Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- الْغَنِيُّ: जो किसी का मोहताज न हो, सब कुछ उसका हो, वह सबसे बेनियाज़ है।
- ذُو الرَّحْمَةِ: रहमत वाला, अत्यंत दयालु।
- يُذْهِبْكُمْ: वह तुम्हें मिटा दे, नष्ट कर दे।
- يَسْتَخْلِفْ: वह किसी और को तुम्हारा उत्तराधिकारी बना दे, तुम्हारी जगह दूसरों को ले आए।
- ذُرِّيَّةِ قَوْمٍ آخَرِينَ: दूसरी क़ौम की संतान, यानी पिछली उम्मतों की नस्ल।
तफ़सीर:
ऐ नबी! आपका रब — जो आपको और पूरी दुनिया को पैदा करने वाला है — वह बेनियाज़ है। उसे किसी की इबादत की ज़रूरत नहीं, न किसी के ईमान से कोई फ़ायदा है और न किसी के कुफ़्र से कोई नुक़सान। वह अपनी मख़लूक़ से बिल्कुल बेपरवाह है, लेकिन साथ ही वह बड़ा रहम वाला है। उसकी रहमत उसके बन्दों पर छाई हुई है — वह उन्हें मौका देता है, उनकी ग़लतियों पर पर्दा डालता है, और उन्हें तौबा का रास्ता दिखाता है।
अगर वह चाहे तो तुम सबको — जो उसकी नाफ़रमानी करते हो — मिटा दे, और तुम्हारी जगह दूसरी क़ौम को ले आए जो उसकी इबादत करे, उसके हुक्म माने और उसकी राह पर चले। यह उसके लिए बिल्कुल आसान है। जिस तरह उसने तुम्हें पैदा किया उन लोगों की नस्ल से जो तुमसे पहले गुज़र चुके थे — नूह, आद, समूद और दूसरी क़ौमों की संतान से — उसी तरह वह तुम्हारे बाद भी जिसे चाहे पैदा कर सकता है।
यह आयत उन लोगों के लिए एक सख़्त चेतावनी है जो हक़ को ठुकराते हैं और नबी की दावत का मज़ाक उड़ाते हैं। अल्लाह किसी का मोहताज नहीं। अगर तुम न मानो तो अल्लाह को कोई फ़र्क नहीं पड़ता — वह तुम्हें हटाकर दूसरी उम्मत ले आएगा जो उसकी बात मानेगी।
लेकिन साथ ही यह आयत अल्लाह की रहमत की ख़ुशख़बरी भी देती है। वह जल्दी अज़ाब नहीं करता, वह मौका देता है, वह तौबा क़बूल करता है। उसकी रहमत उसके ग़ज़ब से पहले है। इसलिए ऐ बन्दे! अपने रब की तरफ़ लौट आ — वह बेनियाज़ है फिर भी तुझ पर रहम करने वाला है। उसका दरवाज़ा खुला है, वह तेरी इबादत का मुहताज नहीं, बल्कि तू ही उसकी रहमत का मुहताज है।
याद रखो — यह दुनिया किसी के लिए हमेशा नहीं रही। तुमसे पहले कितनी क़ौमें थीं जो आज नामो-निशान तक नहीं रखतीं। अल्लाह ने उन्हें हटाकर तुम्हें लाया। अगर तुम भी हक़ से मुँह मोड़ोगे तो अल्लाह तुम्हें भी हटा देगा और तुम्हारी जगह ऐसे लोग ले आएगा जो उससे मुहब्बत करें और उसकी राह पर चलें। यह अल्लाह का वायदा है — और अल्लाह का वायदा कभी नहीं बदलता।
तो आओ, हम सब अपने रब की तरफ़ लौटें, उसकी इबादत को अपनी ज़िन्दगी का मक़सद बनाएँ, और उस रहमत के हक़दार बनें जो उसने अपने नेक बन्दों के लिए तैयार कर रखी है।
📜 आयत 131-135 — सूरा अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 133
सूरा अल-अनआम आयत 133 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो कुछ वह लोग करते हैं तुम्हारा परवरदिगार उससे…सूरा आयत 133/165 — सूरा अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनआम सुनें, सूरा अल-अनआम अनुवाद, सूरा अल-अनआम mp3, सूरा अल-अनआम pdf. आयत 131–135. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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