Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَتَوَلَّ عَنْهُمْ: उनसे मुँह फेर लो, उन्हें छोड़ दो।
- يَوْمَ يَدْعُ الدَّاعِ: उस दिन जब पुकारने वाला (इसराफील) पुकारेगा।
- إِلَىٰ شَيْءٍ نُّكُرٍ: ऐसी भयानक और विकट चीज़ की ओर जिसे देखकर मन इनकार कर दे।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! जब ये लोग हिदायत की दावत को ठुकरा रहे हैं और अपनी ज़िद पर अड़े हुए हैं, तो आप उनसे किनारा कर लें और उन पर अफ़सोस न करें। उनके इनकार का ग़म अपने दिल में न रखें। बस उस दिन का इंतज़ार करें जब इसराफील अलैहिस्सलाम सूर (नरसिंगा) में फूँक मारेंगे और सारी ख़िलक़त को एक ऐसी जगह बुलाएँगे जो बेहद भयानक और हैरतअंगेज़ होगी। वह दिन इतना विकराल होगा कि लोगों ने ऐसा मंज़र कभी नहीं देखा होगा, न ही उनके ज़ेहन में इसका तसव्वुर होगा। यह क़यामत का दिन है, जब सब लोग अपनी क़ब्रों से उठकर हश्र के मैदान में जमा होंगे और अपने किए का हिसाब देंगे।
यह आयत हमें बताती है कि नबी करीम ﷺ का फ़र्ज़ सिर्फ पैग़ाम पहुँचाना था, हिदायत देना अल्लाह के हाथ में है। जब कोई ज़िद पर अड़ा हो और सच्चाई को न माने, तो उसके पीछे पड़ने की ज़रूरत नहीं, बल्कि अल्लाह के फ़ैसले का इंतज़ार करना चाहिए। अल्लाह का फ़ैसला उस दिन आएगा जो बेहद सख्त होगा। यह हमारे लिए सबक़ है कि हमें अपने आपको उस दिन के लिए तैयार करना चाहिए, क्योंकि वह दिन ज़रूर आने वाला है। जो लोग आज नबी की दावत को ठुकरा रहे हैं, वे उस दिन पछताएँगे, लेकिन पछताने का वक़्त निकल चुका होगा। अल्लाह हमें उस दिन की हिफ़ाज़त अता फ़रमाए और अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 4-8 — सूरा अल-क़मर
अनुवाद — अल-क़मर 6
सूरा अल-क़मर आयत 6 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो (ऐ रसूल) तुम भी उनसे किनाराकश रहो, जिस दिन…सूरा आयत 6/55 — सूरा अल-क़मर القمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़मर सुनें, सूरा अल-क़मर अनुवाद, सूरा अल-क़मर mp3, सूरा अल-क़मर pdf. आयत 4–8. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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