अन-नज्म · 17/62
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नज्म
مَا زَاغَ الْبَصَرُ وَمَا طَغَىٰ ۝١٧
Maa zaaghal basaru wa maa taghaa
📖 हिंदी अर्थ
(उस वक्त भी) उनकी ऑंख न तो और तरफ़ माएल हुई और न हद से आगे बढ़ी

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَا زَاغَ: न तो झुका, न भटका, न हटा।
  • الْبَصَرُ: आँख, दृष्टि (यहाँ नबी ﷺ की आँख)।
  • وَمَا طَغَى: और न ही सीमा से आगे बढ़ी, न ही अत्याचार किया।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला ने अपने महबूब नबी ﷺ की उस महान यात्रा (मेराज) का एक अद्भुत दृश्य बयान किया है, जब नबी ﷺ सिदरतुल मुंतहा (बेरी के उस पेड़) के पास पहुँचे, जो सातवें आसमान पर है। उस समय उस सिदरा को अल्लाह के आदेश से एक ऐसी चीज़ ने ढक लिया जिसका वर्णन कोई नहीं कर सकता—ऐसी रोशनी, ऐसी महिमा और ऐसी बुज़ुर्गी कि उसका अंदाज़ा लगाना नामुमकिन है।

उस हालत में नबी ﷺ की आँख न तो दाईं ओर मुड़ी और न बाईं ओर, और न ही उससे आगे बढ़ने की कोशिश की। उनकी निगाह पूरी तरह क़ाबू में थी, अत्यंत स्थिर और शांत। न उसने किसी और चीज़ की तरफ देखा, न उस हद से आगे जाने की कोशिश की जो अल्लाह ने उनके लिए मुक़र्रर की थी। यह नबी ﷺ के अदब, फ़रमाँबरदारी और अल्लाह के सामने पूर्ण समर्पण का सबसे बड़ा सबूत है।

यह आयत हमें सिखाती है कि जब अल्लाह किसी बंदे को अपनी नज़दीकी और खास मेहरबानी अता करता है, तो उस बंदे का दिल और आँख दोनों अल्लाह की तरफ ही लगे रहते हैं। वह न तो भटकता है और न ही सीमा से आगे बढ़ता है। नबी ﷺ ने उस रात अल्लाह की बड़ी-बड़ी निशानियाँ देखीं—जन्नत, जहन्नम और अल्लाह की अज़ीम क़ुदरत के नमूने—और यह सब कुछ पूरे सब्र और एहतियात के साथ देखा।

इससे हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह की इबादत और उसके दीन पर चलने में हमें भी स्थिरता और संतुलन अपनाना चाहिए। न हम अल्लाह के हुक्म से पीछे हटें और न आगे बढ़ें—बल्कि जैसा अल्लाह ने सिखाया है, ठीक उसी तरह चलें। यही सच्ची मोहब्बत और सच्चा ईमान है कि बंदा अल्लाह के हुक्म के आगे सर झुका दे, और अपनी आँखों, कानों और दिल को सिर्फ अल्लाह की राह में लगाए।

यह आयत हमें नबी ﷺ की मोहब्बत और उनके अदब की तालीम देती है, और बताती है कि अल्लाह के नबी ﷺ हर मामले में हमारे लिए सबसे अच्छा नमूना हैं। जिसने उनकी सुन्नत को पकड़ा, वह कभी गुमराह नहीं हो सकता।



📜 आयत 15-19 — सूरा अन-नज्म

15عِندَهَا جَنَّةُ الْمَأْوَىٰ
उसी के पास तो रहने की बेहिश्त है
16إِذْ يَغْشَى السِّدْرَةَ مَا يَغْشَىٰ
जब छा रहा था सिदरा पर जो छा रहा था
17مَا زَاغَ الْبَصَرُ وَمَا طَغَىٰ
(उस वक्त भी) उनकी ऑंख न तो और तरफ़ माएल हुई और न हद से आगे बढ़ी
18لَقَدْ رَأَىٰ مِنْ آيَاتِ رَبِّهِ الْكُبْرَىٰ
और उन्होने यक़ीनन अपने परवरदिगार (की क़ुदरत) की बड़ी बड़ी निशानियाँ देखीं
19أَفَرَأَيْتُمُ اللَّاتَ وَالْعُزَّىٰ
तो भला तुम लोगों ने लात व उज्ज़ा और तीसरे पिछले मनात को देखा
अन-नज्मकुरान सूची
62आयत
मक्कीअवतरण स्थान
17आयत

अनुवाद — अन-नज्म 17

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Thursday, October 1, 2026

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