अन-नज्म · 16/62
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नज्म
إِذْ يَغْشَى السِّدْرَةَ مَا يَغْشَىٰ ۝١٦
Iz yaghshas sidrata maa yaghshaa
📖 हिंदी अर्थ
जब छा रहा था सिदरा पर जो छा रहा था

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • यग़शा: ढक लेना, छा जाना
  • सिद्रत: बेरी का पेड़, जिसे 'सिद्रतुल मुन्तहा' कहा जाता है
  • मा यग़शा: जो कुछ उसे ढक रहा है (यानी अल्लाह का अज़ीम और रहस्यमय नूर और उसके विशेष आदेश)

तफ़सीर:

यह आयत उस अद्भुत और रहस्यमयी घटना की ओर इशारा करती है जो मेराज (आसमानी सफर) की रात को 'सिद्रतुल मुन्तहा' (सातवें आसमान पर स्थित बेरी का पेड़) के पास हुई। यह वह मुकाम है जहाँ से ऊपर कोई नहीं जा सकता और नीचे से आने वाली हर चीज़ यहीं रुकती है। यह जन्नत और अल्लाह की विशेष रहमतों की सीमा है।

जब नबी करीम ﷺ उस मुकाम पर पहुँचे, तो उस सिद्रतुल मुन्तहा को अल्लाह के आदेश से एक ऐसी चीज़ ने ढक लिया जिसे कोई बयान नहीं कर सकता। यह अल्लाह का नूर, उसकी महिमा और उसके विशेष फ़रिश्ते थे जिन्होंने उस पेड़ को अपनी रोशनी और हुज़ूर से ढक दिया। यहाँ अल्लाह ने जानबूझकर यह नहीं बताया कि आख़िर वह चीज़ क्या थी, क्योंकि यह उसकी अज़मत और रहस्य को बयान करने से बड़ा है। यह एक ऐसा दृश्य था जिसे न किसी आँख ने देखा, न किसी कान ने सुना और न किसी दिल ने महसूस किया।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह की कुदरत और उसके दीन के राज़ इंसानी समझ से बालातर हैं। हमें उन चीज़ों पर ईमान लाना चाहिए जो अल्लाह ने अपनी किताब में बताई हैं, चाहे हम उनकी हकीकत को न समझ सकें। यह हमारे ईमान की परीक्षा है कि हम ग़ैब पर विश्वास करें।

यह भी हमें बताता है कि अल्लाह के नबी ﷺ को जो कुछ दिखाया गया, वह सच्चा और यक़ीनी था। उन्होंने अपनी आँखों से अल्लाह की बड़ी-बड़ी निशानियाँ देखीं — जन्नत, जहन्नम, फ़रिश्ते और अल्लाह की अज़मत के नज़ारे। यह उनके नुबुव्वत की सबसे बड़ी दलील है।

प्यारे इस्लाम! यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह अपने प्यारे बंदों को अपनी रहमत और क़ुरबत के ऐसे मुकामों पर पहुँचाता है जिनका अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता। हमें चाहिए कि हम अपने नबी ﷺ की सुन्नत पर चलें और उनके बताए रास्ते पर साबित क़दम रहें। जो लोग नबी ﷺ की मेराज की घटना को झुठलाते हैं, वे सिर्फ़ अपना नुक़सान करते हैं। हमें चाहिए कि हम इस पर पूरा यक़ीन रखें और अल्लाह से दुआ करें कि वह हमें सच्चे ईमान और अमल की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 14-18 — सूरा अन-नज्म

14عِندَ سِدْرَةِ الْمُنتَهَىٰ
सिदरतुल मुनतहा के नज़दीक
15عِندَهَا جَنَّةُ الْمَأْوَىٰ
उसी के पास तो रहने की बेहिश्त है
16إِذْ يَغْشَى السِّدْرَةَ مَا يَغْشَىٰ
जब छा रहा था सिदरा पर जो छा रहा था
17مَا زَاغَ الْبَصَرُ وَمَا طَغَىٰ
(उस वक्त भी) उनकी ऑंख न तो और तरफ़ माएल हुई और न हद से आगे बढ़ी
18لَقَدْ رَأَىٰ مِنْ آيَاتِ رَبِّهِ الْكُبْرَىٰ
और उन्होने यक़ीनन अपने परवरदिगार (की क़ुदरत) की बड़ी बड़ी निशानियाँ देखीं
अन-नज्मकुरान सूची
62आयत
मक्कीअवतरण स्थान
16आयत

अनुवाद — अन-नज्म 16

सूरा अन-नज्म आयत 16 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जब छा रहा था सिदरा पर जो छा रहा था

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Thursday, October 1, 2026

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