Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- تَصْغَى: झुकना, मेल खाना, प्रवृत्त होना
- أَفْئِدَة: दिल, हृदय (बहुवचन)
- يَرْضَوْهُ: उसे पसंद करना, उससे प्रसन्न होना
- يَقْتَرِفُوا: कमाना, अर्जित करना, (गुनाह) करना
- مُقْتَرِفُونَ: कमाने वाले, (बुरे कर्म) करने वाले
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उस बुराई और साज़िश का पर्दाफ़ाश करती है जो शैतान और उसके साथी इंसानों में से करते हैं। वे लोग जो आख़िरत (परलोक) पर ईमान नहीं रखते, उनके दिलों को इस ओर झुकाने के लिए कि वे उस झूठे और सजावटी कथन को सुनें और उसकी ओर आकर्षित हों, यह सब किया जाता है। अल्लाह तआला बता रहे हैं कि यह सब कुछ एक ख़ास मक़सद के लिए होता है — ताकि जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते, उनके दिल उस (झूठे कथन) की ओर झुक जाएँ, वे उसे पसंद कर लें, और फिर वे उन बुरे कामों को करें जो उन्होंने करने हैं — यानी गुनाह और नाफ़रमानियाँ। यह उनके लिए एक बड़ी चेतावनी है कि अल्लाह उनके सारे कर्म देख रहा है और उनका हिसाब लेगा। यह आयत उन लोगों के लिए एक कड़ी धमकी है जो सत्य को ठुकराकर झूठ और बुराई की ओर मुड़ते हैं।
फ़ायदे (लाभ):
- ईमान की नेमत की क़द्र: यह आयत हमें सिखाती है कि आख़िरत पर ईमान रखना कितनी बड़ी नेमत है। जो लोग इस पर ईमान रखते हैं, उनके दिल झूठ की ओर नहीं झुकते, बल्कि वे सत्य की ओर रुख करते हैं।
- सावधानी और बचाव: हमें चाहिए कि हम उन लोगों की बातों से सावधान रहें जो ईमान नहीं रखते, क्योंकि उनके दिलों में बुराई की तरफ़ झुकाव होता है और वे दूसरों को भी गुमराह करना चाहते हैं।
- अल्लाह की निगरानी का एहसास: यह आयत हमें याद दिलाती है कि अल्लाह हर चीज़ को देख रहा है — यहाँ तक कि दिलों के झुकाव और छिपे इरादों को भी। इसलिए हमें अपने दिलों को साफ़ रखना चाहिए और बुराई से बचना चाहिए।
- कर्मों का हिसाब: हर इंसान अपने कर्मों का ज़िम्मेदार है। जो लोग बुरे काम करते हैं, वे उनका फल अवश्य पाएँगे। यह हमें अच्छे कर्म करने की प्रेरणा देता है।
- क़ुरआन की हिदायत: यह आयत हमें बताती है कि क़ुरआन सच्चा मार्गदर्शक है — यह हमें बुराई की जड़ों से आगाह करता है ताकि हम उनसे बच सकें और सीधे रास्ते पर चल सकें।
📜 आयत 111-115 — सूरा अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 113
सूरा अल-अनआम आयत 113 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो उनको और उनकी इफ़तेरा परदाज़ियों को छोड़ दो और…सूरा आयत 113/165 — सूरा अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनआम सुनें, सूरा अल-अनआम अनुवाद, सूरा अल-अनआम mp3, सूरा अल-अनआम pdf. आयत 111–115. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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