अल-अनआम · 155/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
وَهَٰذَا كِتَابٌ أَنزَلْنَاهُ مُبَارَكٌ فَاتَّبِعُوهُ وَاتَّقُوا لَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ ۝١٥٥
Wa haazaa Kitaabun anzalnaahu Mubaarakun fattabi`oohu wattaqoo la`al lakum urhamoon
📖 हिंदी अर्थ
और ये किताब (क़ुरान) जिसको हमने (अब नाज़िल किया है क्या है-बरक़त वाली किताब) है तो तुम लोग उसी की पैरवी करो (और ख़ुदा से) डरते रहो ताकि तुम पर रहम किया जाए

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مُبَارَكٌ (मुबारक): अत्यंत बरकत वाला, जिसमें भलाई और लाभ की प्रचुरता हो।
  • فَاتَّبِعُوهُ (फ़त्तबि'ऊहु): उसका अनुसरण करो, उस पर अमल करो।
  • وَاتَّقُوا (वत्तक़ू): अल्लाह से डरो और उसकी अवज्ञा से बचो।
  • لَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ (ल'अल्लकुम तुरहमून): ताकि तुम पर रहम किया जाए।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह कुरआन वह महान किताब है जिसे अल्लाह ने अपने पैग़ंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर उतारा है। यह किताब अत्यंत बरकत वाली है, क्योंकि इसमें दुनिया और आख़िरत की हर भलाई और हर उपकार का खज़ाना मौजूद है। यह मार्गदर्शन का स्रोत है, अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाली है, और जीवन के हर पहलू के लिए सर्वोत्तम निर्देश प्रदान करती है। इसलिए अल्लाह आदेश देता है कि इस किताब का पूर्ण अनुसरण करो, इसके आदेशों का पालन करो और इसके निषेधों से बचो। साथ ही, अल्लाह का डर रखो और उसकी नाफ़रमानी से बचते रहो, ताकि तुम पर उसकी रहमत नाज़िल हो और तुम उसके अज़ाब से सुरक्षित रहो और उसके इनाम के हक़दार बनो। यह रहमत उसी का परिणाम है जो इस किताब को अपनाएगा और उस पर अमल करेगा।

फ़ायदे (लाभ):

  1. कुरआन वास्तव में बरकत वाली किताब है, और इसकी बरकत का अनुभव वही कर सकता है जो इसे पढ़े, समझे और उस पर अमल करे। यह जीवन को सफलता और शांति से भर देती है।
  2. कुरआन का अनुसरण ही सच्ची भलाई का रास्ता है; इसमें इंसान की दुनियावी और दीनवी हर ज़रूरत का हल मौजूद है।
  3. अल्लाह की रहमत पाने का सबसे बड़ा ज़रिया यह है कि हम उसकी किताब को अपनाएँ और उसके आदेशों के सामने सर झुकाएँ। जो इस किताब से जुड़ा, वह अल्लाह की रहमत से जुड़ा।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि सच्ची सफलता और सुख-शांति कुरआन की तालीमात पर चलने में है, न कि उससे दूर जाने में। कुरआन हर ज़माने और हर मकान के लिए हिदायत है।


📜 आयत 153-157 — अल-अनआम

153وَأَنَّ هَٰذَا صِرَاطِي مُسْتَقِيمًا فَاتَّبِعُوهُ ۖ وَلَا تَتَّبِعُوا السُّبُلَ فَتَفَرَّقَ بِكُمْ عَن سَبِيلِهِ ۚ ذَٰلِكُمْ وَصَّاكُم بِهِ لَعَلَّكُمْ تَتَّقُونَ
तो उसी पर चले जाओ और दूसरे रास्ते पर न चलो कि वह तुमको ख़ुदा के रास्ते से (भटकाकर) तितिर बितिर कर देगें यह वह बातें हैं जिनका ख़ुदा ने तुमको हक्म दिया है ताकि तुम परहेज़गार बनो
154ثُمَّ آتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ تَمَامًا عَلَى الَّذِي أَحْسَنَ وَتَفْصِيلًا لِّكُلِّ شَيْءٍ وَهُدًى وَرَحْمَةً لَّعَلَّهُم بِلِقَاءِ رَبِّهِمْ يُؤْمِنُونَ
फिर हमनें जो नेक़ी करें उस पर अपनी नेअमत पूरी करने के वास्ते मूसा को क़िताब (तौरौत) अता फरमाई और उसमें हर चीज़ की तफ़सील (बयान कर दी ) थी और (लोगों के लिए अज़सरतापा(सर से पैर तक)) हिदायत व रहमत है ताकि वह लोग अपनें परवरदिगार के सामने हाज़िर होने का यक़ीन करें
155وَهَٰذَا كِتَابٌ أَنزَلْنَاهُ مُبَارَكٌ فَاتَّبِعُوهُ وَاتَّقُوا لَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ
और ये किताब (क़ुरान) जिसको हमने (अब नाज़िल किया है क्या है-बरक़त वाली किताब) है तो तुम लोग उसी की पैरवी करो (और ख़ुदा से) डरते रहो ताकि तुम पर रहम किया जाए
156أَن تَقُولُوا إِنَّمَا أُنزِلَ الْكِتَابُ عَلَىٰ طَائِفَتَيْنِ مِن قَبْلِنَا وَإِن كُنَّا عَن دِرَاسَتِهِمْ لَغَافِلِينَ
(और ऐ मुशरेकीन ये किताब हमने इसलिए नाज़िल की कि तुम कहीं) यह कह बैठो कि हमसे पहले किताब ख़ुदा तो बस सिर्फ दो ही गिरोहों (यहूद व नसारा) पर नाज़िल हुई थी अगरचे हम तो उनके पढ़ने (पढ़ाने) से बेखबर थे
157أَوْ تَقُولُوا لَوْ أَنَّا أُنزِلَ عَلَيْنَا الْكِتَابُ لَكُنَّا أَهْدَىٰ مِنْهُمْ ۚ فَقَدْ جَاءَكُم بَيِّنَةٌ مِّن رَّبِّكُمْ وَهُدًى وَرَحْمَةٌ ۚ فَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّن كَذَّبَ بِآيَاتِ اللَّهِ وَصَدَفَ عَنْهَا ۗ سَنَجْزِي الَّذِينَ يَصْدِفُونَ عَنْ آيَاتِنَا سُوءَ الْعَذَابِ بِمَا كَانُوا يَصْدِفُونَ
या ये कहने लगो कि अगर हम पर किताबे (ख़ुदा नाज़िल होती तो हम उन लोगों से कहीं बढ़कर राहे रास्त पर होते तो (देखो) अब तो यक़ीनन तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम्हारे पास एक रौशन दलील है (किताबे ख़ुदा) और हिदायत और रहमत आ चुकी तो जो शख्स ख़ुदा के आयात को झुठलाए और उससे मुँह फेरे उनसे बढ़ कर ज़ालिम कौन है जो लोग हमारी आयतों से मुँह फेरते हैं हम उनके मुँह फेरने के बदले में अनक़रीब ही बुरे अज़ाब की सज़ा देगें (ऐ रसूल) क्या ये लोग सिर्फ उसके मुन्तिज़र है कि उनके पास फरिश्ते आएं
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अनुवाद — अल-अनआम 155

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Tuesday, August 18, 2026

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