अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ (मुख्य शब्दों के अर्थ):
- شَيَاطِينَ الْإِنسِ وَالْجِنِّ: इंसानों और जिन्नात में से शैतान (सरकश और बुरे लोग)।
- يُوحِي بَعْضُهُمْ إِلَى بَعْضٍ: उनमें से एक-दूसरे को (बुरी बातें) डालता और पहुँचाता है।
- زُخْرُفَ الْقَوْلِ: सजावटी और धोखेबाज़ बातें, जिनका असल में कोई आधार नहीं होता।
- غُرُورًا: धोखा देने और भ्रम में डालने के लिए।
- يَفْتَرُونَ: वे झूठ गढ़ते हैं और बदनामी करते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ न प्यारे नबी! जिस तरह आपको अपने समय के मुशरिकों (बहुदेववादियों) की दुश्मनी का सामना करना पड़ रहा है, यह कोई नई बात नहीं है। अल्लाह तआला ने आपसे पहले हर नबी के लिए भी ऐसे ही दुश्मन बनाए थे — जो इंसानों में से सरकश और बुरे लोग थे, और जिन्नात में से भी शैतान थे। ये सब आपस में मिलकर एक-दूसरे को बुरी बातें पहुँचाते थे। जिन्नात के शैतान इंसानों के शैतानों को और इंसानों के शैतान जिन्नात के शैतानों को धोखे से भरी, सजावटी और मनमोहक बातें सिखाते थे, ताकि लोगों को गुमराह कर सकें और उन्हें सच्चे रास्ते से भटका सकें। यह सब वे इसलिए करते थे ताकि लोग धोखे में आ जाएँ और हक़ (सत्य) को छोड़कर बातिल (असत्य) की तरफ चले जाएँ।
अगर अल्लाह तआला चाहता तो वह इन सबको ऐसा करने से रोक सकता था, और ये कभी भी नबियों की दुश्मनी न कर पाते। लेकिन अल्लाह ने अपनी हिकमत (बुद्धि) से लोगों को आज़माने के लिए ऐसा होने दिया, ताकि सच्चे और झूठे लोग सामने आ जाएँ। यह एक इम्तिहान (परीक्षा) है, जो अल्लाह की सुन्नत (रीति) के अनुसार हर ज़माने में होती रही है।
इसलिए, ऐ नबी! आप इन दुश्मनों की परवाह न करें और उन्हें उनके हाल पर छोड़ दें। वे जो भी झूठ गढ़ते हैं, बदनामी करते हैं, या बुरी बातें फैलाते हैं, उनका अंजाम अल्लाह के हाथ में है। आपका काम केवल सच्चाई पहुँचाना है, और अल्लाह खुद उनके मक्कारी (चालबाज़ियों) का सामना करने वाला है।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें बहुत बड़ी तसल्ली देती है कि जब अल्लाह के नबियों को भी दुश्मनों का सामना करना पड़ा, तो हमारे लिए यह कोई अजीब बात नहीं है। सच्चाई के रास्ते पर चलने वालों के लिए मुश्किलें और दुश्मन हमेशा रहे हैं। लेकिन अल्लाह का वादा है कि वह अपने नेक बंदों की मदद करता है और उन्हें कामयाबी देता है। हमें भी अपने ईमान पर मज़बूती से क़ायम रहना चाहिए, और यह यक़ीन रखना चाहिए कि अल्लाह की मदद ज़रूर आएगी। जो लोग हमारा मज़ाक उड़ाते हैं या हमें रोकने की कोशिश करते हैं, उनकी परवाह न करें — बस अपना काम करते रहें, और अल्लाह पर भरोसा रखें। वही सबसे अच्छा हिमायती और मददगार है।
📜 आयत 110-114 — अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 112
सूरा अल-अनआम आयत 112 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कि और (ऐ रसूल जिस तरह ये कुफ्फ़ार तुम्हारे दुश्मन…सूरा आयत 112/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 110–114. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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