अल-अनआम · 133/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
وَرَبُّكَ الْغَنِيُّ ذُو الرَّحْمَةِ ۚ إِن يَشَأْ يُذْهِبْكُمْ وَيَسْتَخْلِفْ مِن بَعْدِكُم مَّا يَشَاءُ كَمَا أَنشَأَكُم مِّن ذُرِّيَّةِ قَوْمٍ آخَرِينَ ۝١٣٣
Wa Rabbukal ghaniyyu zur rahmah; iny yashaaa yuz hibkum wa yastakhlif mim ba`dikum wa yastakhlif mim ba`dikum maa yashaaa`u kamaaa ansha akum min zurriyyati qawmin aakhareen
📖 हिंदी अर्थ
और जो कुछ वह लोग करते हैं तुम्हारा परवरदिगार उससे बेख़बर नहीं और तुम्हारा परवरदिगार बे परवाह रहम वाला है - अगर चाहे तो तुम सबके सबको (दुनिया से उड़ा) ले लाए और तुम्हारे बाद जिसको चाहे तुम्हार जानशीन बनाए जिस तरह आख़िर तुम्हें दूसरे लोगों की औलाद से पैदा किया है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • الْغَنِيُّ: जो किसी का मोहताज न हो, सब कुछ उसका हो, वह सबसे बेनियाज़ है।
  • ذُو الرَّحْمَةِ: रहमत वाला, अत्यंत दयालु।
  • يُذْهِبْكُمْ: वह तुम्हें मिटा दे, नष्ट कर दे।
  • يَسْتَخْلِفْ: वह किसी और को तुम्हारा उत्तराधिकारी बना दे, तुम्हारी जगह दूसरों को ले आए।
  • ذُرِّيَّةِ قَوْمٍ آخَرِينَ: दूसरी क़ौम की संतान, यानी पिछली उम्मतों की नस्ल।

तफ़सीर:

ऐ नबी! आपका रब — जो आपको और पूरी दुनिया को पैदा करने वाला है — वह बेनियाज़ है। उसे किसी की इबादत की ज़रूरत नहीं, न किसी के ईमान से कोई फ़ायदा है और न किसी के कुफ़्र से कोई नुक़सान। वह अपनी मख़लूक़ से बिल्कुल बेपरवाह है, लेकिन साथ ही वह बड़ा रहम वाला है। उसकी रहमत उसके बन्दों पर छाई हुई है — वह उन्हें मौका देता है, उनकी ग़लतियों पर पर्दा डालता है, और उन्हें तौबा का रास्ता दिखाता है।

अगर वह चाहे तो तुम सबको — जो उसकी नाफ़रमानी करते हो — मिटा दे, और तुम्हारी जगह दूसरी क़ौम को ले आए जो उसकी इबादत करे, उसके हुक्म माने और उसकी राह पर चले। यह उसके लिए बिल्कुल आसान है। जिस तरह उसने तुम्हें पैदा किया उन लोगों की नस्ल से जो तुमसे पहले गुज़र चुके थे — नूह, आद, समूद और दूसरी क़ौमों की संतान से — उसी तरह वह तुम्हारे बाद भी जिसे चाहे पैदा कर सकता है।

यह आयत उन लोगों के लिए एक सख़्त चेतावनी है जो हक़ को ठुकराते हैं और नबी की दावत का मज़ाक उड़ाते हैं। अल्लाह किसी का मोहताज नहीं। अगर तुम न मानो तो अल्लाह को कोई फ़र्क नहीं पड़ता — वह तुम्हें हटाकर दूसरी उम्मत ले आएगा जो उसकी बात मानेगी।

लेकिन साथ ही यह आयत अल्लाह की रहमत की ख़ुशख़बरी भी देती है। वह जल्दी अज़ाब नहीं करता, वह मौका देता है, वह तौबा क़बूल करता है। उसकी रहमत उसके ग़ज़ब से पहले है। इसलिए ऐ बन्दे! अपने रब की तरफ़ लौट आ — वह बेनियाज़ है फिर भी तुझ पर रहम करने वाला है। उसका दरवाज़ा खुला है, वह तेरी इबादत का मुहताज नहीं, बल्कि तू ही उसकी रहमत का मुहताज है।

