अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- آيَاتِنَا: हमारी निशानियाँ, प्रमाण और चमत्कार।
- أَخَذْنَاهُمْ: हमने उन्हें पकड़ा, उन्हें यातना में ग्रस्त किया।
- عَزِيزٍ: वह शक्तिशाली जो कभी पराजित न हो, जिसके आगे कोई ताकत न चले।
- مُقْتَدِرٍ: पूर्ण सामर्थ्यवान, जो हर चीज़ पर क़ादिर हो और जिसे कोई रोक न सके।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला ने फ़िरऔन और उसकी क़ौम का ज़िक्र किया है, जिन्होंने अल्लाह के रसूल मूसा (अलैहिस्सलाम) के ज़रिए आने वाली हर निशानी और हर चमत्कार को झुठला दिया। उन्होंने न सिर्फ़ एक या दो निशानियों को झुठलाया, बल्कि अल्लाह की सभी निशानियों को — जिनमें हाथ का चमकना, लाठी का अजगर बनना, तूफ़ान, टिड्डियाँ, जूँ, मेंढक, खून, और समुद्र का चिर जाना शामिल थे — झुठला दिया। ये सारे मोजिज़े उनके सामने खुले हुए प्रमाण थे, लेकिन उन्होंने हठ और अहंकार से उन्हें नकार दिया।
जब उनका ज़ुल्म और सरकशी हद से बढ़ गई, तो अल्लाह तआला ने उन्हें अपनी पकड़ में लिया। यह पकड़ ऐसी थी जो अज़ीज़ (सर्वशक्तिमान) की पकड़ है — कोई उसे टाल नहीं सकता, कोई उसके आगे रुकावट नहीं बन सकता। और वह मुक्तदिर है — हर चीज़ पर पूर्ण सामर्थ्य रखता है, उसकी क़ुदरत से बड़ी कोई ताकत नहीं। उसने उन्हें समुद्र में डुबोकर ऐसा अंजाम दिया कि उनकी सारी शक्ति और ऐश्वर्य मिट्टी में मिल गया।
दावत और नसीहत:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की निशानियों को झुठलाने का अंजाम कितना भयानक होता है। जब इंसान के पास सच्चाई के स्पष्ट प्रमाण आ जाएँ और वह फिर भी अहंकार में उन्हें नकारे, तो अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त होती है। लेकिन साथ ही यह भी याद रखें कि अल्लाह रहीम और करीम है — वह तौबा करने वालों को माफ कर देता है। जो लोग अपनी गलतियों से सीखते हैं और अल्लाह की ओर लौटते हैं, उनके लिए उसकी रहमत के दरवाज़े खुले हैं।
आज भी अल्लाह की निशानियाँ हमारे चारों ओर मौजूद हैं — आसमान और ज़मीन की रचना में, रात और दिन के बदलाव में, हमारे अपने अंदर की बनावट में। ये सब उसी अज़ीज़ और मुक्तदिर की याद दिलाती हैं। हमें चाहिए कि इन निशानियों पर ग़ौर करें, उनसे सबक लें, और अपने जीवन को अल्लाह की रज़ा के अनुसार ढालें। यही कामयाबी की राह है — दुनिया में इज़्ज़त और आख़िरत में जन्नत की खुशखबरी।
📜 आयत 40-44 — सूरा अल-क़मर
अनुवाद — अल-क़मर 42
सूरा अल-क़मर आयत 42 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो उन लोगों ने हमारी कुल निशानियों को झुठलाया तो…सूरा आयत 42/55 — सूरा अल-क़मर القمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़मर सुनें, सूरा अल-क़मर अनुवाद, सूरा अल-क़मर mp3, सूरा अल-क़मर pdf. आयत 40–44. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 7, 2026
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