अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- ضَلَّ – ग़ायब हो जाना, खो जाना
- يَدْعُونَ – जिन्हें वे पुकारते थे (अर्थात पूजते थे)
- مَحِيص – बचने की जगह, भागने का रास्ता, छुटकारा
तफ़सीर:
यह आयत उस भयानक दृश्य का वर्णन करती है जो क़ियामत के दिन मुशरिकों (बहुदेववादियों) के सामने आएगा। जब वे अपने उन माबूदों (उपास्यों) को पुकारेंगे जिन्हें उन्होंने दुनिया में अल्लाह के सिवा पूजा था – चाहे वे मूर्तियाँ हों, या कोई और चीज़ें जिन्हें उन्होंने ख़ुदा का शरीक बनाया था – तो वे सब उनसे ग़ायब हो जाएँगी। कोई मददगार नहीं होगा, कोई सिफ़ारिश करने वाला नहीं होगा, और न ही वे माबूद उनके किसी काम आएँगे।
यह वह समय होगा जब उन्हें पूरा यक़ीन हो जाएगा कि अल्लाह के अज़ाब से बचने का कोई रास्ता नहीं है, कोई पनाहगाह नहीं है, और न ही कोई छिपने की जगह है। दुनिया में उन्होंने सोचा था कि ये मूर्तियाँ और झूठे माबूद उन्हें मुसीबतों से बचाएँगे, लेकिन उस दिन उनका सारा भरम टूट जाएगा और वे समझ जाएँगे कि उनका कोई भी सहारा काम नहीं आएगा।
यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है। यह हमें सिखाती है कि हमें अपनी उम्मीदें और भरोसा सिर्फ़ अल्लाह पर रखना चाहिए। जो लोग अल्लाह के सिवा किसी और पर भरोसा करते हैं, वे उस दिन बुरी तरह निराश होंगे। लेकिन जो लोग दुनिया में अल्लाह की इबादत करते हैं और उसी से मदद माँगते हैं, उनके लिए उस दिन ख़ुशख़बरी है – अल्लाह उन्हें कभी निराश नहीं करेगा।
इस आयत से हमें यह भी सबक़ मिलता है कि हमें अपनी ज़िंदगी में किसी को अल्लाह का शरीक नहीं बनाना चाहिए। चाहे वह इंसान हो, पैसा हो, शोहरत हो या कोई और चीज़ – अगर हम किसी चीज़ को अल्लाह की जगह या अल्लाह के साथ पूजते हैं, तो वह हमें उस दिन किसी काम नहीं आएगी। अल्लाह ही अकेला है जो हमें बचा सकता है, और उसी की राह पर चलना ही हमारी सबसे बड़ी कामयाबी है।
📜 आयत 46-50 — फुस्सिलत
अनुवाद — फुस्सिलत 48
सूरा फुस्सिलत आयत 48 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और इससे पहले जिन माबूदों की परसतिश करते थे वह…सूरा आयत 48/54 — फुस्सिलत فصلت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: फुस्सिलत सुनें, फुस्सिलत अनुवाद, फुस्सिलत mp3, फुस्सिलत pdf. आयत 46–50. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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