अल-क़मर · 4/55
अनुवाद उच्चारण — अल-क़मर
وَلَقَدْ جَاءَهُم مِّنَ الْأَنبَاءِ مَا فِيهِ مُزْدَجَرٌ ۝٤
Wa laqad jaaa`ahum minal ambaaa`i maa feehi muzdajar
📖 हिंदी अर्थ
और उनके पास तो वह हालात पहुँच चुके हैं जिनमें काफी तम्बीह थीं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مِنَ الْأَنبَاءِ: पिछली उम्मतों की ख़बरें और उनके क़िस्से।
  • مُزْدَجَرٌ: वह चीज़ जो रोके और डराए, यानी नसीहत और इबरत लेने का ज़रिया।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि इन कुफ़्फ़ारे मक्का के पास वो सारी ख़बरें आ चुकी हैं जो पिछली उम्मतों से जुड़ी हुई हैं — जिन्होंने अपने रसूलों को झुठलाया और अल्लाह की नाफ़रमानी की, तो उन पर अज़ाब आया और वो तबाह कर दिए गए। ये क़िस्से क़ुरआन में बयान किए गए हैं ताकि इनमें उनके लिए सबक़ हो, और ये ख़बरें उन्हें उनके कुफ़्र और गुमराही से रोकने के लिए काफ़ी हैं। अगर वो दिल से सुनें और अक़्ल से सोचें, तो ये क़िस्से उन्हें अज़ाब से डराने और सच्चाई क़बूल करने की तरफ़ बुलाने के लिए काफ़ी हैं।

ये आयत हमें बताती है कि अल्लाह ने अपनी रहमत से हमें पिछली उम्मतों के हालात से आगाह किया है, ताकि हम उनकी ग़लतियों से बचें और उनके अंजाम से डरें। क़ुरआन का हर क़िस्सा हमारे लिए एक रोशनी है, जो हमें सीधे रास्ते पर चलने की तरग़ीब देता है और गुनाहों से रोकता है। जो शख्स इन ख़बरों से इबरत हासिल करता है, वो कामयाब होता है, और जो इन्हें नज़रअंदाज़ करता है, वो उसी अंजाम का सामना करेगा जो पिछली उम्मतों ने किया। अल्लाह तआला ने हमें अक़्ल दी है और क़ुरआन भेजा है — ये हमारी किस्मत है कि हम इनसे फ़ायदा उठाएँ और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाएँ।



📜 आयत 2-6 — अल-क़मर

2وَإِن يَرَوْا آيَةً يُعْرِضُوا وَيَقُولُوا سِحْرٌ مُّسْتَمِرٌّ
और अगर ये कुफ्फ़ार कोई मौजिज़ा देखते हैं, तो मुँह फेर लेते हैं, और कहते हैं कि ये तो बड़ा ज़बरदस्त जादू है
3وَكَذَّبُوا وَاتَّبَعُوا أَهْوَاءَهُمْ ۚ وَكُلُّ أَمْرٍ مُّسْتَقِرٌّ
और उन लोगों ने झुठलाया और अपनी नफ़सियानी ख्वाहिशों की पैरवी की, और हर काम का वक्त मुक़र्रर है
4وَلَقَدْ جَاءَهُم مِّنَ الْأَنبَاءِ مَا فِيهِ مُزْدَجَرٌ
और उनके पास तो वह हालात पहुँच चुके हैं जिनमें काफी तम्बीह थीं
5حِكْمَةٌ بَالِغَةٌ ۖ فَمَا تُغْنِ النُّذُرُ
और इन्तेहा दर्जे की दानाई मगर (उनको तो) डराना कुछ फ़ायदा नहीं देता
6فَتَوَلَّ عَنْهُمْ ۘ يَوْمَ يَدْعُ الدَّاعِ إِلَىٰ شَيْءٍ نُّكُرٍ
तो (ऐ रसूल) तुम भी उनसे किनाराकश रहो, जिस दिन एक बुलाने वाला (इसराफ़ील) एक अजनबी और नागवार चीज़ की तरफ़ बुलाएगा
अल-क़मरकुरान सूची
55आयत
मक्कीRevelation
4आयत

अनुवाद — अल-क़मर 4

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Tuesday, August 18, 2026

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