अल-क़मर · 44/55
अनुवाद उच्चारण — अल-क़मर
أَمْ يَقُولُونَ نَحْنُ جَمِيعٌ مُّنتَصِرٌ ۝٤٤
Am yaqooloona nahnu jamee`um muntasir
📖 हिंदी अर्थ
क्या ये लोग कहते हैं कि हम बहुत क़वी जमाअत हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • जमी' (جميع): एकत्रित समूह, संगठित जमात
  • मुन्तसिर (منتصر): विजयी, प्रभुत्वशाली, जिसे कोई पराजित न कर सके

तफ़सीर:

क़ुरआन करीम में अल्लाह तआला मक्का के काफ़िरों की उस बात का ज़िक्र कर रहे हैं जो वे अहंकार और घमंड से कहा करते थे। वे कहते थे: "हम एक संगठित और शक्तिशाली समुदाय हैं, हमारा फैसला एकजुट है, हमारी ताकत में कोई कमी नहीं। कोई हमें हरा नहीं सकता, कोई हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता।" यह उनकी जाहिलाना सोच थी, क्योंकि उन्होंने अपनी सांसारिक ताकत और जमावड़े पर भरोसा कर लिया था और अल्लाह की ताकत को भूल गए थे।

यह आयत उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो अपनी तादाद, अपने साधनों और अपनी संगठित शक्ति पर इतराते हैं। वे समझते हैं कि उनका जमावड़ा उन्हें हर मुसीबत से बचा लेगा, लेकिन इतिहास गवाह है कि अल्लाह की मर्ज़ी के आगे किसी की ताकत नहीं चलती। बद्र के मैदान में यही "जमी' मुन्तसिर" कहने वाले लोग मुट्ठी भर मुसलमानों के हाथों बुरी तरह पराजित हुए और उनका घमंड मिट्टी में मिल गया।

इस आयत से हमें सबक लेना चाहिए कि असली ताकत अल्लाह के पास है। जिसे अल्लाह चाहे, वह थोड़े से लोगों के साथ भी विजयी होता है, और जिसे वह चाहे, वह बड़ी से बड़ी ताकत के बावजूद नाकाम हो जाता है। हमें अपनी तादाद और साधनों पर नहीं, बल्कि अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। जब हम अल्लाह के साथ होंगे, तो कोई ताकत हमें हरा नहीं सकती। यही वह सच्चाई है जो हर मोमिन के दिल में होनी चाहिए - कि फ़तह अल्लाह की तरफ से आती है, और वही सबसे बड़ा मददगार है।

🎧 सुनें

📜 आयत 42-46 — अल-क़मर

42كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا كُلِّهَا فَأَخَذْنَاهُمْ أَخْذَ عَزِيزٍ مُّقْتَدِرٍ
तो उन लोगों ने हमारी कुल निशानियों को झुठलाया तो हमने उनको इस तरह सख्त पकड़ा जिस तरह एक ज़बरदस्त साहिबे क़ुदरत पकड़ा करता है
43أَكُفَّارُكُمْ خَيْرٌ مِّنْ أُولَٰئِكُمْ أَمْ لَكُم بَرَاءَةٌ فِي الزُّبُرِ
(ऐ अहले मक्का) क्या उन लोगों से भी तुम्हारे कुफ्फार बढ़ कर हैं या तुम्हारे वास्ते (पहली) किताबों में माफी (लिखी हुई) है
44أَمْ يَقُولُونَ نَحْنُ جَمِيعٌ مُّنتَصِرٌ
क्या ये लोग कहते हैं कि हम बहुत क़वी जमाअत हैं
45سَيُهْزَمُ الْجَمْعُ وَيُوَلُّونَ الدُّبُرَ
अनक़रीब ही ये जमाअत शिकस्त खाएगी और ये लोग पीठ फेर कर भाग जाएँगे
46بَلِ السَّاعَةُ مَوْعِدُهُمْ وَالسَّاعَةُ أَدْهَىٰ وَأَمَرُّ
बात ये है कि इनके वायदे का वक्त क़यामत है और क़यामत बड़ी सख्त और बड़ी तल्ख़ (चीज़) है
अल-क़मरकुरान सूची
55आयत
मक्कीRevelation
44आयत

अनुवाद — अल-क़मर 44

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सूरा आयत 44/55 — अल-क़मर القمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़मर सुनें, अल-क़मर अनुवाद, अल-क़मर mp3, अल-क़मर pdf. आयत 42–46. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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