना चाहें।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपनी क़ुदरत के नमूने पेश करते हुए बताया कि उसने ज़मीन में उसके ऊपर पहाड़ों को जमा दिया, जो खूंटों की तरह हैं। ये पहाड़ ज़मीन को जमाए रखते हैं ताकि वह अपने रहने वालों को लेकर डगमगाए नहीं। फिर उसने ज़मीन में बरकत रखी, यानी उसमें पानी, खेती, पेड़-पौधे, और दूध देने वाले जानवर पैदा किए, ताकि उसके रहने वालों के लिए हमेशा भलाई और रोज़ी का सिलसिला जारी रहे। और उसने ज़मीन में उसके रहने वालों की रोज़ी और ज़रूरत की चीज़ें एक अंदाज़े के साथ मुक़र्रर कर दीं — हर चीज़ को उसकी ज़रूरत के हिसाब से नाप-तौल कर रख दिया। यह सब कुछ चार दिनों के दौरान पूरा हुआ — दो दिन ज़मीन की पैदाइश के लिए और दो दिन पहाड़ों, बरकत और रोज़ी के इंतज़ाम के लिए। यह अवधि पूरी और बराबर है, बिना किसी कमी या ज़्यादती के, उन लोगों के लिए जो इसके बारे में पूछना चाहते हैं, ताकि वे अल्लाह की क़ुदरत को समझ सकें और उसकी तारीफ़ करें।

दावती पहलू:

यह आयत हमें अल्लाह की उस रहमत और हिकमत पर ग़ौर करने की दावत देती है जो उसने ज़मीन के इंतज़ाम में रखी है। ज़रा सोचिए — जिस ज़मीन पर हम चलते हैं, उसके लिए पहाड़ों को मज़बूत खूंटे बनाया, उसमें बरकत रखी, और हर इंसान और हर जानवर की रोज़ी का हिस्सा तय कर दिया। क्या यह उस रब की महानता और मेहरबानी की निशानी नहीं? जिसने आपकी रोज़ी का इंतज़ाम पहले से कर रखा है, उस पर भरोसा क्यों न करें? यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपने रब की नेमतों पर शुक्र करें, उसकी क़ुदरत को पहचानें, और अपनी ज़िंदगी में उसके हुक्मों को मानें। जब अल्लाह ने हमारी रोज़ी का इंतज़ाम इतनी हिकमत से किया है, तो हमें चाहिए कि हम उसकी इबादत में कोई कसर न छोड़ें और उसके दीन को अपनी ज़िंदगी में अपनाएँ। यही सच्ची कामयाबी है — दुनिया में इत्मिनान और आख़िरत में जन्नत की खुशखबरी।

🎧 सुनें

📜 आयत 8-12 — फुस्सिलत

8إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَهُمْ أَجْرٌ غَيْرُ مَمْنُونٍ
बेशक जो लोग ईमान लाए और अच्छे अच्छे काम करते रहे और उनके लिए वह सवाब है जो कभी ख़त्म होने वाला नहीं
9۞ قُلْ أَئِنَّكُمْ لَتَكْفُرُونَ بِالَّذِي خَلَقَ الْأَرْضَ فِي يَوْمَيْنِ وَتَجْعَلُونَ لَهُ أَندَادًا ۚ ذَٰلِكَ رَبُّ الْعَالَمِينَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि क्या तुम उस (ख़ुदा) से इन्कार करते हो जिसने ज़मीन को दो दिन में पैदा किया और तुम (औरों को) उसका हमसर बनाते हो, यही तो सारे जहाँ का सरपरस्त है
10وَجَعَلَ فِيهَا رَوَاسِيَ مِن فَوْقِهَا وَبَارَكَ فِيهَا وَقَدَّرَ فِيهَا أَقْوَاتَهَا فِي أَرْبَعَةِ أَيَّامٍ سَوَاءً لِّلسَّائِلِينَ
और उसी ने ज़मीन में उसके ऊपर से पहाड़ पैदा किए और उसी ने इसमें बरकत अता की और उसी ने एक मुनासिब अन्दाज़ पर इसमें सामाने माईशत का बन्दोबस्त किया (ये सब कुछ) चार दिन में और तमाम तलबगारों के लिए बराबर है
11ثُمَّ اسْتَوَىٰ إِلَى السَّمَاءِ وَهِيَ دُخَانٌ فَقَالَ لَهَا وَلِلْأَرْضِ ائْتِيَا طَوْعًا أَوْ كَرْهًا قَالَتَا أَتَيْنَا طَائِعِينَ
फिर आसमान की तरफ मुतावज्जे हुआ और (उस वक्त) धुएँ (का सा) था उसने उससे और ज़मीन से फरमाया कि तुम दोनों आओ ख़़ुशी से ख्वाह कराहत से, दोनों ने अर्ज़ की हम ख़़ुशी ख़़ुशी हाज़िर हैं
12فَقَضَاهُنَّ سَبْعَ سَمَاوَاتٍ فِي يَوْمَيْنِ وَأَوْحَىٰ فِي كُلِّ سَمَاءٍ أَمْرَهَا ۚ وَزَيَّنَّا السَّمَاءَ الدُّنْيَا بِمَصَابِيحَ وَحِفْظًا ۚ ذَٰلِكَ تَقْدِيرُ الْعَزِيزِ الْعَلِيمِ
(और हुक्म के पाबन्द हैं) फिर उसने दोनों में उस (धुएँ) के सात आसमान बनाए और हर आसमान में उसके (इन्तेज़ाम) का हुक्म (कार कुनान कज़ा व क़दर के पास) भेज दिया और हमने नीचे वाले आसमान को (सितारों के) चिराग़ों से मज़य्यन किया और (शैतानों से महफूज़) रखा ये वाक़िफ़कार ग़ालिब ख़ुदा के (मुक़र्रर किए हुए) अन्दाज़ हैं
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अनुवाद — फुस्सिलत 10

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Tuesday, August 18, 2026

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