अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- آلاء: अल्लाह की नेमतें, उपकार और एहसान।
- تُكَذِّبَانِ: तुम दोनों (इंसान और जिन्न) झुठलाते हो।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में इंसान और जिन्नात दोनों को संबोधित करते हुए फरमाता है कि ऐ इंसानों और जिन्नों! तुम अपने रब की किन-किन नेमतों और एहसानों को झुठलाओगे? यह एक ऐसा सवाल है जो दिल को झिंझोड़ देता है और अक्ल को हैरत में डाल देता है। अल्लाह की नेमतें इतनी अधिक और बेशुमार हैं कि उन्हें गिनना भी मुमकिन नहीं। हर सांस, हर पल, हर नज़र, हर कदम में उसकी रहमत और करम छलक रहा है। आसमान और ज़मीन, सूरज और चाँद, बारिश और हवा, खाना और पानी, सेहत और आराम — ये सब उसी की देन हैं। फिर भी इंसान और जिन्न अपनी नाफ़रमानी और कु़फ्र से इन नेमतों को झुठलाते हैं, यानी उनका शुक्र अदा नहीं करते और उन्हें अल्लाह की तरफ से नहीं मानते।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की नेमतों पर ग़ौर करें और उनका एहसान मानें। जब हम अपने चारों ओर देखते हैं तो हर तरफ अल्लाह का करम नज़र आता है। अगर हम इन नेमतों की क़द्र करें और उनका शुक्र अदा करें, तो अल्लाह और नेमतें बढ़ा देता है। यह आयत हमें यह भी बताती है कि क़यामत के दिन अल्लाह इंसान और जिन्न से पूछेगा कि तुमने मेरी नेमतों का क्या शुक्र अदा किया? क्या तुमने मेरी नेमतों को पहचाना और मेरी इबादत की? इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह की नेमतों को पहचानें, उनका शुक्र अदा करें और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक बनाएं। यही हमारी कामयाबी है, दुनिया में भी और आख़िरत में भी। अल्लाह तआला हम सबको अपनी नेमतों का शुक्र अदा करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन।
📜 आयत 59-63 — अर-रहमान
अनुवाद — अर-रहमान 61
सूरा अर-रहमान आयत 61 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर तुम दोनों अपने मालिक की किस किस नेअमत को…सूरा आयत 61/78 — अर-रहमान الرحمن (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-रहमान सुनें, अर-रहमान अनुवाद, अर-रहमान mp3, अर-रहमान pdf. आयत 59–63. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








