अत-तूर · 46/49
अनुवाद उच्चारण — सूरा अत-तूर
يَوْمَ لَا يُغْنِي عَنْهُمْ كَيْدُهُمْ شَيْئًا وَلَا هُمْ يُنصَرُونَ ۝٤٦
Yawma laa yughnee `anhum kaidumhum shai`anw wa laa hum yunsaroon
📖 हिंदी अर्थ
इनके सामने आ जाए जिस दिन न इनकी मक्कारी ही कुछ काम आएगी और न इनकी मदद ही की जाएगी

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • कैद (كيد): चालाकी, धोखा, साज़िश या चतुराई से किया गया उपाय।
  • ला युगनी (لَا يُغْنِي): कुछ भी काम न आना, कोई लाभ न देना, किसी चीज़ को टालने में सक्षम न होना।
  • युन्सरून (يُنصَرُونَ): मदद दिए जाना, सहायता प्राप्त करना, बचाया जाना।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस भयानक दिन (क़ियामत) का वर्णन कर रही है, जब काफ़िरों और मुजरिमों की सारी चालाकियाँ, साज़िशें और धोखे बिल्कुल बेकार साबित होंगी। वे जो योजनाएँ दुनिया में बनाते थे, जो जाल बिछाते थे, जिन हथियारों से वे सच्चाई को दबाने की कोशिश करते थे — उनमें से कोई भी चीज़ उस दिन उन्हें अल्लाह के अज़ाब से नहीं बचा सकेगी। न उनकी ताक़त काम आएगी, न उनकी तदबीरें, न उनके साथी, न उनके मददगार।

उस दिन न तो कोई उन्हें अल्लाह की पकड़ से छुड़ाने के लिए आगे आएगा, और न ही कोई ऐसा शक्तिशाली सहारा होगा जो उन्हें अल्लाह के अज़ाब से बचा सके। उनके सारे ज़रिए — चाहे वे दुनियावी ताक़त हों, चाहे उनके बनाए हुए झूठे माबूद हों, चाहे उनकी आपसी मदद ही क्यों न हो — सब कुछ नाकाम हो जाएगा। यह उन लोगों के लिए सबसे बड़ी रुसवाई और निहायती बेबसी का दिन होगा।

दावती पहलू (नसीहत और तरग़ीब):

यह आयत हमें एक बहुत बड़ी हक़ीक़त की याद दिलाती है कि दुनिया की ताक़त, चालाकी और साज़िशें — चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों — अल्लाह के सामने बिल्कुल हीच हैं। इंसान जब तक अल्लाह की पकड़ से बचने के लिए दुनियावी ज़रियों पर भरोसा करता है, वह सख़्त ग़लती पर है।

लेकिन इसी के साथ यह आयत मोमिनों के लिए एक खुशख़बरी भी है कि जो लोग अल्लाह पर भरोसा करते हैं, उन्हें अल्लाह ख़ुद मदद देता है। जो लोग सच्चाई पर चलते हैं, उन्हें अल्लाह की तरफ़ से नुसरत (मदद) ज़रूर पहुँचती है — दुनिया में भी और आख़िरत में भी।

तो आओ, हम अपनी ताक़त और तदबीरों पर भरोसा करने के बजाय अल्लाह पर भरोसा करें, उसकी इबादत को अपनी ज़िंदगी का मरकज़ बनाएँ, और उस दिन के लिए तैयारी करें जब कोई चालाकी और कोई मदद काम नहीं आएगी — सिवाय अल्लाह की रहमत और उसकी मग़फ़िरत के। यही सबसे बड़ी कामयाबी है, और यही सच्ची नजात (मुक्ति) का रास्ता है।



📜 आयत 44-48 — सूरा अत-तूर

44وَإِن يَرَوْا كِسْفًا مِّنَ السَّمَاءِ سَاقِطًا يَقُولُوا سَحَابٌ مَّرْكُومٌ
और अगर ये लोग आसमान से कोई अज़ाब (अज़ाब का) टुकड़ा गिरते हुए देखें तो बोल उठेंगे ये तो दलदार बादल है
45فَذَرْهُمْ حَتَّىٰ يُلَاقُوا يَوْمَهُمُ الَّذِي فِيهِ يُصْعَقُونَ
तो (ऐ रसूल) तुम इनको इनकी हालत पर छोड़ दो यहाँ तक कि वह जिसमें ये बेहोश हो जाएँगे
46يَوْمَ لَا يُغْنِي عَنْهُمْ كَيْدُهُمْ شَيْئًا وَلَا هُمْ يُنصَرُونَ
इनके सामने आ जाए जिस दिन न इनकी मक्कारी ही कुछ काम आएगी और न इनकी मदद ही की जाएगी
47وَإِنَّ لِلَّذِينَ ظَلَمُوا عَذَابًا دُونَ ذَٰلِكَ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
और इसमें शक़ नहीं कि ज़ालिमों के लिए इसके अलावा और भी अज़ाब है मगर उनमें बहुतेरे नहीं जानते हैं
48وَاصْبِرْ لِحُكْمِ رَبِّكَ فَإِنَّكَ بِأَعْيُنِنَا ۖ وَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ حِينَ تَقُومُ
और (ऐ रसूल) तुम अपने परवरदिगार के हुक्म से इन्तेज़ार में सब्र किए रहो तो तुम बिल्कुल हमारी निगेहदाश्त में हो तो जब तुम उठा करो तो अपने परवरदिगार की हम्द की तस्बीह किया करो
अत-तूरकुरान सूची
49आयत
मक्कीअवतरण स्थान
46आयत

अनुवाद — अत-तूर 46

सूरा अत-तूर आयत 46 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इनके सामने आ जाए जिस दिन न इनकी मक्कारी ही…

सूरा आयत 46/49 — सूरा अत-तूर الطور (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तूर सुनें, सूरा अत-तूर अनुवाद, सूरा अत-तूर mp3, सूरा अत-तूर pdf. आयत 44–48. हिंदी अर्थ: اردو.





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Monday, September 28, 2026

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