अद-दुखान · 50/59
अनुवाद उच्चारण — अद-दुखान
إِنَّ هَٰذَا مَا كُنتُم بِهِ تَمْتَرُونَ ۝٥٠
Inna haazaa maa kuntum bihee tamtaroon
📖 हिंदी अर्थ
ये वही दोज़ख़ तो है जिसमें तुम लोग शक़ किया करते थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَمْتَرُونَ: संदेह करना, शक करना।

तफ़सीर:

आज जिस अज़ाब का सामना तुम कर रहे हो, यह वही चीज़ है जिसके बारे में तुम दुनिया में संदेह किया करते थे। तुम इस पर यक़ीन नहीं करते थे कि क़ियामत का दिन आएगा, और न ही तुम्हें इस बात का विश्वास था कि इस दिन का अज़ाब सच में आएगा। तुम इसे महज़ एक कल्पना और अफ़वाह समझते थे। लेकिन आज, जब तुम इस अज़ाब को अपनी आँखों से देख रहे हो और इसे महसूस कर रहे हो, तो तुम्हारा वह सारा संदेह और शक दूर हो गया है। अब तुम्हें सच्चाई का सामना करना पड़ रहा है, और तुम्हारे लिए इससे बचने का कोई रास्ता नहीं बचा है।

यह वही अज़ाब है जिसके बारे में तुम दुनिया में मज़ाक़ उड़ाया करते थे और कहते थे कि यह कभी नहीं आएगा। लेकिन देखो, आज वही चीज़ तुम्हारे सामने है, और तुम इसे अपनी आँखों से देख रहे हो। यह तुम्हारे लिए सबसे बड़ी नसीहत है, लेकिन अब नसीहत का वक़्त नहीं रहा। अब सिर्फ़ अफ़सोस और पछतावा है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह का वादा सच्चा है, और उसका अज़ाब या इनाम, दोनों ही ज़रूर आने वाले हैं। हमें चाहिए कि हम दुनिया में ही अपने आख़िरत के लिए तैयारी कर लें, और उस दिन का यक़ीन रखें जब हर इंसान को उसके अमल का बदला मिलेगा। यह आयत हमें संदेह और शक से बचने की तरबियत देती है, और हमें दृढ़ ईमान की दावत देती है। जो लोग आख़िरत पर यक़ीन रखते हैं, वे दुनिया में नेक काम करते हैं, और उनका दिल अल्लाह की रहमत की उम्मीद से भरा होता है। लेकिन जो लोग शक करते हैं, वे दुनिया में ही खो जाते हैं और आख़िरत में पछताते हैं। हमें चाहिए कि हम इस आयत से सबक़ लें और अपने ईमान को मज़बूत करें, ताकि उस दिन हम उन लोगों में से न हों जिनसे कहा जाएगा: "यह वही चीज़ है जिस पर तुम संदेह करते थे।"



📜 आयत 48-52 — अद-दुखान

48ثُمَّ صُبُّوا فَوْقَ رَأْسِهِ مِنْ عَذَابِ الْحَمِيمِ
फिर उसके सर पर खौलते हुए पानी का अज़ाब डालो फिर उससे ताआनन कहा जाएगा अब मज़ा चखो
49ذُقْ إِنَّكَ أَنتَ الْعَزِيزُ الْكَرِيمُ
बेशक तू तो बड़ा इज्ज़त वाला सरदार है
50إِنَّ هَٰذَا مَا كُنتُم بِهِ تَمْتَرُونَ
ये वही दोज़ख़ तो है जिसमें तुम लोग शक़ किया करते थे
51إِنَّ الْمُتَّقِينَ فِي مَقَامٍ أَمِينٍ
बेशक परहेज़गार लोग अमन की जगह
52فِي جَنَّاتٍ وَعُيُونٍ
(यानि) बाग़ों और चश्मों में होंगे
अद-दुखानकुरान सूची
59आयत
मक्कीRevelation
50आयत

अनुवाद — अद-दुखान 50

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Tuesday, August 18, 2026

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