अल-क़मर · 7/55
अनुवाद उच्चारण — अल-क़मर
خُشَّعًا أَبْصَارُهُمْ يَخْرُجُونَ مِنَ الْأَجْدَاثِ كَأَنَّهُمْ جَرَادٌ مُّنتَشِرٌ ۝٧
khushsha`an absaaruhum yakrujoona minal ajdaasi ka annahum jaraadum muntashir
📖 हिंदी अर्थ
तो (निदामत से) ऑंखें नीचे किए हुए कब्रों से निकल पड़ेंगे गोया वह फैली हुई टिड्डियाँ हैं

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • ख़ुश्शअन: झुकी हुई, नीची, अपमानित
  • अब्सार: आँखें, दृष्टियाँ
  • अज्दास: क़ब्रें (एकवचन: जदस)
  • जराद: टिड्डी
  • मुंतशिर: फैली हुई, बिखरी हुई

तफ़सीर:

उस दिन का दृश्य अत्यंत भयावह होगा। जब लोग अपनी क़ब्रों से उठेंगे, तो उनकी आँखें नीची झुकी होंगी, उनमें अपमान और लज्जा की छाप साफ़ दिखाई देगी। उनकी निगाहें किसी ओर नहीं उठ पाएँगी, क्योंकि उन्हें अपने किए पर शर्मिंदगी होगी और आगे आने वाले अज़ाब का ख़ौफ़ उन पर छाया होगा। यह विनम्रता और अपमान उनके चेहरों पर साफ़ झलकेगा।

वे अपनी क़ब्रों से इस तरह निकलेंगे जैसे बिखरी हुई टिड्डियाँ निकलती हैं। जिस प्रकार टिड्डियाँ जब किसी मैदान में फैलती हैं, तो उनकी भीड़ देखकर ऐसा लगता है कि पूरी ज़मीन उनसे भर गई है, उसी प्रकार उस दिन अनगिनत लोग अपनी क़ब्रों से निकलेंगे। वे इधर-उधर भागते हुए, घबराए और परेशान हालत में होंगे, क्योंकि उन्हें समझ नहीं आएगा कि कहाँ जाएँ और क्या करें। उनकी यह स्थिति उनके डर और बेचैनी को दर्शाएगी।

यह वह दिन होगा जब काफ़िर लोग कहेंगे: "यह तो बड़ा कठिन दिन है!" वे इस दिन की सख़्ती और भयावहता को महसूस करेंगे, लेकिन तब पछताने का कोई फ़ायदा नहीं होगा।

दावती पहलू:

यह आयत हमें उस महान दिन की याद दिलाती है जिसका आना निश्चित है। जिस प्रकार हम इस दुनिया में अपनी आँखें ऊँची करके चलते हैं और अपने कर्मों पर गर्व करते हैं, उस दिन सब कुछ उलट जाएगा। यह हमारे लिए एक चेतावनी है कि आज जब हमारे पास समय है, हम अपने जीवन को सही दिशा दें। अल्लाह की रहमत और क्षमा का दरवाज़ा खुला है, और उसकी ओर लौटने में ही हमारी भलाई है। आइए, हम उस दिन की शर्मिंदगी से बचने के लिए आज ही अपने आचरण को सुधारें, नमाज़ की पाबंदी करें, और अल्लाह की इबादत में अपना जीवन बिताएँ, ताकि उस दिन हमारी आँखें नीची न हों, बल्कि हमारे चेहरे रौशन हों और हम जन्नत की ओर बढ़ते हुए हों।



📜 आयत 5-9 — अल-क़मर

5حِكْمَةٌ بَالِغَةٌ ۖ فَمَا تُغْنِ النُّذُرُ
और इन्तेहा दर्जे की दानाई मगर (उनको तो) डराना कुछ फ़ायदा नहीं देता
6فَتَوَلَّ عَنْهُمْ ۘ يَوْمَ يَدْعُ الدَّاعِ إِلَىٰ شَيْءٍ نُّكُرٍ
तो (ऐ रसूल) तुम भी उनसे किनाराकश रहो, जिस दिन एक बुलाने वाला (इसराफ़ील) एक अजनबी और नागवार चीज़ की तरफ़ बुलाएगा
7خُشَّعًا أَبْصَارُهُمْ يَخْرُجُونَ مِنَ الْأَجْدَاثِ كَأَنَّهُمْ جَرَادٌ مُّنتَشِرٌ
तो (निदामत से) ऑंखें नीचे किए हुए कब्रों से निकल पड़ेंगे गोया वह फैली हुई टिड्डियाँ हैं
8مُّهْطِعِينَ إِلَى الدَّاعِ ۖ يَقُولُ الْكَافِرُونَ هَٰذَا يَوْمٌ عَسِرٌ
(और) बुलाने वाले की तरफ गर्दनें बढ़ाए दौड़ते जाते होंगे, कुफ्फ़ार कहेंगे ये तो बड़ा सख्त दिन है
9۞ كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍ فَكَذَّبُوا عَبْدَنَا وَقَالُوا مَجْنُونٌ وَازْدُجِرَ
इनसे पहले नूह की क़ौम ने भी झुठलाया था, तो उन्होने हमारे (ख़ास) बन्दे (नूह) को झुठलाया, और कहने लगे ये तो दीवाना है
अल-क़मरकुरान सूची
55आयत
मक्कीRevelation
7आयत

अनुवाद — अल-क़मर 7

सूरा अल-क़मर आयत 7 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो (निदामत से) ऑंखें नीचे किए हुए कब्रों से निकल…

सूरा आयत 7/55 — अल-क़मर القمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़मर सुनें, अल-क़मर अनुवाद, अल-क़मर mp3, अल-क़मर pdf. आयत 5–9. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए