काफ · 5/45
अनुवाद उच्चारण — सूरा काफ
بَلْ كَذَّبُوا بِالْحَقِّ لَمَّا جَاءَهُمْ فَهُمْ فِي أَمْرٍ مَّرِيجٍ ۝٥
Bal kazzaboo bilhaqqi lammaa jaaa`ahum fahum feee amrim mareej
📖 हिंदी अर्थ
मगर जब उनके पास दीन (हक़) आ पहुँचा तो उन्होने उसे झुठलाया तो वह लोग एक ऐसी बात में उलझे हुए हैं जिसे क़रार नहीं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

بَلْ كَذَّبُوا بِالْحَقِّ لَمَّا جَاءَهُمْ فَهُمْ فِي أَمْرٍ مَّرِيجٍ

शब्दों के अर्थ:

  • بِالْحَقِّ: सत्य से, अर्थात क़ुरआन से।
  • مَرِيجٍ: अस्त-व्यस्त, उलझा हुआ, जिसमें कोई स्थिरता न हो।

तफ़सीर:

इन मुशरिकों ने जब सत्य (क़ुरआन) उनके पास आया, तो उसे झुठला दिया। उन्होंने उस पर विचार नहीं किया, न उसे समझने की कोशिश की, बल्कि तुरंत उसे अस्वीकार कर दिया। इसी कारण वे एक उलझन और अस्त-व्यस्तता में पड़ गए। कभी वे कहते कि यह जादू है, कभी कहते कि यह शायरी है, कभी कहते कि यह कहानी है — इस तरह वे किसी एक बात पर स्थिर नहीं रहे। उनकी बातें आपस में टकराती थीं, उनका दिल और दिमाग दोनों परेशान थे। यह सब इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने सत्य को स्वीकार नहीं किया। अगर वे सत्य को अपना लेते, तो उन्हें सुकून और स्थिरता मिलती, लेकिन सत्य को ठुकराकर वे हमेशा के लिए बेचैनी और भटकाव में डूब गए।

दावत और नसीहत:

यह आयत हमें बताती है कि सत्य को स्वीकार करने में ही इंसान की भलाई है। जो व्यक्ति सत्य को ठुकराता है, वह कभी चैन नहीं पा सकता। उसकी ज़िंदगी उलझनों और परेशानियों से भरी रहती है। लेकिन जो सत्य को क़बूल कर लेता है, अल्लाह उसे सुकून, स्थिरता और सीधा रास्ता देता है। क़ुरआन वह सत्य है जो इंसान को अंधेरों से निकालकर रोशनी की ओर ले जाता है। आओ, हम सब इस सत्य को अपनाएँ, उस पर अमल करें, और अपनी ज़िंदगी को शांति और सफलता से भर लें। अल्लाह हमें सत्य को समझने और उस पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 3-7 — सूरा काफ

3أَإِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا ۖ ذَٰلِكَ رَجْعٌ بَعِيدٌ
भला जब हम मर जाएँगे और (सड़ गल कर) मिटटी हो जाएँगे तो फिर ये दोबार ज़िन्दा होना (अक्ल से) बईद (बात है)
4قَدْ عَلِمْنَا مَا تَنقُصُ الْأَرْضُ مِنْهُمْ ۖ وَعِندَنَا كِتَابٌ حَفِيظٌ
उनके जिस्मों से ज़मीन जिस चीज़ को (खा खा कर) कम करती है वह हमको मालूम है और हमारे पास तो तहरीरी याददाश्त किताब लौहे महफूज़ मौजूद है
5بَلْ كَذَّبُوا بِالْحَقِّ لَمَّا جَاءَهُمْ فَهُمْ فِي أَمْرٍ مَّرِيجٍ
मगर जब उनके पास दीन (हक़) आ पहुँचा तो उन्होने उसे झुठलाया तो वह लोग एक ऐसी बात में उलझे हुए हैं जिसे क़रार नहीं
6أَفَلَمْ يَنظُرُوا إِلَى السَّمَاءِ فَوْقَهُمْ كَيْفَ بَنَيْنَاهَا وَزَيَّنَّاهَا وَمَا لَهَا مِن فُرُوجٍ
तो क्या इन लोगों ने अपने ऊपर आसमान की नज़र नहीं की कि हमने उसको क्यों कर बनाया और उसको कैसी ज़ीनत दी और उनसे कहीं शिगाफ्त तक नहीं
7وَالْأَرْضَ مَدَدْنَاهَا وَأَلْقَيْنَا فِيهَا رَوَاسِيَ وَأَنبَتْنَا فِيهَا مِن كُلِّ زَوْجٍ بَهِيجٍ
और ज़मीन को हमने फैलाया और उस पर बोझल पहाड़ रख दिये और इसमें हर तरह की ख़ुशनुमा चीज़ें उगाई ताकि तमाम रूजू लाने वाले
काफकुरान सूची
45आयत
मक्कीअवतरण स्थान
5आयत

अनुवाद — काफ 5

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Wednesday, September 30, 2026

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