काफ · 41/45
अनुवाद उच्चारण — सूरा काफ
وَاسْتَمِعْ يَوْمَ يُنَادِ الْمُنَادِ مِن مَّكَانٍ قَرِيبٍ ۝٤١
Wastami` yawma yunaa dil munaadi mim makaanin qareeb
📖 हिंदी अर्थ
और कान लगा कर सुन रखो कि जिस दिन पुकारने वाला (इसराफ़ील) नज़दीक ही जगह से आवाज़ देगा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَاسْتَمِعْ: सुनो, कान लगाकर सुनो।
  • يَوْمَ يُنَادِ الْمُنَادِ: उस दिन जब पुकारने वाला (इसराफील अलैहिस्सलाम) पुकारेगा।
  • مِن مَّكَانٍ قَرِيبٍ: निकट स्थान से, यानी ऐसी जगह से जहाँ से आवाज़ सब तक पहुँच जाए।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप उस दिन को याद रखें और उस पुकार को सुनने के लिए तैयार रहें, जब पुकारने वाला फ़रिश्ता (इसराफील अलैहिस्सलाम) सूर (नरसिंगा) में दूसरी बार फूँक मारेगा और सभी लोगों को हशर (एकत्र होने) के मैदान में बुलाएगा। यह पुकार इतने निकट स्थान से होगी कि हर जगह के लोग उसे साफ़ सुन लेंगे, और यह आवाज़ सत्य और सच्ची होगी जिसमें कोई संदेह नहीं। यह वह दिन होगा जब सभी लोग अपनी क़ब्रों से निकलकर अपने रब के सामने हाज़िर होंगे।

यह पुकार केवल एक चेतावनी नहीं, बल्कि अल्लाह की क़ुदरत का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि वह हर चीज़ पर सक्षम है। जिस तरह उसने पहली बार सृष्टि की, उसी तरह दूसरी बार भी सबको जीवित करेगा। यह दिन उन लोगों के लिए राहत और खुशी का होगा जिन्होंने दुनिया में अल्लाह की इबादत की और उसके रसूलों की पैरवी की। वे इस पुकार को अपने लिए बशारत (शुभ सूचना) समझेंगे। लेकिन उन लोगों के लिए यह दिन बड़ी मुसीबत और पछतावे का होगा जिन्होंने दुनिया में अल्लाह की नाफ़रमानी की और उसके दीन से मुँह मोड़ा।

ऐ इंसान! यह आवाज़ हर कान तक पहुँचने वाली है, और यह दिन आकर रहेगा। इसलिए आज ही अपने अमल को सुधार लो, तौबा कर लो, और उस दिन की तैयारी कर लो जब कोई माल और औलाद काम नहीं आएगी, बल्कि सिर्फ़ सच्चा ईमान और नेक अमल ही काम आएगा। यह पुकार हमें याद दिलाती है कि हमारी ज़िंदगी का कोई अंजाम है, और हमें उस अंजाम के लिए तैयार रहना चाहिए। अल्लाह से दुआ है कि वह हमें उस दिन की फिक्र करने वाला और उसकी राह पर चलने वाला बनाए।



📜 आयत 39-43 — सूरा काफ

39فَاصْبِرْ عَلَىٰ مَا يَقُولُونَ وَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ قَبْلَ طُلُوعِ الشَّمْسِ وَقَبْلَ الْغُرُوبِ
तो (ऐ रसूल) जो कुछ ये (काफ़िर) लोग किया करते हैं उस पर तुम सब्र करो और आफ़ताब के निकलने से पहले अपने परवरदिगार के हम्द की तस्बीह किया करो
40وَمِنَ اللَّيْلِ فَسَبِّحْهُ وَأَدْبَارَ السُّجُودِ
और थोड़ी देर रात को भी और नमाज़ के बाद भी उसकी तस्बीह करो
41وَاسْتَمِعْ يَوْمَ يُنَادِ الْمُنَادِ مِن مَّكَانٍ قَرِيبٍ
और कान लगा कर सुन रखो कि जिस दिन पुकारने वाला (इसराफ़ील) नज़दीक ही जगह से आवाज़ देगा
42يَوْمَ يَسْمَعُونَ الصَّيْحَةَ بِالْحَقِّ ۚ ذَٰلِكَ يَوْمُ الْخُرُوجِ
(कि उठो) जिस दिन लोग एक सख्त चीख़ को बाख़ूबी सुन लेगें वही दिन (लोगों) के कब्रों से निकलने का होगा
43إِنَّا نَحْنُ نُحْيِي وَنُمِيتُ وَإِلَيْنَا الْمَصِيرُ
बेशक हम ही (लोगों को) ज़िन्दा करते हैं और हम ही मारते हैं
काफकुरान सूची
45आयत
मक्कीअवतरण स्थान
41आयत

अनुवाद — काफ 41

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Monday, September 28, 2026

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