अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- अफ़सिह्रुन: क्या यह जादू है?
- हाज़ा: यह (जो अज़ाब तुम देख रहे हो)
- अम: या (क्या)
- अन्तुम ला तुब्सिरून: क्या तुम देख नहीं रहे हो?
तफ़सीर:
यह आयत उस भयानक दृश्य का वर्णन कर रही है जब काफ़िरों को जहन्नम की आग में झोंका जाएगा। उस समय उनसे कहा जाएगा: "क्या यह जो अज़ाब तुम देख रहे हो, जादू है? या तुम देख ही नहीं रहे हो?"
यह एक तंज़िया (व्यंग्यात्मक) सवाल है। दुनिया में जब नबी करीम ﷺ ने उन्हें सच्चाई दिखाई, तो वे उसे जादू कहते थे और आँखें बंद कर लेते थे। अब आख़िरत में जब वे अपनी आँखों से वह सब कुछ देख रहे हैं जो उन्हें बताया गया था, तो क्या वे इसे भी जादू कहेंगे? या अब उनकी आँखें खुल गई हैं?
यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया में जो लोग सच्चाई से आँखें मूँद लेते हैं, वे आख़िरत में उस सच्चाई को अपनी आँखों से देखेंगे, लेकिन तब उनका पछतावा किसी काम नहीं आएगा। यह हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि हम दुनिया में ही आँखें खोल लें, दिल की आँखों से सच्चाई को देख लें, और अल्लाह के बताए रास्ते पर चलें।
अल्लाह तआला हमें हिदायत दे, हमें अंधों में से न बनाए, बल्कि आँखों वालों में से बनाए जो उसकी निशानियों को देखते हैं और उसकी इबादत करते हैं। आमीन।
📜 आयत 13-17 — अत-तूर
अनुवाद — अत-तूर 15
सूरा अत-तूर आयत 15 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो क्या ये जादू है या तुमको नज़र ही नहीं…सूरा आयत 15/49 — अत-तूर الطور (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अत-तूर सुनें, अत-तूर अनुवाद, अत-तूर mp3, अत-तूर pdf. आयत 13–17. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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