अत-तूर · 25/49
अनुवाद उच्चारण — सूरा अत-तूर
وَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ يَتَسَاءَلُونَ ۝٢٥
Wa aqbala ba`duhum `alaa ba`diny yatasaaa`aloon
📖 हिंदी अर्थ
और एक दूसरे की तरफ रूख़ करके (लुत्फ की) बातें करेंगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • وَأَقْبَلَ – और वे आगे बढ़े / एक-दूसरे की ओर रुख किया
  • بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ – उनमें से एक दूसरे की ओर
  • يَتَسَاءَلُونَ – वे एक-दूसरे से प्रश्न कर रहे हैं

तफ़सीर:

यह आयत उस अद्भुत दृश्य का वर्णन करती है जो जन्नत (स्वर्ग) में होगा, जब अल्लाह तआला अपने नेक बंदों को जन्नत में दाखिल करेगा। जन्नती लोग, जो दुनिया में एक-दूसरे को जानते थे या जो आपस में भाईचारे और मुहब्बत से जुड़े थे, वे जन्नत में मिलेंगे और एक-दूसरे की ओर रुख करके बातचीत करेंगे। वे एक-दूसरे से पूछेंगे कि उन्हें यह महान नेमत (आशीर्वाद) कैसे मिली? वे आपस में उन अच्छे कर्मों का ज़िक्र करेंगे जो उन्होंने दुनिया में किए थे, और उस दौरान वे अल्लाह की रहमत और करम की तारीफ़ करेंगे।

यह प्रश्न-उत्तर महज़ जिज्ञासा नहीं होगा, बल्कि यह एक-दूसरे को नेमत की याद दिलाने, अल्लाह का शुक्र अदा करने और उसकी बड़ाई बयान करने का ज़रिया होगा। वे कहेंगे: "हम दुनिया में अपने परिवारों के बीच रहते हुए भी अल्लाह से डरते थे, उसके अज़ाब से डरते थे, और हम उससे दुआ करते थे कि हमें जहन्नम की आग से बचाए। अल्लाह ने हम पर रहमत की, हमें हिदायत दी, हमारी दुआ कबूल की और हमें इस नेमत तक पहुँचाया।"

यह दृश्य हमें सिखाता है कि जन्नत में भी लोगों के बीच आपसी मुहब्बत, भाईचारा और अच्छी बातचीत होगी। वहाँ कोई दुश्मनी, ईर्ष्या या बुराई नहीं होगी। यह उन लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है जो दुनिया में अल्लाह की इबादत करते हैं, उससे डरते हैं और नेक काम करते हैं। अल्लाह उन्हें ऐसी जगह देगा जहाँ हर तरफ़ खुशी, सुकून और मुहब्बत होगी।

यह आयत हमें यह भी बताती है कि जन्नत की नेमतें सिर्फ़ खाने-पीने और आराम तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सबसे बड़ी नेमत अल्लाह की रज़ा (प्रसन्नता) और उसके दीदार की खुशी है। जन्नती लोग एक-दूसरे से बातें करके उस खुशी को और बढ़ाएँगे।

हमें चाहिए कि हम इस आयत से सबक लें और अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की इबादत, उसके डर और नेक कामों को अपनाएँ, ताकि हम भी उन लोगों में शामिल हों जो जन्नत में एक-दूसरे से खुशी-खुशी बातें करेंगे और अल्लाह की रहमत का ज़िक्र करेंगे। अल्लाह हम सबको जन्नत की इस खुशी तक पहुँचाए। आमीन।



📜 आयत 23-27 — सूरा अत-तूर

23يَتَنَازَعُونَ فِيهَا كَأْسًا لَّا لَغْوٌ فِيهَا وَلَا تَأْثِيمٌ
वहाँ एक दूसरे से शराब का जाम ले लिया करेंगे जिसमें न कोई बेहूदगी है और न गुनाह
24۞ وَيَطُوفُ عَلَيْهِمْ غِلْمَانٌ لَّهُمْ كَأَنَّهُمْ لُؤْلُؤٌ مَّكْنُونٌ
(और ख़िदमत के लिए) नौजवान लड़के उनके आस पास चक्कर लगाया करेंगे वह (हुस्न व जमाल में) गोया एहतियात से रखे हुए मोती हैं
25وَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ يَتَسَاءَلُونَ
और एक दूसरे की तरफ रूख़ करके (लुत्फ की) बातें करेंगे
26قَالُوا إِنَّا كُنَّا قَبْلُ فِي أَهْلِنَا مُشْفِقِينَ
(उनमें से कुछ) कहेंगे कि हम इससे पहले अपने घर में (ख़ुदा से बहुत) डरा करते थे
27فَمَنَّ اللَّهُ عَلَيْنَا وَوَقَانَا عَذَابَ السَّمُومِ
तो ख़ुदा ने हम पर बड़ा एहसान किया और हमको (जहन्नुम की) लौ के अज़ाब से बचा लिया
अत-तूरकुरान सूची
49आयत
मक्कीअवतरण स्थान
25आयत

अनुवाद — अत-तूर 25

सूरा अत-तूर आयत 25 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और एक दूसरे की तरफ रूख़ करके (लुत्फ की) बातें…

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Thursday, October 1, 2026

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