अद-दुखान · 27/59
अनुवाद उच्चारण — सूरा अद-दुखान
وَنَعْمَةٍ كَانُوا فِيهَا فَاكِهِينَ ۝٢٧
Wa na`matin kaanoo feehaa faakiheen
📖 हिंदी अर्थ
जिनमें वह ऐश और चैन किया करते थे छोड़ गये यूँ ही हुआ

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • نَعْمَةٍ — आराम, सुख-समृद्धि, ऐश्वर्यपूर्ण जीवन।
  • فَاكِهِينَ — आनंदित, मौज-मस्ती में डूबे हुए, सुख-सुविधाओं का भरपूर आनंद लेने वाले।

तफसीर:

इस आयत में अल्लाह तआला फ़िरऔन और उसकी क़ौम के उस हाल का ज़िक्र कर रहे हैं, जब उन्हें समुद्र में डुबोकर हमेशा के लिए ख़त्म कर दिया गया। वे अपने पीछे कितनी ही नेअमतें छोड़ गए — हरे-भरे बाग़, बहती हुई नहरें, खेत, शानदार महल और ऐशो-आराम की ज़िंदगी, जिसमें वे मगन थे और खूब मौज-उड़ा रहे थे। लेकिन उनकी यह सारी दौलत और सुख-सुविधाएँ उन्हें अल्लाह के अज़ाब से न बचा सकीं। जब अल्लाह का फ़ैसला आया, तो वे सब कुछ छोड़कर चले गए और उनका अंजाम तबाही के सिवा कुछ न था।

यह एक बहुत बड़ी सबक़ है — दुनिया की चमक-दमक और ऐशो-आराम कितना ही बड़ा क्यों न हो, वह आख़िरकार फ़ानी है। इंसान को चाहिए कि वह दुनिया की नेअमतों का शुक्र अदा करे और अल्लाह की इताअत में रहे, क्योंकि असली कामयाबी उसी की है जो अल्लाह की राह पर चले। याद रखिए, ये नेअमतें हमें आज़माइश के लिए दी गई हैं — कि हम शुक्रगुज़ार बनते हैं या नाशुक्री करते हैं। जो लोग इन नेअमतों को पाकर अल्लाह से ग़ाफ़िल हो जाते हैं, उनका अंजाम फ़िरऔनियों जैसा ही होता है। अल्लाह हमें दुनिया की मोहब्बत में आख़िरत को भूलने से बचाए और हमें शुक्रगुज़ार बंदे बनाए। आमीन।



📜 आयत 25-29 — सूरा अद-दुखान

25كَمْ تَرَكُوا مِن جَنَّاتٍ وَعُيُونٍ
वह लोग (ख़ुदा जाने) कितने बाग़ और चश्में और खेतियाँ
26وَزُرُوعٍ وَمَقَامٍ كَرِيمٍ
और नफीस मकानात और आराम की चीज़ें
27وَنَعْمَةٍ كَانُوا فِيهَا فَاكِهِينَ
जिनमें वह ऐश और चैन किया करते थे छोड़ गये यूँ ही हुआ
28كَذَٰلِكَ ۖ وَأَوْرَثْنَاهَا قَوْمًا آخَرِينَ
और उन तमाम चीज़ों का दूसरे लोगों को मालिक बना दिया
29فَمَا بَكَتْ عَلَيْهِمُ السَّمَاءُ وَالْأَرْضُ وَمَا كَانُوا مُنظَرِينَ
तो उन लोगों पर आसमान व ज़मीन को भी रोना न आया और न उन्हें मोहलत ही दी गयी
अद-दुखानकुरान सूची
59आयत
मक्कीअवतरण स्थान
27आयत

अनुवाद — अद-दुखान 27

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Friday, October 2, 2026

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