अल-अनआम · 132/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
وَلِكُلٍّ دَرَجَاتٌ مِّمَّا عَمِلُوا ۚ وَمَا رَبُّكَ بِغَافِلٍ عَمَّا يَعْمَلُونَ ۝١٣٢
Wa likullin darajaatum mimmaa `amiloo; wa maa Rabbuka bighaafilin `ammaa ya`maloon
📖 हिंदी अर्थ
और जिसने जैसा (भला या बुरा) किया है उसी के मुवाफ़िक हर एक के दरजात हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • दरजात: स्तर, ऊँचाइयाँ, कोटियाँ
  • मिम्मा अमिलू: उनके कर्मों के अनुसार
  • बिग़ाफ़िल: बेख़बर, अनजान

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में बताते हैं कि हर इंसान के लिए उसके कर्मों के अनुसार अलग-अलग दर्जे और स्तर हैं। जो लोग नेकी और अच्छे काम करते हैं, उनके लिए जन्नत में ऊँचे दर्जे हैं, और जो लोग गुनाह और बुराई में लिप्त रहते हैं, उनके लिए जहन्नम में निचले दर्जे हैं। यह दर्जे उनके कर्मों के अनुपात में होंगे — जिसने जितनी अच्छाई की होगी, उसे उतना ही ऊँचा मुक़ाम मिलेगा, और जिसने जितनी बुराई की होगी, उसे उतनी ही सज़ा मिलेगी।

इस आयत में अल्लाह तआला यह भी स्पष्ट कर रहे हैं कि कोई भी कर्म छोटा या बड़ा, अच्छा या बुरा — सब कुछ अल्लाह की नज़र में है। अल्लाह अपने बंदों के कर्मों से बेख़बर नहीं है, बल्कि वह हर चीज़ को देखता और जानता है। जो लोग यह समझते हैं कि उनके कर्म छिपे रहेंगे या उनका कोई हिसाब नहीं होगा, वे भ्रम में हैं। अल्लाह तआला हर अच्छे और बुरे कर्म का हिसाब रखता है और उसका पूरा बदला देगा।

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि हमें अपने कर्मों पर ध्यान देना चाहिए। कोई भी कर्म छोटा नहीं समझना चाहिए — एक अच्छा शब्द, एक अच्छा काम, एक छोटी सी मदद — सब कुछ अल्लाह के यहाँ दर्ज है। इसी तरह, बुरे कर्मों से बचना चाहिए, चाहे वे कितने ही छोटे क्यों न लगें। अल्लाह तआला न्यायपूर्ण है और वह किसी के साथ ज़ुल्म नहीं करेगा। यह हमारे लिए एक बड़ी खुशख़बरी है कि हमारा रब हमारी छोटी-से-छोटी नेकी को भी देखता है और उसका अज्र देगा। साथ ही, यह एक चेतावनी भी है कि हमारे बुरे कर्म भी उससे छिपे नहीं हैं।

अल्लाह तआला अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है — वह चाहता है कि हम अच्छे कर्म करें और उसकी रहमत के हक़दार बनें। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के अनुसार ढालें, नेकी को अपनाएँ और बुराई से दूर रहें, क्योंकि अल्लाह हर चीज़ का हिसाब लेने वाला है और उसका इन्साफ़ बिल्कुल सटीक है।



📜 आयत 130-134 — अल-अनआम

130يَا مَعْشَرَ الْجِنِّ وَالْإِنسِ أَلَمْ يَأْتِكُمْ رُسُلٌ مِّنكُمْ يَقُصُّونَ عَلَيْكُمْ آيَاتِي وَيُنذِرُونَكُمْ لِقَاءَ يَوْمِكُمْ هَٰذَا ۚ قَالُوا شَهِدْنَا عَلَىٰ أَنفُسِنَا ۖ وَغَرَّتْهُمُ الْحَيَاةُ الدُّنْيَا وَشَهِدُوا عَلَىٰ أَنفُسِهِمْ أَنَّهُمْ كَانُوا كَافِرِينَ
(फिर हम पूछेंगे कि क्यों) ऐ गिरोह जिन व इन्स क्या तुम्हारे पास तुम ही में के पैग़म्बर नहीं आए जो तुम तुमसे हमारी आयतें बयान करें और तुम्हें तुम्हारे उस रोज़ (क़यामत) के पेश आने से डराएँ वह सब अर्ज करेंगे (बेशक आए थे) हम ख़ुद अपने ऊपर आप अपने (ख़िलाफ) गवाही देते हैं (वाकई) उनको दुनिया की (चन्द रोज़) ज़िन्दगी ने उन्हें अंधेरे में डाल रखा और उन लोगों ने अपने ख़िलाफ आप गवाही दीं
131ذَٰلِكَ أَن لَّمْ يَكُن رَّبُّكَ مُهْلِكَ الْقُرَىٰ بِظُلْمٍ وَأَهْلُهَا غَافِلُونَ
बेशक ये सब के सब काफिर थे और ये (पैग़म्बरों का भेजना सिर्फ) उस वजह से है कि तुम्हारा परवरदिगार कभी बस्तियों को ज़ुल्म ज़बरदस्ती से वहाँ के बाशिन्दों के ग़फलत की हालत में हलाक नहीं किया करता
132وَلِكُلٍّ دَرَجَاتٌ مِّمَّا عَمِلُوا ۚ وَمَا رَبُّكَ بِغَافِلٍ عَمَّا يَعْمَلُونَ
और जिसने जैसा (भला या बुरा) किया है उसी के मुवाफ़िक हर एक के दरजात हैं
133وَرَبُّكَ الْغَنِيُّ ذُو الرَّحْمَةِ ۚ إِن يَشَأْ يُذْهِبْكُمْ وَيَسْتَخْلِفْ مِن بَعْدِكُم مَّا يَشَاءُ كَمَا أَنشَأَكُم مِّن ذُرِّيَّةِ قَوْمٍ آخَرِينَ
और जो कुछ वह लोग करते हैं तुम्हारा परवरदिगार उससे बेख़बर नहीं और तुम्हारा परवरदिगार बे परवाह रहम वाला है - अगर चाहे तो तुम सबके सबको (दुनिया से उड़ा) ले लाए और तुम्हारे बाद जिसको चाहे तुम्हार जानशीन बनाए जिस तरह आख़िर तुम्हें दूसरे लोगों की औलाद से पैदा किया है
134إِنَّ مَا تُوعَدُونَ لَآتٍ ۖ وَمَا أَنتُم بِمُعْجِزِينَ
बेशक जिस चीज़ का तुमसे वायदा किया जाता है वह ज़रूर (एक न एक दिन) आने वाली है
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
मक्कीRevelation
132आयत

अनुवाद — अल-अनआम 132

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Tuesday, August 18, 2026

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