अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَلَمْ يَعْيَ – और वह थका नहीं, न ही उसके लिए यह कठिन हुआ।
- بِخَلْقِهِنَّ – उन (आसमानों और ज़मीन) को पैदा करने में।
- بِقَادِرٍ – सामर्थ्य रखने वाला।
- يُحْيِيَ الْمَوْتَى – मुर्दों को ज़िंदा करना।
तफ़सीर:
क्या इन मुशरिकों ने जो आख़िरत के दिन को झुठलाते हैं, इस बात पर ग़ौर नहीं किया कि जिस अल्लाह ने आसमानों और ज़मीन को बिना किसी पहले नमूने के पैदा किया, और उन्हें पैदा करने में न तो वह थका और न ही उसके लिए यह कठिन हुआ—क्या वह इस पर क़ुदरत नहीं रखता कि मुर्दों को दोबारा ज़िंदा कर दे? हाँ, यक़ीनन वह इस पर पूरी क़ुदरत रखता है। जिसने इतनी बड़ी और विशाल मख़लूक़ात को बिना किसी मेहनत के पैदा कर दिया, उसके लिए मुर्दों को ज़िंदा करना कहीं ज़्यादा आसान है। वह हर चीज़ पर पूर्ण सामर्थ्य रखता है, और उसकी क़ुदरत के आगे कुछ भी असंभव नहीं है।
यह आयत हमें अल्लाह की अज़ीम क़ुदरत पर ग़ौर करने की दावत देती है। जब हम इस विशाल ब्रह्मांड को देखते हैं—ये आसमान, ये सितारे, ये पहाड़, ये समुद्र—तो हमारा दिल इस बात पर यक़ीन कर लेता है कि जिसने इन सबको पैदा किया, वह मुर्दों को ज़िंदा करने पर ज़रूर क़ादिर है। क़यामत का दिन आना लाज़िमी है, और उस दिन हर इंसान अपने अमल का बदला पाएगा। यही वह दिन है जब अच्छे लोगों को उनकी नेकी का इनाम मिलेगा और बुरे लोगों को उनकी बुराई की सज़ा।
अल्लाह की क़ुदरत पर यक़ीन करना और आख़िरत पर ईमान रखना इंसान को ज़िंदगी में सीधे रास्ते पर चलने की ताक़त देता है। जब इंसान जानता है कि उसके हर अमल का हिसाब होगा, तो वह गुनाहों से बचता है और नेकियों की तरफ बढ़ता है। यही ईमान इंसान को सब्र और शुक्र की तालीम देता है, और उसे इस दुनिया की फ़ानी ज़िंदगी से ऊपर उठाकर हमेशा रहने वाली ज़िंदगी की तरफ राहनुमाई करता है।
📜 आयत 31-35 — अल-अहकाफ
अनुवाद — अल-अहकाफ 33
सूरा अल-अहकाफ आयत 33 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या इन लोगों ने ये ग़ौर नहीं किया कि जिस…सूरा आयत 33/35 — अल-अहकाफ الأحقاف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अहकाफ सुनें, अल-अहकाफ अनुवाद, अल-अहकाफ mp3, अल-अहकाफ pdf. आयत 31–35. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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