अश-शूरा · 6/53
अनुवाद उच्चारण — अश-शूरा
وَالَّذِينَ اتَّخَذُوا مِن دُونِهِ أَوْلِيَاءَ اللَّهُ حَفِيظٌ عَلَيْهِمْ وَمَا أَنتَ عَلَيْهِم بِوَكِيلٍ ۝٦
Wallazeenat takhazoo min dooniheee awliyaaa`al laahu hafeezun `alaihim wa maaa anta `alaihim biwakeel
📖 हिंदी अर्थ
और जिन लोगों ने ख़ुदा को छोड़ कर (और) अपने सरपरस्त बना रखे हैं ख़ुदा उनकी निगरानी कर रहा है (ऐ रसूल) तुम उनके निगेहबान नहीं हो
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اتَّخَذُوا مِن دُونِهِ أَوْلِيَاءَ: अल्लाह को छोड़कर दूसरों को संरक्षक और सहायक बनाना, जैसे मूर्तियाँ, पत्थर, या अन्य चीज़ें जिन्हें वे पूजते हैं और उनसे मदद माँगते हैं।
  • حَفِيظٌ: निगरानी रखने वाला, जो हर चीज़ को याद रखता है और उसका हिसाब रखता है।
  • وَكِيلٌ: वह व्यक्ति जो किसी के कार्यों की ज़िम्मेदारी उठाए या उन्हें मजबूर करे।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के बारे में बताती है जिन्होंने अल्लाह को छोड़कर दूसरों को अपना संरक्षक और सहायक बना लिया। वे उन्हें पूजते हैं, उनसे डरते हैं, और उनसे उम्मीदें रखते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि वह इन लोगों पर पूरी निगरानी रखने वाला है। उनके हर अच्छे और बुरे काम को वह दर्ज कर रहा है, और उनके हर क़दम का हिसाब उसके पास है। यह निगरानी उन्हें सज़ा देने के लिए है, क्योंकि उन्होंने सच्चाई को ठुकराकर झूठ का सहारा लिया।

फिर अल्लाह अपने नबी ﷺ को तसल्ली देता है कि आप इन लोगों के कार्यों के ज़िम्मेदार नहीं हैं। आप पर केवल संदेश पहुँचाने की ज़िम्मेदारी है। आपको उन्हें मजबूर करने या उनके दिलों को बदलने की कोशिश करने की ज़रूरत नहीं। हिसाब लेने का काम अल्लाह का है, और वही सबसे न्यायपूर्ण फ़ैसला करने वाला है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम में हर व्यक्ति अपने कर्मों के लिए खुद ज़िम्मेदार है। अल्लाह ने हमें सोचने और समझने की ताक़त दी है, और सही रास्ता दिखाने के लिए पैग़म्बर भेजे हैं। जो लोग इन नेमतों को ठुकराकर अल्लाह के अलावा किसी और की तरफ़ रुजू करते हैं, वे सिर्फ़ अपना नुक़सान करते हैं। अल्लाह उनके हर काम को देख रहा है, और यह हमारे लिए एक चेतावनी है कि हम अपनी ज़िंदगी में सिर्फ़ अल्लाह को ही अपना संरक्षक बनाएँ। वही हमारी मदद कर सकता है, वही हमारी सुनता है, और वही हमारे हर अच्छे काम का बदला देने वाला है। यह आयत हमें यह भी बताती है कि हमें दूसरों के ईमान लाने की चिंता में परेशान नहीं होना चाहिए, बल्कि अपने अच्छे आचरण और सच्चे संदेश के ज़रिए लोगों को अल्लाह की तरफ़ बुलाना चाहिए। सच्चाई की रोशनी फैलाना हमारा काम है, और हिदायत देना अल्लाह के हाथ में है।

🎧 सुनें

📜 आयत 4-8 — अश-शूरा

4لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۖ وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ
और वह तो (बड़ा) आलीशान (और) बुर्ज़ुग है
5تَكَادُ السَّمَاوَاتُ يَتَفَطَّرْنَ مِن فَوْقِهِنَّ ۚ وَالْمَلَائِكَةُ يُسَبِّحُونَ بِحَمْدِ رَبِّهِمْ وَيَسْتَغْفِرُونَ لِمَن فِي الْأَرْضِ ۗ أَلَا إِنَّ اللَّهَ هُوَ الْغَفُورُ الرَّحِيمُ
(उनकी बातों से) क़रीब है कि सारे आसमान (उसकी हैबत के मारे) अपने ऊपर वार से फट पड़े और फ़रिश्ते तो अपने परवरदिगार की तारीफ़ के साथ तसबीह करते हैं और जो लोग ज़मीन में हैं उनके लिए (गुनाहों की) माफी माँगा करते हैं सुन रखो कि ख़ुदा ही यक़ीनन बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
6وَالَّذِينَ اتَّخَذُوا مِن دُونِهِ أَوْلِيَاءَ اللَّهُ حَفِيظٌ عَلَيْهِمْ وَمَا أَنتَ عَلَيْهِم بِوَكِيلٍ
और जिन लोगों ने ख़ुदा को छोड़ कर (और) अपने सरपरस्त बना रखे हैं ख़ुदा उनकी निगरानी कर रहा है (ऐ रसूल) तुम उनके निगेहबान नहीं हो
7وَكَذَٰلِكَ أَوْحَيْنَا إِلَيْكَ قُرْآنًا عَرَبِيًّا لِّتُنذِرَ أُمَّ الْقُرَىٰ وَمَنْ حَوْلَهَا وَتُنذِرَ يَوْمَ الْجَمْعِ لَا رَيْبَ فِيهِ ۚ فَرِيقٌ فِي الْجَنَّةِ وَفَرِيقٌ فِي السَّعِيرِ
और हमने तुम्हारे पास अरबी क़ुरान यूँ भेजा ताकि तुम मक्का वालों को और जो लोग इसके इर्द गिर्द रहते हैं उनको डराओ और (उनको) क़यामत के दिन से भी डराओ जिस (के आने) में कुछ भी शक़ नहीं (उस दिन) एक फरीक़ (मानने वाला) जन्नत में होगा और फरीक़ (सानी) दोज़ख़ में
8وَلَوْ شَاءَ اللَّهُ لَجَعَلَهُمْ أُمَّةً وَاحِدَةً وَلَٰكِن يُدْخِلُ مَن يَشَاءُ فِي رَحْمَتِهِ ۚ وَالظَّالِمُونَ مَا لَهُم مِّن وَلِيٍّ وَلَا نَصِيرٍ
और अगर ख़ुदा चाहता तो इन सबको एक ही गिरोह बना देता मगर वह तो जिसको चाहता है (हिदायत करके) अपनी रहमत में दाख़िल कर लेता है और ज़ालिमों का तो (उस दिन) न कोई यार है और न मददगार
अश-शूराकुरान सूची
53आयत
मक्कीRevelation
6आयत

अनुवाद — अश-शूरा 6

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Tuesday, August 18, 2026

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