अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- मददनाहा: हमने उसे फैलाया और बिछाया।
- रवासी: पहाड़, जो ज़मीन को जमाए रखते हैं।
- ज़ौज: क़िस्म, प्रकार या जोड़ा।
- बहीज: खूबसूरत, हसीन, जो देखने वाले को खुशी दे।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला अपनी क़ुदरत के नमूने पेश कर रहा है। उसने ज़मीन को फैलाया और बिछाया, उसे रहने के क़ाबिल बनाया। उस पर पहाड़ों को जमा दिया, ताकि ज़मीन अपने रहने वालों को लेकर डगमगाए नहीं और उन्हें सुकून हासिल रहे। फिर उसी ज़मीन से उसने हर क़िस्म के पेड़-पौधे, फल और सब्ज़ियाँ उगाईं, जो देखने में इतने खूबसूरत और भले होते हैं कि देखने वाले की आँखें ठंडी हो जाती हैं और दिल खुशी से भर जाता है।
ये सब कुछ अल्लाह की रहमत और उसकी तदबीर का नतीजा है। जो ज़मीन बंजर और बेकार लगती है, उसी से अल्लाह तरह-तरह की नेअमतें पैदा करता है। ये नज़ारे हमें याद दिलाते हैं कि जिस अल्लाह ने ये सब बनाया है, वही मुर्दों को ज़िंदा करने पर भी क़ादिर है। जिस तरह बारिश के बाद ज़मीन हरी-भरी हो जाती है, उसी तरह क़यामत के दिन सब लोग ज़िंदा होकर उठ खड़े होंगे।
इस आयत में हमारे लिए सबक़ है कि हम अपने रब की नेअमतों पर ग़ौर करें, उसका शुक्र अदा करें और समझ लें कि ये दुनिया की ज़िंदगी आख़िरत की तैयारी के लिए है। अल्लाह की क़ुदरत के ये नज़ारे हमें ईमान की तरफ़ बुलाते हैं और बताते हैं कि उसकी रहमत से हमें कभी मायूस नहीं होना चाहिए।
📜 आयत 5-9 — काफ
अनुवाद — काफ 7
सूरा काफ आयत 7 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ज़मीन को हमने फैलाया और उस पर बोझल पहाड़…सूरा आयत 7/45 — काफ ق (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: काफ सुनें, काफ अनुवाद, काफ mp3, काफ pdf. आयत 5–9. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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