काफ · 7/45
अनुवाद उच्चारण — सूरा काफ
وَالْأَرْضَ مَدَدْنَاهَا وَأَلْقَيْنَا فِيهَا رَوَاسِيَ وَأَنبَتْنَا فِيهَا مِن كُلِّ زَوْجٍ بَهِيجٍ ۝٧
Wal arda madadnaahaa wa alqainaa feehaa rawaasiya wa ambatnaa feehaa min kulli zawjim baheej
📖 हिंदी अर्थ
और ज़मीन को हमने फैलाया और उस पर बोझल पहाड़ रख दिये और इसमें हर तरह की ख़ुशनुमा चीज़ें उगाई ताकि तमाम रूजू लाने वाले

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • मददनाहा: हमने उसे फैलाया और बिछाया।
  • रवासी: पहाड़, जो ज़मीन को जमाए रखते हैं।
  • ज़ौज: क़िस्म, प्रकार या जोड़ा।
  • बहीज: खूबसूरत, हसीन, जो देखने वाले को खुशी दे।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला अपनी क़ुदरत के नमूने पेश कर रहा है। उसने ज़मीन को फैलाया और बिछाया, उसे रहने के क़ाबिल बनाया। उस पर पहाड़ों को जमा दिया, ताकि ज़मीन अपने रहने वालों को लेकर डगमगाए नहीं और उन्हें सुकून हासिल रहे। फिर उसी ज़मीन से उसने हर क़िस्म के पेड़-पौधे, फल और सब्ज़ियाँ उगाईं, जो देखने में इतने खूबसूरत और भले होते हैं कि देखने वाले की आँखें ठंडी हो जाती हैं और दिल खुशी से भर जाता है।

ये सब कुछ अल्लाह की रहमत और उसकी तदबीर का नतीजा है। जो ज़मीन बंजर और बेकार लगती है, उसी से अल्लाह तरह-तरह की नेअमतें पैदा करता है। ये नज़ारे हमें याद दिलाते हैं कि जिस अल्लाह ने ये सब बनाया है, वही मुर्दों को ज़िंदा करने पर भी क़ादिर है। जिस तरह बारिश के बाद ज़मीन हरी-भरी हो जाती है, उसी तरह क़यामत के दिन सब लोग ज़िंदा होकर उठ खड़े होंगे।

इस आयत में हमारे लिए सबक़ है कि हम अपने रब की नेअमतों पर ग़ौर करें, उसका शुक्र अदा करें और समझ लें कि ये दुनिया की ज़िंदगी आख़िरत की तैयारी के लिए है। अल्लाह की क़ुदरत के ये नज़ारे हमें ईमान की तरफ़ बुलाते हैं और बताते हैं कि उसकी रहमत से हमें कभी मायूस नहीं होना चाहिए।



📜 आयत 5-9 — सूरा काफ

5بَلْ كَذَّبُوا بِالْحَقِّ لَمَّا جَاءَهُمْ فَهُمْ فِي أَمْرٍ مَّرِيجٍ
मगर जब उनके पास दीन (हक़) आ पहुँचा तो उन्होने उसे झुठलाया तो वह लोग एक ऐसी बात में उलझे हुए हैं जिसे क़रार नहीं
6أَفَلَمْ يَنظُرُوا إِلَى السَّمَاءِ فَوْقَهُمْ كَيْفَ بَنَيْنَاهَا وَزَيَّنَّاهَا وَمَا لَهَا مِن فُرُوجٍ
तो क्या इन लोगों ने अपने ऊपर आसमान की नज़र नहीं की कि हमने उसको क्यों कर बनाया और उसको कैसी ज़ीनत दी और उनसे कहीं शिगाफ्त तक नहीं
7وَالْأَرْضَ مَدَدْنَاهَا وَأَلْقَيْنَا فِيهَا رَوَاسِيَ وَأَنبَتْنَا فِيهَا مِن كُلِّ زَوْجٍ بَهِيجٍ
और ज़मीन को हमने फैलाया और उस पर बोझल पहाड़ रख दिये और इसमें हर तरह की ख़ुशनुमा चीज़ें उगाई ताकि तमाम रूजू लाने वाले
8تَبْصِرَةً وَذِكْرَىٰ لِكُلِّ عَبْدٍ مُّنِيبٍ
(बन्दे) हिदायत और इबरत हासिल करें
9وَنَزَّلْنَا مِنَ السَّمَاءِ مَاءً مُّبَارَكًا فَأَنبَتْنَا بِهِ جَنَّاتٍ وَحَبَّ الْحَصِيدِ
और हमने आसमान से बरकत वाला पानी बरसाया तो उससे बाग़ (के दरख्त) उगाए और खेती का अनाज और लम्बी लम्बी खजूरें
काफकुरान सूची
45आयत
मक्कीअवतरण स्थान
7आयत

अनुवाद — काफ 7

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Tuesday, September 29, 2026

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