अल-क़मर · 8/55
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़मर
مُّهْطِعِينَ إِلَى الدَّاعِ ۖ يَقُولُ الْكَافِرُونَ هَٰذَا يَوْمٌ عَسِرٌ ۝٨
Muhti`eena ilad daa`i yaqoolul kafiroona haazaa yawmun `asir
📖 हिंदी अर्थ
(और) बुलाने वाले की तरफ गर्दनें बढ़ाए दौड़ते जाते होंगे, कुफ्फ़ार कहेंगे ये तो बड़ा सख्त दिन है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • मुह्ति'ईन (مُّهْطِعِينَ): तेज़ी से दौड़ते हुए, गर्दनें उठाए हुए, किसी की ओर लपकते हुए।
  • द्दाअ (الدَّاعِ): पुकारने वाले की ओर, अर्थात इस्राफील (अलैहिस्सलाम) की आवाज़ की ओर।
  • असिर (عَسِر): सख्त, कठिन, भयानक।

तफ़सीर:

जब क़यामत का दिन आएगा और इस्राफील (अलैहिस्सलाम) सूर फूँकेंगे, तो सभी लोग कब्रों से निकलेंगे। उस वक़्त काफ़िरों की आँखों से ज़िल्लत और शर्मिंदगी टपक रही होगी। वे इस तरह तेज़ी से उस पुकारने वाले की ओर दौड़ेंगे जैसे टिड्डियाँ फैलकर इधर-उधर भागती हैं। उनकी गर्दनें ऊपर उठी होंगी, वे घबराए हुए, सहमे हुए और बेचैन होंगे। वे सब उसी आवाज़ की ओर लपकेंगे जो उन्हें हश्र के मैदान में बुला रही होगी।

उस वक़्त काफ़िर लोग हैरानी और डर के साथ कहेंगे: "यह तो बहुत ही सख्त और भयानक दिन है!" वे समझ जाएँगे कि आज का दिन कोई आम दिन नहीं, बल्कि हिसाब का दिन है, जिसमें हर इंसान को अपने कर्मों का सामना करना होगा। यह दिन उनके लिए इसलिए भी सख्त होगा क्योंकि उन्होंने दुनिया में अल्लाह के रसूलों को झुठलाया और अल्लाह की नाफ़रमानी की।

दीनी पैग़ाम:

यह आयत हमें बताती है कि क़यामत का दिन हक़ीक़त है और उस दिन की घबराहट और सख्ती से बचने का एक ही रास्ता है — इसी दुनिया में अल्लाह की इबादत करना, उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की पैरवी करना और अच्छे कर्म करना। जो लोग आज अल्लाह की बुलाहट (क़ुरआन और रसूल की दावत) की तरफ़ तेज़ी से नहीं दौड़ते, वे उस दिन मजबूरन पुकारने वाले की ओर दौड़ेंगे। अल्लाह हमें उस सख्त दिन के अज़ाब से बचाए और हमें अपनी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 6-10 — सूरा अल-क़मर

6فَتَوَلَّ عَنْهُمْ ۘ يَوْمَ يَدْعُ الدَّاعِ إِلَىٰ شَيْءٍ نُّكُرٍ
तो (ऐ रसूल) तुम भी उनसे किनाराकश रहो, जिस दिन एक बुलाने वाला (इसराफ़ील) एक अजनबी और नागवार चीज़ की तरफ़ बुलाएगा
7خُشَّعًا أَبْصَارُهُمْ يَخْرُجُونَ مِنَ الْأَجْدَاثِ كَأَنَّهُمْ جَرَادٌ مُّنتَشِرٌ
तो (निदामत से) ऑंखें नीचे किए हुए कब्रों से निकल पड़ेंगे गोया वह फैली हुई टिड्डियाँ हैं
8مُّهْطِعِينَ إِلَى الدَّاعِ ۖ يَقُولُ الْكَافِرُونَ هَٰذَا يَوْمٌ عَسِرٌ
(और) बुलाने वाले की तरफ गर्दनें बढ़ाए दौड़ते जाते होंगे, कुफ्फ़ार कहेंगे ये तो बड़ा सख्त दिन है
9۞ كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍ فَكَذَّبُوا عَبْدَنَا وَقَالُوا مَجْنُونٌ وَازْدُجِرَ
इनसे पहले नूह की क़ौम ने भी झुठलाया था, तो उन्होने हमारे (ख़ास) बन्दे (नूह) को झुठलाया, और कहने लगे ये तो दीवाना है
10فَدَعَا رَبَّهُ أَنِّي مَغْلُوبٌ فَانتَصِرْ
और उनको झिड़कियाँ भी दी गयीं, तो उन्होंने अपने परवरदिगार से दुआ की कि (बारे इलाहा मैं) इनके मुक़ाबले में कमज़ोर हूँ
अल-क़मरकुरान सूची
55आयत
मक्कीअवतरण स्थान
8आयत

अनुवाद — अल-क़मर 8

सूरा अल-क़मर आयत 8 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (और) बुलाने वाले की तरफ गर्दनें बढ़ाए दौड़ते जाते होंगे,…

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Thursday, October 1, 2026

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