फुस्सिलत · 54/54
अनुवाद उच्चारण — फुस्सिलत
أَلَا إِنَّهُمْ فِي مِرْيَةٍ مِّن لِّقَاءِ رَبِّهِمْ ۗ أَلَا إِنَّهُ بِكُلِّ شَيْءٍ مُّحِيطٌ ۝٥٤
Alaaa innahum fee miryatim mil liqaaa`i Rabbihim; alaaa innahoo bikulli shai`im muheet
📖 हिंदी अर्थ
देखो ये लोग अपने परवरदिगार के रूबरू हाज़िर होने से शक़ में (पड़े) हैं सुन रखो वह हर चीज़ पर हावी है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • मिर्यतिन (مِرْيَةٍ): संदेह, शक।
  • लिकाइ रब्बिहिम (لِقَاءِ رَبِّهِمْ): अपने रब से मिलने का (अर्थात क़ियामत के दिन उठाए जाने और हिसाब के लिए प्रस्तुत होने का)।
  • मुहीतुन (مُحِيطٌ): घेरने वाला, हर चीज़ को अपने ज्ञान और क़ुदरत से घेरने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में उन लोगों की हालत बयान कर रहा है जो क़ियामत के दिन को नहीं मानते। वे कहते हैं कि हम मरने के बाद दोबारा नहीं उठाए जाएंगे, और इसलिए वे अपने रब से मिलने (यानी हिसाब के लिए उसके सामने खड़े होने) के बारे में गहरे संदेह में पड़े हुए हैं। उनका यह संदेह उन्हें अच्छे कर्म करने से रोकता है, और वे आख़िरत की तैयारी नहीं करते। यह उनकी बड़ी भूल है, क्योंकि वे यह भूल गए कि अल्लाह तआला हर चीज़ को अपने ज्ञान और क़ुदरत से घेरे हुए है। उससे न तो ज़मीन की कोई चीज़ छिपी है और न आसमान की। वह हर छोटे-बड़े काम को जानता है, और उसकी क़ुदरत से कोई चीज़ बाहर नहीं है। यह बात उनके लिए चेतावनी है कि जिस दिन वे उठाए जाएंगे, उनके सारे कर्म उनके सामने रख दिए जाएंगे, और वे उनका पूरा हिसाब देंगे।

दावती पहलू (आमंत्रण का पहलू):

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम सच में उस दिन पर विश्वास रखते हैं जब हम अपने रब के सामने खड़े होंगे? यदि हाँ, तो हमें अपने जीवन को इस तरह बनाना चाहिए कि उस दिन हम शर्मिंदा न हों। अल्लाह तआला हमारी हर छोटी-बड़ी बात जानता है — हमारी नीयतें, हमारे कर्म, हमारी छिपी हुई बातें भी। यह सोचकर हमें कितना सुकून मिलता है कि हमारा रब हमें कभी अकेला नहीं छोड़ता, वह हमेशा हमारे साथ है और हमारी हर दुआ सुनता है। लेकिन साथ ही यह भी याद रखें कि यही अल्लाह हिसाब लेने वाला भी है। इसलिए आज ही अपने जीवन को सुधारें, अच्छे कर्म करें, और उस दिन की तैयारी करें जब हमें अपने रब से मिलना है। यही सच्ची सफलता है — दुनिया में ईमान के साथ जीना और आख़िरत में उसकी रहमत का हक़दार बनना। अल्लाह हम सबको यह तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 52-54 — फुस्सिलत

52قُلْ أَرَأَيْتُمْ إِن كَانَ مِنْ عِندِ اللَّهِ ثُمَّ كَفَرْتُم بِهِ مَنْ أَضَلُّ مِمَّنْ هُوَ فِي شِقَاقٍ بَعِيدٍ
(ऐ रसूल) तुम कहो कि भला देखो तो सही कि अगर ये (क़ुरान) ख़ुदा की बारगाह से (आया) हो और फिर तुम उससे इन्कार करो तो जो (ऐसे) परले दर्जे की मुख़ालेफत में (पड़ा) हो उससे बढ़कर और कौन गुमराह हो सकता है
53سَنُرِيهِمْ آيَاتِنَا فِي الْآفَاقِ وَفِي أَنفُسِهِمْ حَتَّىٰ يَتَبَيَّنَ لَهُمْ أَنَّهُ الْحَقُّ ۗ أَوَلَمْ يَكْفِ بِرَبِّكَ أَنَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ شَهِيدٌ
हम अनक़रीब ही अपनी (क़ुदरत) की निशानियाँ अतराफ (आलम) में और ख़़ुद उनमें भी दिखा देगें यहाँ तक कि उन पर ज़ाहिर हो जाएगा कि वही यक़ीनन हक़ है क्या तुम्हारा परवरदिगार इसके लिए काफी नहीं कि वह हर चीज़ पर क़ाबू रखता है
54أَلَا إِنَّهُمْ فِي مِرْيَةٍ مِّن لِّقَاءِ رَبِّهِمْ ۗ أَلَا إِنَّهُ بِكُلِّ شَيْءٍ مُّحِيطٌ
देखो ये लोग अपने परवरदिगार के रूबरू हाज़िर होने से शक़ में (पड़े) हैं सुन रखो वह हर चीज़ पर हावी है
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अनुवाद — फुस्सिलत 54

सूरा फुस्सिलत आयत 54 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : देखो ये लोग अपने परवरदिगार के रूबरू हाज़िर होने से…

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Tuesday, August 18, 2026

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