अल-अनआम · 134/165
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनआम
إِنَّ مَا تُوعَدُونَ لَآتٍ ۖ وَمَا أَنتُم بِمُعْجِزِينَ ۝١٣٤
Inna maa too`adoona la aatinw wa maaa antum bimu`jizeen
📖 हिंदी अर्थ
बेशक जिस चीज़ का तुमसे वायदा किया जाता है वह ज़रूर (एक न एक दिन) आने वाली है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • تُوعَدُونَ: जिस चीज़ का तुमसे वादा किया जा रहा है (अर्थात् पुनरुत्थान, हिसाब और दंड)।
  • لَآتٍ: अवश्य आने वाला, निश्चित रूप से घटित होने वाला।
  • بِمُعْجِزِينَ: असमर्थ बनाने वाले, भागकर बच निकलने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ मुशरिको! जिस चीज़ का तुमसे वादा किया जा रहा है—अर्थात् क़ियामत का आना, मौत के बाद दोबारा उठाया जाना, हिसाब-किताब और तुम्हारे कुफ़्र की सज़ा—वह निश्चित रूप से आकर रहेगी। इसमें कोई संदेह नहीं कि वह घटित होकर रहेगी। अल्लाह तआला ने यह वादा अपने पैग़म्बरों के माध्यम से किया है, और अल्लाह का वादा कभी झूठा नहीं होता।

तुम यह न समझो कि तुम भागकर या छिपकर अल्लाह की पकड़ से बच सकोगे। तुम अल्लाह को असमर्थ नहीं बना सकते, चाहे तुम कहीं भी चले जाओ, चाहे तुम मिट्टी और हड्डियाँ बन जाओ, अल्लाह तुम्हें दोबारा जीवित करके ही रहेगा। वह तुम्हारी लगाम (नसीयत) को अपने क़ब्ज़े में लिए हुए है, और उसकी पकड़ से कोई बच नहीं सकता। यह चेतावनी उन लोगों के लिए है जो आख़िरत को झुठलाते हैं और अपने कुफ़्र पर अड़े हुए हैं।

फ़ायदे (सीख):

  1. यह आयत हमें यक़ीन दिलाती है कि अल्लाह का वादा सच्चा है, और उसका फ़ैसला अवश्य आएगा। इससे मोमिन का दिल मज़बूत होता है कि चाहे दुनिया में कितनी भी मुश्किलें हों, अल्लाह की मदद और उसका इंसाफ़ ज़रूर आएगा।
  2. यह आयत इंसान को ग़फ़लत से जगाती है—कोई भी अपने कर्मों से बच नहीं सकता, हर काम का हिसाब होगा। यह सोच इंसान को नेकी की तरफ़ राग़िब करती है और गुनाह से रोकती है।
  3. अल्लाह की क़ुदरत की याद दिलाती है कि वह हर चीज़ पर क़ादिर है, मौत के बाद दोबारा ज़िंदगी देना उसके लिए बिल्कुल आसान है। यह ईमान की मज़बूती का ज़रिया है।
  4. इस आयत में उन लोगों के लिए तसल्ली है जो ज़ुल्म का शिकार हैं—ज़ालिम चाहे कितना भी ताक़तवर हो, अल्लाह की पकड़ से बच नहीं सकता, और मज़लूम का हक़ ज़रूर मिलेगा।


📜 आयत 132-136 — सूरा अल-अनआम

132وَلِكُلٍّ دَرَجَاتٌ مِّمَّا عَمِلُوا ۚ وَمَا رَبُّكَ بِغَافِلٍ عَمَّا يَعْمَلُونَ
और जिसने जैसा (भला या बुरा) किया है उसी के मुवाफ़िक हर एक के दरजात हैं
133وَرَبُّكَ الْغَنِيُّ ذُو الرَّحْمَةِ ۚ إِن يَشَأْ يُذْهِبْكُمْ وَيَسْتَخْلِفْ مِن بَعْدِكُم مَّا يَشَاءُ كَمَا أَنشَأَكُم مِّن ذُرِّيَّةِ قَوْمٍ آخَرِينَ
और जो कुछ वह लोग करते हैं तुम्हारा परवरदिगार उससे बेख़बर नहीं और तुम्हारा परवरदिगार बे परवाह रहम वाला है - अगर चाहे तो तुम सबके सबको (दुनिया से उड़ा) ले लाए और तुम्हारे बाद जिसको चाहे तुम्हार जानशीन बनाए जिस तरह आख़िर तुम्हें दूसरे लोगों की औलाद से पैदा किया है
134إِنَّ مَا تُوعَدُونَ لَآتٍ ۖ وَمَا أَنتُم بِمُعْجِزِينَ
बेशक जिस चीज़ का तुमसे वायदा किया जाता है वह ज़रूर (एक न एक दिन) आने वाली है
135قُلْ يَا قَوْمِ اعْمَلُوا عَلَىٰ مَكَانَتِكُمْ إِنِّي عَامِلٌ ۖ فَسَوْفَ تَعْلَمُونَ مَن تَكُونُ لَهُ عَاقِبَةُ الدَّارِ ۗ إِنَّهُ لَا يُفْلِحُ الظَّالِمُونَ
और तुम उसके लाने में (ख़ुदा को) आजिज़ नहीं कर सकते (ऐ रसूल तुम उनसे) कहो कि ऐ मेरी क़ौम तुम बजाए ख़ुद जो चाहो करो मैं (बजाए ख़ुद) अमल कर रहा हूँ फिर अनक़रीब तुम्हें मालूम हो जाएगा कि आख़ेरत (बेहश्त) किसके लिए है (तुम्हारे लिए या हमारे लिए) ज़ालिम लोग तो हरगिज़ कामयाब न होंगे
136وَجَعَلُوا لِلَّهِ مِمَّا ذَرَأَ مِنَ الْحَرْثِ وَالْأَنْعَامِ نَصِيبًا فَقَالُوا هَٰذَا لِلَّهِ بِزَعْمِهِمْ وَهَٰذَا لِشُرَكَائِنَا ۖ فَمَا كَانَ لِشُرَكَائِهِمْ فَلَا يَصِلُ إِلَى اللَّهِ ۖ وَمَا كَانَ لِلَّهِ فَهُوَ يَصِلُ إِلَىٰ شُرَكَائِهِمْ ۗ سَاءَ مَا يَحْكُمُونَ
और ये लोग ख़ुदा की पैदा की हुई खेती और चौपायों में से हिस्सा क़रार देते हैं और अपने ख्याल के मुवाफिक कहते हैं कि ये तो ख़ुदा का (हिस्सा) है और ये हमारे शरीकों का (यानि जिनको हमने ख़ुदा का शरीक बनाया) फिर जो ख़ास उनके शरीकों का है वह तो ख़ुदा तक नहीं पहुँचने का और जो हिस्सा ख़ुदा का है वो उसके शरीकों तक पहुँच जाएगा ये क्या ही बुरा हुक्म लगाते हैं और उसी तरह बहुतेरे मुशरकीन को उनके शरीकों ने अपने बच्चों को मार डालने को अच्छा कर दिखाया है
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
मक्कीअवतरण स्थान
134आयत

अनुवाद — अल-अनआम 134

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Friday, October 2, 2026

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