अल-क़मर · 6/55
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़मर
فَتَوَلَّ عَنْهُمْ ۘ يَوْمَ يَدْعُ الدَّاعِ إِلَىٰ شَيْءٍ نُّكُرٍ ۝٦
Fatawalla `anhum; yawma yad`ud daa`i ilaa shai `in nukur
📖 हिंदी अर्थ
तो (ऐ रसूल) तुम भी उनसे किनाराकश रहो, जिस दिन एक बुलाने वाला (इसराफ़ील) एक अजनबी और नागवार चीज़ की तरफ़ बुलाएगा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَتَوَلَّ عَنْهُمْ: उनसे मुँह फेर लो, उन्हें छोड़ दो।
  • يَوْمَ يَدْعُ الدَّاعِ: उस दिन जब पुकारने वाला (इसराफील) पुकारेगा।
  • إِلَىٰ شَيْءٍ نُّكُرٍ: ऐसी भयानक और विकट चीज़ की ओर जिसे देखकर मन इनकार कर दे।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! जब ये लोग हिदायत की दावत को ठुकरा रहे हैं और अपनी ज़िद पर अड़े हुए हैं, तो आप उनसे किनारा कर लें और उन पर अफ़सोस न करें। उनके इनकार का ग़म अपने दिल में न रखें। बस उस दिन का इंतज़ार करें जब इसराफील अलैहिस्सलाम सूर (नरसिंगा) में फूँक मारेंगे और सारी ख़िलक़त को एक ऐसी जगह बुलाएँगे जो बेहद भयानक और हैरतअंगेज़ होगी। वह दिन इतना विकराल होगा कि लोगों ने ऐसा मंज़र कभी नहीं देखा होगा, न ही उनके ज़ेहन में इसका तसव्वुर होगा। यह क़यामत का दिन है, जब सब लोग अपनी क़ब्रों से उठकर हश्र के मैदान में जमा होंगे और अपने किए का हिसाब देंगे।

यह आयत हमें बताती है कि नबी करीम ﷺ का फ़र्ज़ सिर्फ पैग़ाम पहुँचाना था, हिदायत देना अल्लाह के हाथ में है। जब कोई ज़िद पर अड़ा हो और सच्चाई को न माने, तो उसके पीछे पड़ने की ज़रूरत नहीं, बल्कि अल्लाह के फ़ैसले का इंतज़ार करना चाहिए। अल्लाह का फ़ैसला उस दिन आएगा जो बेहद सख्त होगा। यह हमारे लिए सबक़ है कि हमें अपने आपको उस दिन के लिए तैयार करना चाहिए, क्योंकि वह दिन ज़रूर आने वाला है। जो लोग आज नबी की दावत को ठुकरा रहे हैं, वे उस दिन पछताएँगे, लेकिन पछताने का वक़्त निकल चुका होगा। अल्लाह हमें उस दिन की हिफ़ाज़त अता फ़रमाए और अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 4-8 — सूरा अल-क़मर

4وَلَقَدْ جَاءَهُم مِّنَ الْأَنبَاءِ مَا فِيهِ مُزْدَجَرٌ
और उनके पास तो वह हालात पहुँच चुके हैं जिनमें काफी तम्बीह थीं
5حِكْمَةٌ بَالِغَةٌ ۖ فَمَا تُغْنِ النُّذُرُ
और इन्तेहा दर्जे की दानाई मगर (उनको तो) डराना कुछ फ़ायदा नहीं देता
6فَتَوَلَّ عَنْهُمْ ۘ يَوْمَ يَدْعُ الدَّاعِ إِلَىٰ شَيْءٍ نُّكُرٍ
तो (ऐ रसूल) तुम भी उनसे किनाराकश रहो, जिस दिन एक बुलाने वाला (इसराफ़ील) एक अजनबी और नागवार चीज़ की तरफ़ बुलाएगा
7خُشَّعًا أَبْصَارُهُمْ يَخْرُجُونَ مِنَ الْأَجْدَاثِ كَأَنَّهُمْ جَرَادٌ مُّنتَشِرٌ
तो (निदामत से) ऑंखें नीचे किए हुए कब्रों से निकल पड़ेंगे गोया वह फैली हुई टिड्डियाँ हैं
8مُّهْطِعِينَ إِلَى الدَّاعِ ۖ يَقُولُ الْكَافِرُونَ هَٰذَا يَوْمٌ عَسِرٌ
(और) बुलाने वाले की तरफ गर्दनें बढ़ाए दौड़ते जाते होंगे, कुफ्फ़ार कहेंगे ये तो बड़ा सख्त दिन है
अल-क़मरकुरान सूची
55आयत
मक्कीअवतरण स्थान
6आयत

अनुवाद — अल-क़मर 6

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Friday, October 2, 2026

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