अद-दुखान · 7/59
अनुवाद उच्चारण — सूरा अद-दुखान
رَبِّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا ۖ إِن كُنتُم مُّوقِنِينَ ۝٧
Rabbis samaawaati wal ardi wa maa bainahumaa; in kuntum mooqineen
📖 हिंदी अर्थ
सारे आसमान व ज़मीन और जो कुछ इन दोनों के दरमियान है सबका मालिक

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رَبِّ: पालनहार, स्वामी, प्रभु
  • السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ: आकाशों (आसमानों) और धरती का
  • مَا بَيْنَهُمَا: जो कुछ इन दोनों के बीच है
  • مُوقِنِينَ: यक़ीन रखने वाले, पक्का विश्वास करने वाले

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में अपनी रुबूबियत (पालनहार होने) की महान सच्चाई को बयान कर रहे हैं। वही है जो आसमानों का रब है, धरती का रब है, और उन सब चीज़ों का रब है जो इन दोनों के बीच हैं — चाहे वे तारे हों, ग्रह हों, बादल हों, हवाएँ हों, या वे सारे राज़ जो इंसान की नज़रों से छिपे हैं। यह सारा विशाल ब्रह्मांड, अपनी तमाम बेशुमार मख़लूक़ात (प्राणियों) के साथ, एक ही पालनहार की कुदरत (शक्ति) का नमूना है।

अल्लाह फ़रमाता है: "अगर तुम यक़ीन रखने वाले हो" — यानी अगर तुम्हारे दिलों में सच्चा विश्वास है कि यह सब कुछ बिना किसी पैदा करने वाले के नहीं बन सकता, और तुम्हारी अक़्ल (बुद्धि) इस हक़ीक़त को मानती है कि इस कायनात (ब्रह्मांड) का एक ही ख़ालिक़ (रचयिता) और मालिक है, तो फिर तुम्हें इस सच्चाई से सबक़ लेना चाहिए। जो रब इतनी बड़ी कायनात को पैदा कर सकता है और उसे क़ायम रख सकता है, वही अकेला इबादत (पूजा) के लायक़ है। उसके सिवा कोई माबूद (पूज्य) नहीं, उसका कोई शरीक (साझीदार) नहीं।

यह आयत उन लोगों को नसीहत कर रही है जो अल्लाह की रुबूबियत को तो मानते थे, लेकिन इबादत में दूसरों को शरीक करते थे। अल्लाह उन्हें समझा रहा है कि जब तुम मानते हो कि आसमान और ज़मीन का पालनहार अल्लाह ही है, तो फिर तुम उन चीज़ों की पूजा क्यों करते हो जो न तो पैदा कर सकती हैं और न ही किसी को फ़ायदा या नुक़सान पहुँचा सकती हैं?

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें अपने ईमान की जड़ को मज़बूत करने की तरफ़ बुलाती है। जब हम चारों तरफ़ नज़र दौड़ाते हैं — आसमान की बुलंदियों को देखते हैं, ज़मीन की फ़रावानी (विस्तार) को देखते हैं, पहाड़ों की अज़मत (महानता) को देखते हैं, समंदरों की गहराई को देखते हैं — तो हमारा दिल अपने आप कह उठता है कि इन सबका कोई महान पैदा करने वाला है। यही वह यक़ीन है जो इंसान को सीधे रास्ते पर लाता है और उसे अपने रब से जोड़ता है।

अल्लाह तआला हम सबको इस यक़ीन की बरकत से नवाज़े और हमें उन लोगों में शामिल करे जो सच्चे दिल से उसकी इबादत करते हैं। आमीन।



📜 आयत 5-9 — सूरा अद-दुखान

5أَمْرًا مِّنْ عِندِنَا ۚ إِنَّا كُنَّا مُرْسِلِينَ
यानि हमारे यहाँ से हुक्म होकर (बेशक) हम ही (पैग़म्बरों के) भेजने वाले हैं
6رَحْمَةً مِّن رَّبِّكَ ۚ إِنَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
ये तुम्हारे परवरदिगार की मेहरबानी है, वह बेशक बड़ा सुनने वाला वाक़िफ़कार है
7رَبِّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا ۖ إِن كُنتُم مُّوقِنِينَ
सारे आसमान व ज़मीन और जो कुछ इन दोनों के दरमियान है सबका मालिक
8لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ يُحْيِي وَيُمِيتُ ۖ رَبُّكُمْ وَرَبُّ آبَائِكُمُ الْأَوَّلِينَ
अगर तुममें यक़ीन करने की सलाहियत है (तो करो) उसके सिवा कोई माबूद नहीं - वही जिलाता है वही मारता है तुम्हारा मालिक और तुम्हारे (अगले) बाप दादाओं का भी मालिक है
9بَلْ هُمْ فِي شَكٍّ يَلْعَبُونَ
लेकिन ये लोग तो शक़ में पड़े खेल रहे हैं
अद-दुखानकुरान सूची
59आयत
मक्कीअवतरण स्थान
7आयत

अनुवाद — अद-दुखान 7

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Monday, September 21, 2026

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