याद रखो — यह दुनिया किसी के लिए हमेशा नहीं रही। तुमसे पहले कितनी क़ौमें थीं जो आज नामो-निशान तक नहीं रखतीं। अल्लाह ने उन्हें हटाकर तुम्हें लाया। अगर तुम भी हक़ से मुँह मोड़ोगे तो अल्लाह तुम्हें भी हटा देगा और तुम्हारी जगह ऐसे लोग ले आएगा जो उससे मुहब्बत करें और उसकी राह पर चलें। यह अल्लाह का वायदा है — और अल्लाह का वायदा कभी नहीं बदलता।

तो आओ, हम सब अपने रब की तरफ़ लौटें, उसकी इबादत को अपनी ज़िन्दगी का मक़सद बनाएँ, और उस रहमत के हक़दार बनें जो उसने अपने नेक बन्दों के लिए तैयार कर रखी है।



📜 आयत 131-135 — अल-अनआम

131ذَٰلِكَ أَن لَّمْ يَكُن رَّبُّكَ مُهْلِكَ الْقُرَىٰ بِظُلْمٍ وَأَهْلُهَا غَافِلُونَ
बेशक ये सब के सब काफिर थे और ये (पैग़म्बरों का भेजना सिर्फ) उस वजह से है कि तुम्हारा परवरदिगार कभी बस्तियों को ज़ुल्म ज़बरदस्ती से वहाँ के बाशिन्दों के ग़फलत की हालत में हलाक नहीं किया करता
132وَلِكُلٍّ دَرَجَاتٌ مِّمَّا عَمِلُوا ۚ وَمَا رَبُّكَ بِغَافِلٍ عَمَّا يَعْمَلُونَ
और जिसने जैसा (भला या बुरा) किया है उसी के मुवाफ़िक हर एक के दरजात हैं
133وَرَبُّكَ الْغَنِيُّ ذُو الرَّحْمَةِ ۚ إِن يَشَأْ يُذْهِبْكُمْ وَيَسْتَخْلِفْ مِن بَعْدِكُم مَّا يَشَاءُ كَمَا أَنشَأَكُم مِّن ذُرِّيَّةِ قَوْمٍ آخَرِينَ
और जो कुछ वह लोग करते हैं तुम्हारा परवरदिगार उससे बेख़बर नहीं और तुम्हारा परवरदिगार बे परवाह रहम वाला है - अगर चाहे तो तुम सबके सबको (दुनिया से उड़ा) ले लाए और तुम्हारे बाद जिसको चाहे तुम्हार जानशीन बनाए जिस तरह आख़िर तुम्हें दूसरे लोगों की औलाद से पैदा किया है
134إِنَّ مَا تُوعَدُونَ لَآتٍ ۖ وَمَا أَنتُم بِمُعْجِزِينَ
बेशक जिस चीज़ का तुमसे वायदा किया जाता है वह ज़रूर (एक न एक दिन) आने वाली है
135قُلْ يَا قَوْمِ اعْمَلُوا عَلَىٰ مَكَانَتِكُمْ إِنِّي عَامِلٌ ۖ فَسَوْفَ تَعْلَمُونَ مَن تَكُونُ لَهُ عَاقِبَةُ الدَّارِ ۗ إِنَّهُ لَا يُفْلِحُ الظَّالِمُونَ
और तुम उसके लाने में (ख़ुदा को) आजिज़ नहीं कर सकते (ऐ रसूल तुम उनसे) कहो कि ऐ मेरी क़ौम तुम बजाए ख़ुद जो चाहो करो मैं (बजाए ख़ुद) अमल कर रहा हूँ फिर अनक़रीब तुम्हें मालूम हो जाएगा कि आख़ेरत (बेहश्त) किसके लिए है (तुम्हारे लिए या हमारे लिए) ज़ालिम लोग तो हरगिज़ कामयाब न होंगे
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अनुवाद — अल-अनआम 133

सूरा अल-अनआम आयत 133 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो कुछ वह लोग करते हैं तुम्हारा परवरदिगार उससे…

सूरा आयत 133/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 131–135. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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