Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- قَوَّامِينَ: अर्थात सदैव क़ायम रहने वाले, हर हाल में अडिग रहने वाले।
- شُهَدَاءَ بِالْقِسْطِ: न्याय और इंसाफ़ पर गवाह बनने वाले।
- لَا يَجْرِمَنَّكُمْ: तुम्हें कभी प्रेरित न करे, तुम पर हावी न हो।
- شَنَآنُ: किसी से दुश्मनी, नफ़रत, या बैर।
- أَقْرَبُ لِلتَّقْوَى: परहेज़गारी और अल्लाह के डर के अधिक निकट।
तफ़सीर:
ऐ ईमान लाने वालों! तुम अल्लाह के लिए सदैव सत्य और न्याय पर क़ायम रहने वाले बनो। तुम्हारा उद्देश्य केवल अल्लाह की रज़ा और उसका प्रतिफल होना चाहिए, न कि कोई सांसारिक लाभ। तुम न्याय के साथ गवाही दो — चाहे वह गवाही तुम्हारे अपने विरुद्ध ही क्यों न हो, या तुम्हारे माता-पिता और रिश्तेदारों के विरुद्ध। न्याय को कभी अपने स्वार्थ या भावनाओं से प्रभावित न होने दो।
फिर अल्लाह तआला एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात सिखाता है: किसी क़ौम या समुदाय के प्रति तुम्हारी नफ़रत और दुश्मनी तुम्हें कभी न्याय छोड़ने पर मजबूर न करे। यानी जिससे तुम्हारा बैर हो, उसके साथ भी पूरा इंसाफ़ करो। नफ़रत कभी तुम्हारे फ़ैसले को ख़राब न करे, और न ही तुम्हें सच बोलने से रोके। यह एक बहुत बड़ी परीक्षा है — कि इंसान अपने दुश्मन के साथ भी न्याय करे।
अल्लाह तआला स्पष्ट आदेश देता है: "न्याय करो!" यह न्याय सभी के साथ समान रूप से हो — चाहे वह मित्र हो या शत्रु। यही न्याय परहेज़गारी के अधिक निकट है। जब तुम न्याय करोगे, तो तुम्हारे दिल में अल्लाह का डर और बढ़ेगा, और तुम गुनाहों से बचते रहोगे। जो व्यक्ति न्याय छोड़ता है, वह अल्लाह की नाराज़गी के करीब पहुँचता है।
अंत में अल्लाह तआला डराता है: "अल्लाह से डरो!" यानी उसके आदेशों का पालन करो और उसकी मनाही से बचो। निश्चय ही अल्लाह उन सब कामों से पूरी तरह अवगत है जो तुम करते हो — कोई छोटा या बड़ा काम उससे छिपा नहीं है। वह तुम्हें तुम्हारे सभी कर्मों का पूरा-पूरा बदला देगा।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम न्याय और इंसाफ़ का धर्म है। अल्लाह तआला ने हमें आदेश दिया है कि हम हर हाल में न्याय करें — चाहे हमारी भावनाएँ हमें किसी और ओर ले जाएँ। यही वह उच्च चरित्र है जो इस्लाम ने अपने अनुयायियों को दिया है। जब एक मुसलमान अपने दुश्मन के साथ भी न्याय करता है, तो यह उसके ईमान की सच्चाई का प्रमाण है। यही वह सुंदरता है जो लोगों को इस्लाम की ओर आकर्षित करती है। आइए हम इस आयत पर अमल करें और अपने जीवन को न्याय, सच्चाई और परहेज़गारी का प्रतीक बनाएँ — ताकि हम अल्लाह की रहमत और उसकी जन्नत के हक़दार बन सकें।
📜 आयत 6-10 — सूरा अल-माइदा
अनुवाद — अल-माइदा 8
सूरा अल-माइदा आयत 8 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ ईमानदारों ख़ुदा (की ख़ुशनूदी) के लिए इन्साफ़ के साथ…सूरा आयत 8/120 — सूरा अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-माइदा सुनें, सूरा अल-माइदा अनुवाद, सूरा अल-माइदा mp3, सूरा अल-माइदा pdf. आयत 6–10. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-माइदा
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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