अल-मुजादिला · 21/22
अनुवाद उच्चारण — अल-मुजादिला
كَتَبَ اللَّهُ لَأَغْلِبَنَّ أَنَا وَرُسُلِي ۚ إِنَّ اللَّهَ قَوِيٌّ عَزِيزٌ ۝٢١
Katabal laahu la aghlibanna ana wa Rusulee; innal laaha qawiyyun `Azeez
📖 हिंदी अर्थ
ख़ुदा ने हुक्म नातिक दे दिया है कि मैं और मेरे पैग़म्बर ज़रूर ग़ालिब रहेंगे बेशक ख़ुदा बड़ा ज़बरदस्त ग़ालिब है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَتَبَ اللهُ: अल्लाह ने लिख दिया, अर्थात अपने पूर्व ज्ञान और फैसले में तय कर दिया।
  • لَأَغْلِبَنَّ: मैं अवश्य प्रभावी रहूँगा और विजयी रहूँगा।
  • أَنَا وَرُسُلِي: मैं और मेरे रसूल (पैगंबर)।
  • قَوِيٌّ: बहुत ताकतवर, जिसे कोई पराजित नहीं कर सकता।
  • عَزِيزٌ: प्रभुत्वशाली, जो अपने इरादे में अजेय हो।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपने पूर्व ज्ञान और अटल फैसले में यह बात लिख दी है कि वह और उसके रसूल अवश्य विजयी होंगे। यह विजय दो तरह से होती है: एक तो हुज्जत (प्रमाण) और स्पष्ट तर्क से, जिससे सत्य बात सामने आ जाती है और झूठ मिट जाता है, और दूसरी तरफ ताकत और ग़लबा से, जब अल्लाह अपने नबियों और उनके अनुयायियों को दुश्मनों पर फतह देता है। यह अल्लाह का वादा है जो कभी टूटता नहीं। जो कोई भी अल्लाह और उसके रसूल का विरोध करता है, उसे अंततः हार का सामना करना पड़ता है, चाहे वह कितना ही ताकतवर क्यों न हो। अल्लाह तआला ने इस आयत के अंत में अपने दो खूबसूरत नामों का जिक्र किया: "क़वी" (ताकतवर) और "अज़ीज़" (प्रभुत्वशाली), ताकि मोमिनों के दिल मजबूत हों और उन्हें यकीन हो कि उनका रब उनके साथ है। वह अपने रसूलों की मदद करने पर पूरी तरह कादिर है, और अपने दुश्मनों से बदला लेने में अजेय है।

दावत और नसीहत:

यह आयत हर मोमिन के लिए एक बेहतरीन खुशखबरी और हौसला है। जब आप देखते हैं कि सच्चाई के रास्ते पर चलने वालों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, तो याद रखें कि अल्लाह का वादा सच्चा है — आखिरकार सच्चाई ही जीतती है। इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें अपने ईमान पर डटे रहना चाहिए, क्योंकि अल्लाह अपने बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता। जो लोग अल्लाह की राह में जिहाद करते हैं, चाहे वह ज्ञान के जरिए हो या अमल के जरिए, अल्लाह उन्हें कामयाबी देता है। यह वादा सिर्फ नबियों तक सीमित नहीं है, बल्कि हर उस इंसान के लिए है जो अल्लाह के दीन की मदद करता है। अल्लाह ने फरमाया: "अगर तुम अल्लाह की मदद करोगे तो वह तुम्हारी मदद करेगा।" तो आइए, हम अपने जीवन में इस यकीन को मजबूत करें कि अल्लाह की ताकत के आगे कोई ताकत नहीं टिक सकती, और उसकी मदद का वादा कभी झूठा नहीं होता। यही हमारी कामयाबी की कुंजी है — इस दुनिया में भी और आखिरत में भी।



📜 आयत 19-22 — अल-मुजादिला

19اسْتَحْوَذَ عَلَيْهِمُ الشَّيْطَانُ فَأَنسَاهُمْ ذِكْرَ اللَّهِ ۚ أُولَٰئِكَ حِزْبُ الشَّيْطَانِ ۚ أَلَا إِنَّ حِزْبَ الشَّيْطَانِ هُمُ الْخَاسِرُونَ
शैतान ने इन पर क़ाबू पा लिया है और ख़ुदा की याद उनसे भुला दी है ये लोग शैतान के गिरोह है सुन रखो कि शैतान का गिरोह घाटा उठाने वाला है
20إِنَّ الَّذِينَ يُحَادُّونَ اللَّهَ وَرَسُولَهُ أُولَٰئِكَ فِي الْأَذَلِّينَ
जो लोग ख़ुदा और उसके रसूल से मुख़ालेफ़त करते हैं वह सब ज़लील लोगों में हैं
21كَتَبَ اللَّهُ لَأَغْلِبَنَّ أَنَا وَرُسُلِي ۚ إِنَّ اللَّهَ قَوِيٌّ عَزِيزٌ
ख़ुदा ने हुक्म नातिक दे दिया है कि मैं और मेरे पैग़म्बर ज़रूर ग़ालिब रहेंगे बेशक ख़ुदा बड़ा ज़बरदस्त ग़ालिब है
22لَّا تَجِدُ قَوْمًا يُؤْمِنُونَ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ يُوَادُّونَ مَنْ حَادَّ اللَّهَ وَرَسُولَهُ وَلَوْ كَانُوا آبَاءَهُمْ أَوْ أَبْنَاءَهُمْ أَوْ إِخْوَانَهُمْ أَوْ عَشِيرَتَهُمْ ۚ أُولَٰئِكَ كَتَبَ فِي قُلُوبِهِمُ الْإِيمَانَ وَأَيَّدَهُم بِرُوحٍ مِّنْهُ ۖ وَيُدْخِلُهُمْ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا ۚ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمْ وَرَضُوا عَنْهُ ۚ أُولَٰئِكَ حِزْبُ اللَّهِ ۚ أَلَا إِنَّ حِزْبَ اللَّهِ هُمُ الْمُفْلِحُونَ
जो लोग ख़ुदा और रोज़े आख़ेरत पर ईमान रखते हैं तुम उनको ख़ुदा और उसके रसूल के दुश्मनों से दोस्ती करते हुए न देखोगे अगरचे वह उनके बाप या बेटे या भाई या ख़ानदान ही के लोग (क्यों न हों) यही वह लोग हैं जिनके दिलों में ख़ुदा ने ईमान को साबित कर दिया है और ख़ास अपने नूर से उनकी ताईद की है और उनको (बेहिश्त में) उन (हरे भरे) बाग़ों में दाखिल करेगा जिनके नीचे नहरे जारी है (और वह) हमेश उसमें रहेंगे ख़ुदा उनसे राज़ी और वह ख़ुदा से ख़ुश यही ख़ुदा का गिरोह है सुन रखो कि ख़ुदा के गिरोग के लोग दिली मुरादें पाएँगे
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अनुवाद — अल-मुजादिला 21

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Tuesday, August 18, 2026

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