अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- जमी' (جميع): एकत्रित समूह, संगठित जमात
- मुन्तसिर (منتصر): विजयी, प्रभुत्वशाली, जिसे कोई पराजित न कर सके
तफ़सीर:
क़ुरआन करीम में अल्लाह तआला मक्का के काफ़िरों की उस बात का ज़िक्र कर रहे हैं जो वे अहंकार और घमंड से कहा करते थे। वे कहते थे: "हम एक संगठित और शक्तिशाली समुदाय हैं, हमारा फैसला एकजुट है, हमारी ताकत में कोई कमी नहीं। कोई हमें हरा नहीं सकता, कोई हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता।" यह उनकी जाहिलाना सोच थी, क्योंकि उन्होंने अपनी सांसारिक ताकत और जमावड़े पर भरोसा कर लिया था और अल्लाह की ताकत को भूल गए थे।
यह आयत उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो अपनी तादाद, अपने साधनों और अपनी संगठित शक्ति पर इतराते हैं। वे समझते हैं कि उनका जमावड़ा उन्हें हर मुसीबत से बचा लेगा, लेकिन इतिहास गवाह है कि अल्लाह की मर्ज़ी के आगे किसी की ताकत नहीं चलती। बद्र के मैदान में यही "जमी' मुन्तसिर" कहने वाले लोग मुट्ठी भर मुसलमानों के हाथों बुरी तरह पराजित हुए और उनका घमंड मिट्टी में मिल गया।
इस आयत से हमें सबक लेना चाहिए कि असली ताकत अल्लाह के पास है। जिसे अल्लाह चाहे, वह थोड़े से लोगों के साथ भी विजयी होता है, और जिसे वह चाहे, वह बड़ी से बड़ी ताकत के बावजूद नाकाम हो जाता है। हमें अपनी तादाद और साधनों पर नहीं, बल्कि अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। जब हम अल्लाह के साथ होंगे, तो कोई ताकत हमें हरा नहीं सकती। यही वह सच्चाई है जो हर मोमिन के दिल में होनी चाहिए - कि फ़तह अल्लाह की तरफ से आती है, और वही सबसे बड़ा मददगार है।
📜 आयत 42-46 — अल-क़मर
अनुवाद — अल-क़मर 44
सूरा अल-क़मर आयत 44 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या ये लोग कहते हैं कि हम बहुत क़वी जमाअत…सूरा आयत 44/55 — अल-क़मर القمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़मर सुनें, अल-क़मर अनुवाद, अल-क़मर mp3, अल-क़मर pdf. आयत 42–46. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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