अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- حِكْمَةٌ بَالِغَةٌ: परिपूर्ण और अत्यंत उच्च कोटि की बुद्धि-युक्त बात, जो अपनी मंज़िल तक पहुँच चुकी हो।
- فَمَا تُغْنِ النُّذُرُ: डराने-सावधान करने वाली चेतावनियाँ किसी काम न आएँ।
तफ़सीर:
यह क़ुरआन जो इनकार करने वालों के पास आया है, वह अपने आप में एक बेहद परिपूर्ण और अक्लमंदी भरी हिदायत है, जो हर उस चीज़ को साफ़-साफ़ बयान करती है जिसकी इंसान को ज़रूरत है। यह हिकमत अपनी आख़िरी हद तक पहुँच चुकी है — इसमें कोई कमी नहीं, कोई खामी नहीं। यह सच्चाई को इस कदर वाज़ेह करती है कि किसी भी ज़िम्मेदार इंसान के पास बहाने की गुंजाइश नहीं बचती।
लेकिन सवाल यह है कि जब यह हिकमत इतनी मुकम्मल है, तो फिर डराने वाली चेतावनियाँ (नुज़ुर) उन लोगों को क्या फ़ायदा पहुँचा सकती हैं जिन्होंने पहले ही ईमान लाने से मुँह मोड़ लिया है और सच्चाई को झुठला दिया है? यह एक तोबीख़ (फटकार) का अंदाज़ है — यानी ऐसे लोगों के लिए नसीहत बेकार है, क्योंकि उनके दिलों पर मुहर लग चुकी है और वे हक़ को क़बूल करने के लिए तैयार ही नहीं।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की हिदायत अपनी तरफ़ से हमेशा मुकम्मल और अद्भुत होती है, लेकिन उसका फ़ायदा उठाना इंसान की अपनी मर्ज़ी पर निर्भर है। जो दिल खुला हो, वह इस हिकमत से रौशन हो जाता है; और जो दिल अंधा हो, उसके लिए कोई भी चेतावनी कारगर नहीं होती।
प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें याद दिलाती है कि क़ुरआन की हर आयत एक कीमती खज़ाना है। जो इसे समझकर अपनी ज़िंदगी में उतार लेता है, वह कभी नाकाम नहीं होता। अल्लाह ने अपनी रहमत से हमें यह किताब दी है ताकि हम अंधेरों से निकलकर रौशनी की तरफ़ आएँ। आओ, हम इस हिकमत को अपने दिलों में जगह दें, और उन लोगों की तरह न बनें जिनके लिए चेतावनियाँ बेकार हो गईं। अल्लाह हमें सच्चाई को क़बूल करने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 3-7 — अल-क़मर
अनुवाद — अल-क़मर 5
सूरा अल-क़मर आयत 5 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और इन्तेहा दर्जे की दानाई मगर (उनको तो) डराना कुछ…सूरा आयत 5/55 — अल-क़मर القمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़मर सुनें, अल-क़मर अनुवाद, अल-क़मर mp3, अल-क़मर pdf. आयत 3–7. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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