Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَا زَاغَ: न तो झुका, न भटका, न हटा।
- الْبَصَرُ: आँख, दृष्टि (यहाँ नबी ﷺ की आँख)।
- وَمَا طَغَى: और न ही सीमा से आगे बढ़ी, न ही अत्याचार किया।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला ने अपने महबूब नबी ﷺ की उस महान यात्रा (मेराज) का एक अद्भुत दृश्य बयान किया है, जब नबी ﷺ सिदरतुल मुंतहा (बेरी के उस पेड़) के पास पहुँचे, जो सातवें आसमान पर है। उस समय उस सिदरा को अल्लाह के आदेश से एक ऐसी चीज़ ने ढक लिया जिसका वर्णन कोई नहीं कर सकता—ऐसी रोशनी, ऐसी महिमा और ऐसी बुज़ुर्गी कि उसका अंदाज़ा लगाना नामुमकिन है।
उस हालत में नबी ﷺ की आँख न तो दाईं ओर मुड़ी और न बाईं ओर, और न ही उससे आगे बढ़ने की कोशिश की। उनकी निगाह पूरी तरह क़ाबू में थी, अत्यंत स्थिर और शांत। न उसने किसी और चीज़ की तरफ देखा, न उस हद से आगे जाने की कोशिश की जो अल्लाह ने उनके लिए मुक़र्रर की थी। यह नबी ﷺ के अदब, फ़रमाँबरदारी और अल्लाह के सामने पूर्ण समर्पण का सबसे बड़ा सबूत है।
यह आयत हमें सिखाती है कि जब अल्लाह किसी बंदे को अपनी नज़दीकी और खास मेहरबानी अता करता है, तो उस बंदे का दिल और आँख दोनों अल्लाह की तरफ ही लगे रहते हैं। वह न तो भटकता है और न ही सीमा से आगे बढ़ता है। नबी ﷺ ने उस रात अल्लाह की बड़ी-बड़ी निशानियाँ देखीं—जन्नत, जहन्नम और अल्लाह की अज़ीम क़ुदरत के नमूने—और यह सब कुछ पूरे सब्र और एहतियात के साथ देखा।
इससे हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह की इबादत और उसके दीन पर चलने में हमें भी स्थिरता और संतुलन अपनाना चाहिए। न हम अल्लाह के हुक्म से पीछे हटें और न आगे बढ़ें—बल्कि जैसा अल्लाह ने सिखाया है, ठीक उसी तरह चलें। यही सच्ची मोहब्बत और सच्चा ईमान है कि बंदा अल्लाह के हुक्म के आगे सर झुका दे, और अपनी आँखों, कानों और दिल को सिर्फ अल्लाह की राह में लगाए।
यह आयत हमें नबी ﷺ की मोहब्बत और उनके अदब की तालीम देती है, और बताती है कि अल्लाह के नबी ﷺ हर मामले में हमारे लिए सबसे अच्छा नमूना हैं। जिसने उनकी सुन्नत को पकड़ा, वह कभी गुमराह नहीं हो सकता।
📜 आयत 15-19 — सूरा अन-नज्म
अनुवाद — अन-नज्म 17
सूरा अन-नज्म आयत 17 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (उस वक्त भी) उनकी ऑंख न तो और तरफ़ माएल…सूरा आयत 17/62 — सूरा अन-नज्म النجم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नज्म सुनें, सूरा अन-नज्म अनुवाद, सूरा अन-नज्म mp3, सूरा अन-नज्म pdf. आयत 15–19. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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