अल-अहकाफ · 33/35
अनुवाद उच्चारण — अल-अहकाफ
أَوَلَمْ يَرَوْا أَنَّ اللَّهَ الَّذِي خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَلَمْ يَعْيَ بِخَلْقِهِنَّ بِقَادِرٍ عَلَىٰ أَن يُحْيِيَ الْمَوْتَىٰ ۚ بَلَىٰ إِنَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ ۝٣٣
Awalam yaraw annal laahal lazee khalaqas samaawaati wal larda wa lam ya`ya bikhal qihinna biqaadirin `alaaa anyyuhiyal mawtaa; balaaa innahoo `alaa kulli shai`in Qadeer
📖 हिंदी अर्थ
क्या इन लोगों ने ये ग़ौर नहीं किया कि जिस ख़ुदा ने सारे आसमान और ज़मीन को पैदा किया और उनके पैदा करने से ज़रा भी थका नहीं वह इस बात पर क़ादिर है कि मुर्दो को ज़िन्दा करेगा हाँ (ज़रूर) वह हर चीज़ पर क़ादिर है

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَلَمْ يَعْيَ – और वह थका नहीं, न ही उसके लिए यह कठिन हुआ।
  • بِخَلْقِهِنَّ – उन (आसमानों और ज़मीन) को पैदा करने में।
  • بِقَادِرٍ – सामर्थ्य रखने वाला।
  • يُحْيِيَ الْمَوْتَى – मुर्दों को ज़िंदा करना।

तफ़सीर:

क्या इन मुशरिकों ने जो आख़िरत के दिन को झुठलाते हैं, इस बात पर ग़ौर नहीं किया कि जिस अल्लाह ने आसमानों और ज़मीन को बिना किसी पहले नमूने के पैदा किया, और उन्हें पैदा करने में न तो वह थका और न ही उसके लिए यह कठिन हुआ—क्या वह इस पर क़ुदरत नहीं रखता कि मुर्दों को दोबारा ज़िंदा कर दे? हाँ, यक़ीनन वह इस पर पूरी क़ुदरत रखता है। जिसने इतनी बड़ी और विशाल मख़लूक़ात को बिना किसी मेहनत के पैदा कर दिया, उसके लिए मुर्दों को ज़िंदा करना कहीं ज़्यादा आसान है। वह हर चीज़ पर पूर्ण सामर्थ्य रखता है, और उसकी क़ुदरत के आगे कुछ भी असंभव नहीं है।

यह आयत हमें अल्लाह की अज़ीम क़ुदरत पर ग़ौर करने की दावत देती है। जब हम इस विशाल ब्रह्मांड को देखते हैं—ये आसमान, ये सितारे, ये पहाड़, ये समुद्र—तो हमारा दिल इस बात पर यक़ीन कर लेता है कि जिसने इन सबको पैदा किया, वह मुर्दों को ज़िंदा करने पर ज़रूर क़ादिर है। क़यामत का दिन आना लाज़िमी है, और उस दिन हर इंसान अपने अमल का बदला पाएगा। यही वह दिन है जब अच्छे लोगों को उनकी नेकी का इनाम मिलेगा और बुरे लोगों को उनकी बुराई की सज़ा।

अल्लाह की क़ुदरत पर यक़ीन करना और आख़िरत पर ईमान रखना इंसान को ज़िंदगी में सीधे रास्ते पर चलने की ताक़त देता है। जब इंसान जानता है कि उसके हर अमल का हिसाब होगा, तो वह गुनाहों से बचता है और नेकियों की तरफ बढ़ता है। यही ईमान इंसान को सब्र और शुक्र की तालीम देता है, और उसे इस दुनिया की फ़ानी ज़िंदगी से ऊपर उठाकर हमेशा रहने वाली ज़िंदगी की तरफ राहनुमाई करता है।



