अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- अल-अखिल्ला (الأَخِلاَّء): घनिष्ठ मित्र, वे लोग जो आपस में गहरी दोस्ती रखते हैं।
- यौमइज़िन (يَوْمَئِذٍ): उस दिन, अर्थात् क़ियामत के दिन।
- अदुव्वुन (عَدُوٌّ): शत्रु, दुश्मन।
- अल-मुत्तक़ीन (الْمُتَّقِينَ): परहेज़गार, वे लोग जो अल्लाह के आदेशों का पालन करें और उसकी मनाही से बचें।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत क़ियामत के दिन की एक बहुत ही गंभीर और विचारणीय स्थिति का वर्णन करती है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जो लोग दुनिया में आपस में गहरी दोस्ती रखते थे, लेकिन यह दोस्ती अल्लाह की नाफ़रमानी, गुनाह और बुराई पर आधारित थी—चाहे वह दोस्ती शराब पीने पर हो, चोरी-डकैती पर हो, या किसी और गुनाह पर—ऐसे सभी दोस्त क़ियामत के दिन एक-दूसरे के दुश्मन बन जाएँगे। वे एक-दूसरे से बराअत (बेज़ारी) जताएँगे, एक-दूसरे को ज़िम्मेदार ठहराएँगे और एक-दूसरे से अलग हो जाएँगे। जिस दोस्ती ने उन्हें दुनिया में गुनाह की तरफ़ धकेला, वही दोस्ती आख़िरत में उनके लिए अफ़सोस और पछतावे का सबब बनेगी।
लेकिन इस आयत में एक बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी भी है। अल्लाह तआला फ़रमाता है: "मगर परहेज़गारों (मुत्तक़ीन) के अलावा।" यानी जिन लोगों की दोस्ती अल्लाह की रज़ा के लिए थी, जो लोग अल्लाह की इबादत, उसकी ताअत और नेक कामों पर एक-दूसरे से जुड़े थे, उनकी दोस्ती क़ियामत के दिन भी क़ायम रहेगी और उनके लिए नेमत और रहमत का सबब बनेगी। उनकी मुहब्बत सिर्फ़ दुनिया तक महदूद नहीं रहेगी, बल्कि आख़िरत की ज़िन्दगी में भी उनका आपसी प्यार और भाईचारा जारी रहेगा, और वे जन्नत में एक साथ रहेंगे।
यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपनी दोस्तियाँ किस आधार पर बनाते हैं। अगर हमारी दोस्तियाँ सिर्फ़ दुनिया के मतलब, गुनाह और बुराई पर हैं, तो यह दोस्ती आख़िरत में हमारे लिए नुक़सान का सबब बनेगी। लेकिन अगर हमारी दोस्ती अल्लाह की रज़ा के लिए है, तो यही दोस्ती हमारे लिए दुनिया और आख़िरत दोनों में बेहतरी का ज़रिया बनेगी। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने दोस्तों का चुनाव सोच-समझकर करें और ऐसे लोगों को अपना दोस्त बनाएँ जो हमें अल्लाह की याद दिलाएँ, नेकी की तरफ़ बुलाएँ और बुराई से रोकें। यही वह दोस्ती है जो क़ियामत के दिन हमारे काम आएगी और हमें जन्नत की तरफ़ ले जाएगी।
📜 आयत 65-69 — अज़-ज़ुखरुफ
अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 67
सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 67 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (दिली) दोस्त इस दिन (बाहम) एक दूसरे के दुशमन होगें…सूरा आयत 67/89 — अज़-ज़ुखरुफ الزخرف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ुखरुफ सुनें, अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, अज़-ज़ुखरुफ mp3, अज़-ज़ुखरुफ pdf. आयत 65–69. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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