अद-दुखान · 17/59
अनुवाद उच्चारण — अद-दुखान
۞ وَلَقَدْ فَتَنَّا قَبْلَهُمْ قَوْمَ فِرْعَوْنَ وَجَاءَهُمْ رَسُولٌ كَرِيمٌ ۝١٧
Wa laqad fatannaa qablahum qawma Fir`awna wa jaaa`ahum Rasoolun kareem
📖 हिंदी अर्थ
और उनसे पहले हमने क़ौमे फिरऔन की आज़माइश की और उनके पास एक आली क़दर पैग़म्बर (मूसा) आए

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَتَنَّا: हमने परीक्षण किया, आज़माया।
  • قَوْمَ فِرْعَوْنَ: फ़िरऔन की क़ौम (उसकी प्रजा और उसके साथी)।
  • رَسُولٌ كَرِيمٌ: बहुत सम्मानित और प्रतिष्ठित पैग़म्बर (जो अल्लाह की ओर से भेजे गए थे)।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में मक्का के काफ़िरों को चेतावनी दे रहे हैं और उन्हें इतिहास का सबक़ याद दिला रहे हैं। अल्लाह फ़रमाता है कि हमने इन मुशरिकीन (क़ुरैश) से पहले फ़िरऔन की क़ौम को भी परीक्षण में डाला था। उन्हें हमने खूब धन-दौलत, ऐशो-आराम और ताक़त दी थी, ताकि देखें कि वे शुक्र करते हैं या नहीं। लेकिन उन्होंने अल्लाह की नेअमतों का ग़लत इस्तेमाल किया और सरकशी पर उतर आए।

फिर अल्लाह ने उनके पास एक बहुत ही सम्मानित रसूल भेजा — हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) — जो अल्लाह के नज़दीक बुलंद मरतबा रखते थे। वे उन्हें तौहीद (एक अल्लाह की इबादत) की ओर बुलाते थे, उन्हें अल्लाह का पैग़ाम सुनाते थे, और उन्हें अंधेरों से निकालकर रौशनी की ओर लाना चाहते थे। लेकिन फ़िरऔन और उसकी क़ौम ने उन्हें झुठलाया, उनका मज़ाक़ उड़ाया और उनकी दावत को क़बूल नहीं किया। नतीजा यह हुआ कि अल्लाह ने उन्हें समुंद्र में ग़रक़ करके हलाक कर दिया।

यहाँ अल्लाह तआला क़ुरैश के काफ़िरों को समझा रहे हैं कि जिस तरह फ़िरऔन की क़ौम ने अपने रसूल को झुठलाया और अल्लाह के अज़ाब का शिकार हुई, उसी तरह अगर तुम भी अपने रसूल (हज़रत मुहम्मद ﷺ) को झुठलाओगे, तो तुम भी उसी अंजाम से दो-चार होगे। अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) कभी नहीं बदलती — जो हक़ को झुठलाता है, वह तबाह हो जाता है।

इस आयत में एक बड़ी नसीहत है कि अल्लाह की नेअमतें इंसान के लिए आज़माइश हैं, न कि सिर्फ़ ऐश-ओ-आराम का ज़रिया। जो इन नेअमतों को पाकर अल्लाह का शुक्र अदा करता है और उसके हुक्मों पर चलता है, वह कामयाब है। और जो सरकशी करता है, उसका अंजाम बुरा होता है।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अल्लाह के रसूलों की ताअत करनी चाहिए और उनके पैग़ाम को क़बूल करना चाहिए। अल्लाह का रसूल हमारे लिए रहमत और हिदायत लेकर आया है। जो उसे मान ले, वह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब है। और जो उसे ठुकराए, उसका अंजाम फ़िरऔन और उसकी क़ौम जैसा होगा। अल्लाह हमें हक़ को क़बूल करने और उस पर साबित-क़दम रहने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 15-19 — अद-दुखान

15إِنَّا كَاشِفُو الْعَذَابِ قَلِيلًا ۚ إِنَّكُمْ عَائِدُونَ
(अच्छा ख़ैर) हम थोड़े दिन के लिए अज़ाब को टाल देते हैं मगर हम जानते हैं तुम ज़रूर फिर कुफ्र करोगे
16يَوْمَ نَبْطِشُ الْبَطْشَةَ الْكُبْرَىٰ إِنَّا مُنتَقِمُونَ
हम बेशक (उनसे) पूरा बदला तो बस उस दिन लेगें जिस दिन सख्त पकड़ पकड़ेंगे
17۞ وَلَقَدْ فَتَنَّا قَبْلَهُمْ قَوْمَ فِرْعَوْنَ وَجَاءَهُمْ رَسُولٌ كَرِيمٌ
और उनसे पहले हमने क़ौमे फिरऔन की आज़माइश की और उनके पास एक आली क़दर पैग़म्बर (मूसा) आए
18أَنْ أَدُّوا إِلَيَّ عِبَادَ اللَّهِ ۖ إِنِّي لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌ
(और कहा) कि ख़ुदा के बन्दों (बनी इसराईल) को मेरे हवाले कर दो मैं (ख़ुदा की तरफ से) तुम्हारा एक अमानतदार पैग़म्बर हूँ
19وَأَن لَّا تَعْلُوا عَلَى اللَّهِ ۖ إِنِّي آتِيكُم بِسُلْطَانٍ مُّبِينٍ
और ख़ुदा के सामने सरकशी न करो मैं तुम्हारे पास वाज़ेए व रौशन दलीलें ले कर आया हूँ
अद-दुखानकुरान सूची
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अनुवाद — अद-दुखान 17

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Tuesday, August 18, 2026

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