अल-क़मर · 43/55
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़मर
أَكُفَّارُكُمْ خَيْرٌ مِّنْ أُولَٰئِكُمْ أَمْ لَكُم بَرَاءَةٌ فِي الزُّبُرِ ۝٤٣
Akuffaarukum khairum min ulaaa`ikum am lakum baraaa`atun fiz Zubur
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ अहले मक्का) क्या उन लोगों से भी तुम्हारे कुफ्फार बढ़ कर हैं या तुम्हारे वास्ते (पहली) किताबों में माफी (लिखी हुई) है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَكُفَّارُكُمْ (अकुफ्फारुकुम): तुम्हारे काफ़िर (इनकार करने वाले)।
  • خَيْرٌ (ख़ैरुन): बेहतर, अधिक शक्तिशाली या अधिक सम्मानित।
  • مِنْ أُولَٰئِكُمْ (मिन उलाइकुम): उन (पिछले) लोगों से।
  • بَرَاءَةٌ (बराअतुन): छूट, मुक्ति, बरी होना।
  • الزُّبُرِ (अज़-ज़ुबुर): किताबें (आसमानी किताबें)।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ कुरैश के काफ़िरों! क्या तुम्हारा हाल उन पिछली उम्मतों से बेहतर है जिन्होंने अपने नबियों को झुठलाया और अल्लाह के अज़ाब का शिकार हुईं? क्या तुममें उनसे ज़्यादा ताक़त है, या तुम्हारे पास कोई ऐसी ज़मानत है जो उनके पास नहीं थी? यह सवाल दरअसल उन्हें चेतावनी देने के लिए है, कि अगर तुम भी वही रास्ता अपनाओगे जो नूह, आद, समूद, लूत और फ़िरऔन की क़ौमों ने अपनाया था, तो तुम्हारा अंजाम भी वही होगा।

क्या तुम्हारे पास कोई आसमानी किताब है जिसमें लिखा हो कि तुम्हें अज़ाब से छूट मिल जाएगी? हरगिज़ नहीं! यह सिर्फ़ तुम्हारा वहम और झूठा ख़याल है। अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) यही रही है कि जब कोई उम्मत अपने नबी को झुठलाती है और हद से गुज़र जाती है, तो उस पर अज़ाब आता है। तुम भी उसी राह पर हो, इसलिए डरो और अपने किए पर पछताओ, क्योंकि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के सामने किसी को भी अपनी ताक़त, माल या ओहदे पर नाज़ नहीं करना चाहिए। सच्ची इज़्ज़त तो अल्लाह की इबादत और उसके रसूल की पैरवी में है। जो लोग अल्लाह के हुक्मों से मुँह मोड़ते हैं, वे चाहे कितने भी ताक़तवर क्यों न हों, आख़िरकार उनका अंजाम बुरा होता है। इसलिए हमें चाहिए कि हम क़ुरआन और सुन्नत को पकड़ें, अपने गुनाहों से तौबा करें, और अल्लाह की रहमत के तलबगार बनें। अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान है, जो अपने बंदों को मौका देता है, लेकिन जब उसका अज़ाब आता है, तो कोई उसे टाल नहीं सकता।



📜 आयत 41-45 — सूरा अल-क़मर

41وَلَقَدْ جَاءَ آلَ فِرْعَوْنَ النُّذُرُ
और फिरऔन के पास भी डराने वाले (पैग़म्बर) आए
42كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا كُلِّهَا فَأَخَذْنَاهُمْ أَخْذَ عَزِيزٍ مُّقْتَدِرٍ
तो उन लोगों ने हमारी कुल निशानियों को झुठलाया तो हमने उनको इस तरह सख्त पकड़ा जिस तरह एक ज़बरदस्त साहिबे क़ुदरत पकड़ा करता है
43أَكُفَّارُكُمْ خَيْرٌ مِّنْ أُولَٰئِكُمْ أَمْ لَكُم بَرَاءَةٌ فِي الزُّبُرِ
(ऐ अहले मक्का) क्या उन लोगों से भी तुम्हारे कुफ्फार बढ़ कर हैं या तुम्हारे वास्ते (पहली) किताबों में माफी (लिखी हुई) है
44أَمْ يَقُولُونَ نَحْنُ جَمِيعٌ مُّنتَصِرٌ
क्या ये लोग कहते हैं कि हम बहुत क़वी जमाअत हैं
45سَيُهْزَمُ الْجَمْعُ وَيُوَلُّونَ الدُّبُرَ
अनक़रीब ही ये जमाअत शिकस्त खाएगी और ये लोग पीठ फेर कर भाग जाएँगे
अल-क़मरकुरान सूची
55आयत
मक्कीअवतरण स्थान
43आयत

अनुवाद — अल-क़मर 43

सूरा अल-क़मर आयत 43 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ अहले मक्का) क्या उन लोगों से भी तुम्हारे कुफ्फार…

सूरा आयत 43/55 — सूरा अल-क़मर القمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़मर सुनें, सूरा अल-क़मर अनुवाद, सूरा अल-क़मर mp3, सूरा अल-क़मर pdf. आयत 41–45. हिंदी अर्थ: اردو.





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Saturday, October 3, 2026

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