अत-तूर · 16/49
अनुवाद उच्चारण — अत-तूर
اصْلَوْهَا فَاصْبِرُوا أَوْ لَا تَصْبِرُوا سَوَاءٌ عَلَيْكُمْ ۖ إِنَّمَا تُجْزَوْنَ مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ ۝١٦
Islawhaa fasbirooo aw laa tasbiroo sawaaa`un `alaikum innamaa tujzawna maa kuntum ta`maloon
📖 हिंदी अर्थ
इसी में घुसो फिर सब्र करो या बेसब्री करो (दोनों) तुम्हारे लिए यकसाँ हैं तुम्हें तो बस उन्हीं कामों का बदला मिलेगा जो तुम किया करते थे
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اصْلَوْهَا: इस आग में प्रवेश करो और उसकी गर्मी का अनुभव करो।
  • فَاصْبِرُوا: इस पर धैर्य रखो।
  • سَوَاءٌ عَلَيْكُمْ: तुम्हारे लिए बराबर है, कोई फर्क नहीं पड़ता।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब काफिरों को जहन्नम की आग में डाला जाएगा, तो उनसे कहा जाएगा: "इस आग में प्रवेश करो और इसकी तपिश और जलन का पूरा अनुभव करो। अब चाहे तुम धैर्य रखो या न रखो, तुम्हारे लिए दोनों बराबर है। न तो धैर्य रखने से तुम्हारी पीड़ा कम होगी, और न ही बेचैनी और घबराहट से तुम्हें कोई राहत मिलेगी। यह आग तुम्हें हर तरफ से घेर लेगी, और तुम्हारा कोई सहारा नहीं होगा।"

यह अज़ाब तुम्हें अकारण नहीं दिया जा रहा, बल्कि यह तुम्हारे उन कर्मों का सटीक बदला है जो तुमने दुनिया में किए थे। तुमने सत्य को झुठलाया, रसूलों की नाफ़रमानी की, और अपनी इच्छाओं का पालन किया। आज तुम्हें उसी का फल मिल रहा है। अल्लाह तआला किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि हर इंसान को उसके किए का पूरा-पूरा बदला देता है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें अल्लाह के अज़ाब से डराती है और साथ ही यह भी सिखाती है कि हमारे कर्मों का हिसाब ज़रूर होगा। यह हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि हम दुनिया में ऐसे काम करें जो अल्लाह को पसंद हों, ताकि आख़िरत में हमें इस भयानक अज़ाब से बचाया जा सके। अल्लाह तआला रहमत वाला है, उसने हमें मौका दिया है कि हम तौबा करें और अपने कर्म सुधारें। जो लोग दुनिया में अल्लाह की इबादत करते हैं और उसके रास्ते पर चलते हैं, उनके लिए जन्नत की नेमतें हैं, जहाँ कोई दर्द नहीं, कोई गम नहीं। आइए, हम सब अपने जीवन को अल्लाह की रज़ा के अनुसार ढालें और उस दिन की शर्मिंदगी से बचें, जब कोई पलायन संभव नहीं होगा।

🎧 सुनें

📜 आयत 14-18 — अत-तूर

14هَٰذِهِ النَّارُ الَّتِي كُنتُم بِهَا تُكَذِّبُونَ
(और उनसे कहा जाएगा) यही वह जहन्नुम है जिसे तुम झुठलाया करते थे
15أَفَسِحْرٌ هَٰذَا أَمْ أَنتُمْ لَا تُبْصِرُونَ
तो क्या ये जादू है या तुमको नज़र ही नहीं आता
16اصْلَوْهَا فَاصْبِرُوا أَوْ لَا تَصْبِرُوا سَوَاءٌ عَلَيْكُمْ ۖ إِنَّمَا تُجْزَوْنَ مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
इसी में घुसो फिर सब्र करो या बेसब्री करो (दोनों) तुम्हारे लिए यकसाँ हैं तुम्हें तो बस उन्हीं कामों का बदला मिलेगा जो तुम किया करते थे
17إِنَّ الْمُتَّقِينَ فِي جَنَّاتٍ وَنَعِيمٍ
बेशक परहेज़गार लोग बाग़ों और नेअमतों में होंगे
18فَاكِهِينَ بِمَا آتَاهُمْ رَبُّهُمْ وَوَقَاهُمْ رَبُّهُمْ عَذَابَ الْجَحِيمِ
जो (जो नेअमतें) उनके परवरदिगार ने उन्हें दी हैं उनके मज़े ले रहे हैं और उनका परवरदिगार उन्हें दोज़ख़ के अज़ाब से बचाएगा
अत-तूरकुरान सूची
49आयत
मक्कीRevelation
16आयत

अनुवाद — अत-तूर 16

सूरा अत-तूर आयत 16 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इसी में घुसो फिर सब्र करो या बेसब्री करो (दोनों)…

सूरा आयत 16/49 — अत-तूर الطور (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अत-तूर सुनें, अत-तूर अनुवाद, अत-तूर mp3, अत-तूर pdf. आयत 14–18. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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