अनुवाद — Tafsir
لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۖ وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ
शब्दों के अर्थ:
- الْعَلِيُّ (अल-अली): अत्यंत ऊंचा, जिसकी शान और क़ुदरत सबसे ऊपर हो।
- الْعَظِيمُ (अल-अज़ीम): महान, जिसके लिए बड़ाई और किब्रिया (बुज़ुर्गी) हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत अल्लाह तआला की पूर्ण मालिकियत और उसकी बेपनाह अज़मत को बयान करती है। आसमानों में जो कुछ भी है—चाहे वह फ़रिश्ते हों, सितारे हों, सूरज-चाँद हों—और ज़मीन में जो कुछ भी है—चाहे वह इंसान हों, जानवर हों, पहाड़ हों या समुद्र—सब कुछ अल्लाह ही की मिल्कियत (स्वामित्व) में है। वही इन सबका ख़ालिक़ (रचयिता), मालिक और मुदब्बिर (प्रबंधक) है। कोई भी चीज़ उसके इख़्तियार से बाहर नहीं है, और हर चीज़ उसी के हुक्म के ताबे है।
अल्लाह तआला الْعَلِيُّ है—यानी वह अपनी ज़ात, अपनी क़ुदरत और अपने क़हर (दबदबे) में सबसे ऊंचा है। उसकी शान हर शान से बुलंद है, और उसके मुक़ाबले में हर चीज़ पस्त और नाचीज़ है। वह الْعَظِيمُ है—यानी उसकी अज़मत और किब्रिया का कोई अंत नहीं। उसकी बुज़ुर्गी के आगे सारी मख़लूक़ात की बुज़ुर्गी बेमानी है। उसका इल्म, उसकी हिकमत, उसकी रहमत और उसका सुल्तान (राज्य) सब कुछ असीम है।
यह आयत हमें यह सिखाती है कि जब सब कुछ अल्लाह का है और वही सबसे ऊंचा और महान है, तो हमें अपना दिल, अपनी उम्मीदें और अपना भरोसा सिर्फ़ उसी पर लगाना चाहिए। किसी और से डरने या किसी और से उम्मीद रखने की ज़रूरत नहीं, क्योंकि असली मालिक और असली ताक़तवर सिर्फ़ वही है। जब हम यह समझ लें कि हर चीज़ उसी के हाथ में है, तो हमारा दिल उसकी इबादत में लग जाता है, और हमें यक़ीन हो जाता है कि उसकी रहमत और मदद ही हमारी कामयाबी की कुंजी है। यही ईमान की मिठास है—यह जानना कि हमारा रब सबसे ऊंचा, सबसे महान और हर चीज़ का मालिक है।
📜 आयत 2-6 — अश-शूरा
अनुवाद — अश-शूरा 4
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पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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