काफ · 6/45
अनुवाद उच्चारण — काफ
أَفَلَمْ يَنظُرُوا إِلَى السَّمَاءِ فَوْقَهُمْ كَيْفَ بَنَيْنَاهَا وَزَيَّنَّاهَا وَمَا لَهَا مِن فُرُوجٍ ۝٦
Afalam yanzurooo ilas samaaa`i fawqahum kaifa banainaahaa wa zaiyannaahaa wa maa lahaa min furooj
📖 हिंदी अर्थ
तो क्या इन लोगों ने अपने ऊपर आसमान की नज़र नहीं की कि हमने उसको क्यों कर बनाया और उसको कैसी ज़ीनत दी और उनसे कहीं शिगाफ्त तक नहीं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • फ़ुरूज: दरारें, चीर, शिगाफ़ या कोई कमी और खराबी।

तफ़सीर:

क्या इन लोगों ने जो आख़िरत और दोबारा जीवित होने का इनकार करते हैं, कभी अपने ऊपर आसमान की तरफ़ नहीं देखा? उस आसमान को जिसे हमने बिना किसी स्तंभ के ऊँचा उठाया, मज़बूत बनाया और सितारों से सजाया। यह आसमान इतना सुंदर और परिपूर्ण है कि उसमें कोई दरार, कोई शिगाफ़, कोई कमी या कोई खराबी नहीं है। यह पूरी तरह से सलामत और बे-ऐब है।

जिसने इस विशाल आसमान को बिना किसी सहारे के खड़ा किया, उसे सितारों से ज़ीनत दी, और उसे हर प्रकार की कमी से पाक रखा, क्या वह मुर्दों को दोबारा ज़िंदा करने पर क़ादिर नहीं? यह आसमान अपनी सूरत और अपनी बुनियाद से उसकी क़ुदरत का जीता-जागता सबूत है। जो ख़ालिक़ इतने बड़े कारख़ाने को बिना किसी मदद के बनाए रखे हुए है, उसके लिए इंसानों को दोबारा ज़िंदा करना क्या मुश्किल है?

यह नज़ारा हर इंसान के सामने हर वक़्त मौजूद है, बस ज़रूरत है ग़ौर और फ़िक्र की। जो लोग आसमान की इस बनावट पर ग़ौर करेंगे, वे कभी क़यामत के दिन को झुठला नहीं सकते। यह आसमान की बुलंदी, उसकी सजावट और उसकी सलामती — सब कुछ हमारे रब की क़ुदरत की निशानियाँ हैं। क्या हम इन निशानियों से सबक़ नहीं लेते?

याद रखिए! यह क़ुरआन हमें उस ज़ात की तरफ़ बुलाता है जिसने यह काइनात बनाई। जब हम आसमान की तरफ़ देखते हैं, तो हमें अपने रब की अज़मत का एहसास होता है। यही एहसास हमें ईमान की तरफ़ ले जाता है और हमें यक़ीन दिलाता है कि जिसने यह सब बनाया, वह हमें दोबारा ज़िंदा करके हमारे आमाल का हिसाब लेगा। इसलिए आओ, हम आसमान की तरफ़ देखें, उस पर ग़ौर करें, और अपने रब की क़ुदरत से सबक़ हासिल करें।



📜 आयत 4-8 — काफ

4قَدْ عَلِمْنَا مَا تَنقُصُ الْأَرْضُ مِنْهُمْ ۖ وَعِندَنَا كِتَابٌ حَفِيظٌ
उनके जिस्मों से ज़मीन जिस चीज़ को (खा खा कर) कम करती है वह हमको मालूम है और हमारे पास तो तहरीरी याददाश्त किताब लौहे महफूज़ मौजूद है
5بَلْ كَذَّبُوا بِالْحَقِّ لَمَّا جَاءَهُمْ فَهُمْ فِي أَمْرٍ مَّرِيجٍ
मगर जब उनके पास दीन (हक़) आ पहुँचा तो उन्होने उसे झुठलाया तो वह लोग एक ऐसी बात में उलझे हुए हैं जिसे क़रार नहीं
6أَفَلَمْ يَنظُرُوا إِلَى السَّمَاءِ فَوْقَهُمْ كَيْفَ بَنَيْنَاهَا وَزَيَّنَّاهَا وَمَا لَهَا مِن فُرُوجٍ
तो क्या इन लोगों ने अपने ऊपर आसमान की नज़र नहीं की कि हमने उसको क्यों कर बनाया और उसको कैसी ज़ीनत दी और उनसे कहीं शिगाफ्त तक नहीं
7وَالْأَرْضَ مَدَدْنَاهَا وَأَلْقَيْنَا فِيهَا رَوَاسِيَ وَأَنبَتْنَا فِيهَا مِن كُلِّ زَوْجٍ بَهِيجٍ
और ज़मीन को हमने फैलाया और उस पर बोझल पहाड़ रख दिये और इसमें हर तरह की ख़ुशनुमा चीज़ें उगाई ताकि तमाम रूजू लाने वाले
8تَبْصِرَةً وَذِكْرَىٰ لِكُلِّ عَبْدٍ مُّنِيبٍ
(बन्दे) हिदायत और इबरत हासिल करें
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अनुवाद — काफ 6

सूरा काफ आयत 6 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो क्या इन लोगों ने अपने ऊपर आसमान की नज़र…

सूरा आयत 6/45 — काफ ق (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: काफ सुनें, काफ अनुवाद, काफ mp3, काफ pdf. आयत 4–8. हिंदी अर्थ: اردو.




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Wednesday, August 19, 2026

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