📜 आयत 31-35 — अल-अहकाफ

31يَا قَوْمَنَا أَجِيبُوا دَاعِيَ اللَّهِ وَآمِنُوا بِهِ يَغْفِرْ لَكُم مِّن ذُنُوبِكُمْ وَيُجِرْكُم مِّنْ عَذَابٍ أَلِيمٍ
ऐ हमारी क़ौम ख़ुदा की तरफ बुलाने वाले की बात मानों और ख़ुदा पर ईमान लाओ वह तुम्हारे गुनाह बख्श देगा और (क़यामत) में तुम्हें दर्दनाक अज़ाब से पनाह में रखेगा
32وَمَن لَّا يُجِبْ دَاعِيَ اللَّهِ فَلَيْسَ بِمُعْجِزٍ فِي الْأَرْضِ وَلَيْسَ لَهُ مِن دُونِهِ أَوْلِيَاءُ ۚ أُولَٰئِكَ فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
और जिसने ख़ुदा की तरफ बुलाने वाले की बात न मानी तो (याद रहे कि) वह (ख़ुदा को रूए) ज़मीन में आजिज़ नहीं कर सकता और न उस के सिवा कोई सरपरस्त होगा यही लोग गुमराही में हैं
33أَوَلَمْ يَرَوْا أَنَّ اللَّهَ الَّذِي خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَلَمْ يَعْيَ بِخَلْقِهِنَّ بِقَادِرٍ عَلَىٰ أَن يُحْيِيَ الْمَوْتَىٰ ۚ بَلَىٰ إِنَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
क्या इन लोगों ने ये ग़ौर नहीं किया कि जिस ख़ुदा ने सारे आसमान और ज़मीन को पैदा किया और उनके पैदा करने से ज़रा भी थका नहीं वह इस बात पर क़ादिर है कि मुर्दो को ज़िन्दा करेगा हाँ (ज़रूर) वह हर चीज़ पर क़ादिर है
34وَيَوْمَ يُعْرَضُ الَّذِينَ كَفَرُوا عَلَى النَّارِ أَلَيْسَ هَٰذَا بِالْحَقِّ ۖ قَالُوا بَلَىٰ وَرَبِّنَا ۚ قَالَ فَذُوقُوا الْعَذَابَ بِمَا كُنتُمْ تَكْفُرُونَ
जिस दिन कुफ्फ़ार (जहन्नुम की) आग के सामने पेश किए जाएँगे (तो उन से पूछा जाएगा) क्या अब भी ये बरहक़ नहीं है वह लोग कहेंगे अपने परवरदिगार की क़सम हाँ (हक़ है) ख़ुदा फ़रमाएगा तो लो अब अपने इन्कार व कुफ्र के बदले अज़ाब के मज़े चखो
35فَاصْبِرْ كَمَا صَبَرَ أُولُو الْعَزْمِ مِنَ الرُّسُلِ وَلَا تَسْتَعْجِل لَّهُمْ ۚ كَأَنَّهُمْ يَوْمَ يَرَوْنَ مَا يُوعَدُونَ لَمْ يَلْبَثُوا إِلَّا سَاعَةً مِّن نَّهَارٍ ۚ بَلَاغٌ ۚ فَهَلْ يُهْلَكُ إِلَّا الْقَوْمُ الْفَاسِقُونَ
तो (ऐ रसूल) पैग़म्बरों में से जिस तरह अव्वलुल अज्म (आली हिम्मत), सब्र करते रहे तुम भी सब्र करो और उनके लिए (अज़ाब) की ताज़ील की ख्वाहिश न करो जिस दिन यह लोग उस कयामत को देखेंगे जिसको उनसे वायदा किया जाता है तो (उनको मालूम होगा कि) गोया ये लोग (दुनिया में) बहुत रहे होगें तो सारे दिन में से एक घड़ी भर तो बस वही लोग हलाक होंगे जो बदकार थे
अल-अहकाफकुरान सूची
35आयत
मक्कीRevelation
33आयत

अनुवाद — अल-अहकाफ 33

सूरा अल-अहकाफ आयत 33 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या इन लोगों ने ये ग़ौर नहीं किया कि जिस…

सूरा आयत 33/35 — अल-अहकाफ الأحقاف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अहकाफ सुनें, अल-अहकाफ अनुवाद, अल-अहकाफ mp3, अल-अहकाफ pdf. आयत 31–35. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए