अल-जासिया · 37/37
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-जासिया
وَلَهُ الْكِبْرِيَاءُ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ ۝٣٧
Wa lahul kibriyaaa`u fissamaawaati wal ardi wa Huwal `Azeezul Hakeem
📖 हिंदी अर्थ
और सारे आसमान व ज़मीन में उसके लिए बड़ाई है और वही (सब पर) ग़ालिब हिकमत वाला है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْكِبْرِيَاءُ: महानता, बड़ाई, सर्वोच्च गौरव और प्रभुत्व का गुण।
  • الْعَزِيزُ: वह जो सब पर ग़ालिब हो, जिसे कोई हरा न सके।
  • الْحَكِيمُ: वह जो हर काम में पूर्ण ज्ञान और दूरदर्शिता से काम लेता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत अल्लाह तआला की महानता और उसके सर्वोच्च गुणों का वर्णन करती है। अल्लाह ही के लिए है सारी बड़ाई, महानता और प्रभुत्व — आसमानों में भी और ज़मीन में भी। यानी पूरी कायनात में जो भी अज़मत, शान, सत्ता और कमाल है, वह सब अकेले अल्लाह ही का है। आसमानों की बुलंदियाँ, ज़मीन का विस्तार, सितारों की रौशनी, हवाओं का चलना, बारिश का बरसना — ये सब उसी की कुदरत के निशान हैं और उसी की बड़ाई को ज़ाहिर करते हैं।

अल्लाह الْعَزِيزُ है — वह ऐसा शक्तिशाली है कि उसे कोई मात नहीं दे सकता, कोई उसके फ़ैसले को टाल नहीं सकता, और कोई उसके मुक़ाबले में खड़ा नहीं हो सकता। वह الْحَكِيمُ है — उसकी हर रचना, हर तदबीर, हर फ़रमान और हर क़ानून में गहरी हिकमत (समझदारी) छिपी है। जो कुछ वह करता है, ठीक करता है; जो हुक्म देता है, अदल पर देता है।

यह आयत हमें सिखाती है कि जिस तरह अल्लाह की बड़ाई सारे जहान में फैली हुई है, उसी तरह हमें अपने दिलों में उसकी अज़मत बिठानी चाहिए। जब हम इस हक़ीक़त को समझ लें कि सारी सत्ता और कमाल सिर्फ़ अल्लाह का है, तो हमारा दिल किसी और के आगे झुकेगा नहीं, किसी और से डरेगा नहीं, और किसी और से उम्मीद नहीं रखेगा। यही तो सच्ची बंदगी है — कि हम अपनी ज़िंदगी में सिर्फ़ उसी की रज़ा को मक़सद बनाएँ, उसी के हुक्मों को अपनाएँ, और उसी से मदद माँगें।

याद रखिए, जिसके पास अल्लाह की महानता का एहसास हो जाए, उसकी ज़िंदगी में कभी बेचैनी नहीं आती। क्योंकि वह जानता है कि इस कायनात का मालिक सबसे बड़ा है, सबसे ताक़तवर है, और सबसे हिकमत वाला है। उसी पर भरोसा करना, उसी की इबादत करना, और उसी से दुआ माँगना — यही सबसे बड़ी कामयाबी है।



📜 आयत 35-37 — सूरा अल-जासिया

35ذَٰلِكُم بِأَنَّكُمُ اتَّخَذْتُمْ آيَاتِ اللَّهِ هُزُوًا وَغَرَّتْكُمُ الْحَيَاةُ الدُّنْيَا ۚ فَالْيَوْمَ لَا يُخْرَجُونَ مِنْهَا وَلَا هُمْ يُسْتَعْتَبُونَ
ये इस सबब से कि तुम लोगों ने ख़ुदा की आयतों को हँसी ठट्ठा बना रखा था और दुनयावी ज़िन्दगी ने तुमको धोखे में डाल दिया था ग़रज़ ये लोग न तो आज दुनिया से निकाले जाएँगे और न उनको इसका मौका दिया जाएगा कि (तौबा करके ख़ुदा को) राज़ी कर ले
36فَلِلَّهِ الْحَمْدُ رَبِّ السَّمَاوَاتِ وَرَبِّ الْأَرْضِ رَبِّ الْعَالَمِينَ
पस सब तारीफ ख़ुदा ही के लिए सज़ावार है जो सारे आसमान का मालिक और ज़मीन का मालिक (ग़रज़) सारे जहॉन का मालिक है
37وَلَهُ الْكِبْرِيَاءُ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
और सारे आसमान व ज़मीन में उसके लिए बड़ाई है और वही (सब पर) ग़ालिब हिकमत वाला है
अल-जासियाकुरान सूची
37आयत
मक्कीअवतरण स्थान
37आयत

अनुवाद — अल-जासिया 37

सूरा अल-जासिया आयत 37 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और सारे आसमान व ज़मीन में उसके लिए बड़ाई है…

सूरा आयत 37/37 — सूरा अल-जासिया الجاثية (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-जासिया सुनें, सूरा अल-जासिया अनुवाद, सूरा अल-जासिया mp3, सूरा अल-जासिया pdf. आयत 35–37. हिंदी अर्थ: اردو.





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Friday, October 2, 2026

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