अल-अनआम · 154/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
ثُمَّ آتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ تَمَامًا عَلَى الَّذِي أَحْسَنَ وَتَفْصِيلًا لِّكُلِّ شَيْءٍ وَهُدًى وَرَحْمَةً لَّعَلَّهُم بِلِقَاءِ رَبِّهِمْ يُؤْمِنُونَ ۝١٥٤
Summa aatainaa Moosal Kitaaba tammaaman `alal lazeee ahsana wa tafseelal likulli shai`inw wa hudanw wa rahmatal la`allahum biliqaaa`i Rabbihim yu`minoon
📖 हिंदी अर्थ
फिर हमनें जो नेक़ी करें उस पर अपनी नेअमत पूरी करने के वास्ते मूसा को क़िताब (तौरौत) अता फरमाई और उसमें हर चीज़ की तफ़सील (बयान कर दी ) थी और (लोगों के लिए अज़सरतापा(सर से पैर तक)) हिदायत व रहमत है ताकि वह लोग अपनें परवरदिगार के सामने हाज़िर होने का यक़ीन करें

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَمَامًا: पूर्णता, नेमत को पूरा करने के लिए।
  • عَلَى الَّذِي أَحْسَنَ: उस व्यक्ति पर जिसने अच्छा कर्म किया (अर्थात मूसा अलैहिस्सलाम पर, उनके अच्छे आचरण के कारण)।
  • تَفْصِيلًا: हर चीज़ का स्पष्ट विवरण और ब्यौरा।
  • هُدًى: मार्गदर्शन, सत्य की ओर राह दिखाना।
  • رَحْمَةً: दया, कृपा।
  • لِقَاءِ رَبِّهِمْ: अपने रब से मिलने का (यानी क़ियामत के दिन उठाए जाने और उसके सामने हाज़िर होने का)।

तफ़सीर:

फिर अल्लाह तआला ने मूसा अलैहिस्सलाम को तौरात दी, और यह देना उस व्यक्ति पर नेमत की पूर्णता थी जिसने अच्छा कर्म किया—यानी मूसा अलैहिस्सलाम ने अल्लाह की इबादत और उसकी आज्ञाओं का पालन करने में भलाई की, तो अल्लाह ने उन्हें यह किताब देकर अपनी नेमत पूरी कर दी। यह किताब हर उस चीज़ का स्पष्ट विवरण देने वाली थी जिसकी लोगों को दीन (धर्म) के मामलों में ज़रूरत थी—जैसे हलाल, हराम, आदेश, निषेध, और जीवन के सही तरीके। वह मार्गदर्शन थी जो सत्य की ओर राह दिखाती थी, और रहमत थी जो उस पर अमल करने वालों के लिए दया का ज़रिया बनी। यह सब इसलिए था ताकि वे लोग अपने रब से मिलने पर (यानी क़ियामत के दिन पुनर्जीवित होने, हिसाब और जज़ा पर) ईमान लाएँ, और उस दिन के लिए अच्छे कर्मों से तैयारी करें।

फ़ायदे और सबक़:

  1. अल्लाह तआला अपने नेक बंदों पर अपनी नेमतें पूरी करता है—जो व्यक्ति अच्छा कर्म करता है, अल्लाह उसे और अधिक मार्गदर्शन और किताब की समझ देता है।
  2. अल्लाह की भेजी हुई किताबें हर उस चीज़ का विवरण देती हैं जो इंसान को अपने दीन और दुनिया में चाहिए; इसलिए हमें कुरआन को अपनी ज़िंदगी का मार्गदर्शक बनाना चाहिए।
  3. किताबों का उद्देश्य सिर्फ़ जानकारी नहीं, बल्कि हिदायत (मार्गदर्शन) और रहमत है—यानी उन पर अमल करना ही सच्ची कामयाबी है।
  4. आख़िरत (अंतिम दिन) पर ईमान लाना हर नबी की शिक्षा का मूल है; यह ईमान इंसान को अच्छे कर्मों की ओर प्रेरित करता है और उसे दुनिया की बुराइयों से बचाता है।
  5. यह आयत बताती है कि अल्लाह ने हर ज़माने में अपने रसूलों को किताबें देकर लोगों को सीधा रास्ता दिखाया, और इसी तरह हमारे पास कुरआन है—जो सबसे आख़िरी और पूरी किताब है, इसलिए हमें इस पर सबसे ज़्यादा अमल करना चाहिए।


📜 आयत 152-156 — अल-अनआम

152وَلَا تَقْرَبُوا مَالَ الْيَتِيمِ إِلَّا بِالَّتِي هِيَ أَحْسَنُ حَتَّىٰ يَبْلُغَ أَشُدَّهُ ۖ وَأَوْفُوا الْكَيْلَ وَالْمِيزَانَ بِالْقِسْطِ ۖ لَا نُكَلِّفُ نَفْسًا إِلَّا وُسْعَهَا ۖ وَإِذَا قُلْتُمْ فَاعْدِلُوا وَلَوْ كَانَ ذَا قُرْبَىٰ ۖ وَبِعَهْدِ اللَّهِ أَوْفُوا ۚ ذَٰلِكُمْ وَصَّاكُم بِهِ لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ
लेकिन इस तरीके पर कि (उसके हक़ में) बेहतर हो यहाँ तक कि वह अपनी जवानी की हद को पहुंच जाए और इन्साफ के साथ नाप और तौल पूरी किया करो हम किसी शख्स को उसकी ताक़त से बढ़कर तकलीफ नहीं देते और (चाहे कुछ हो मगर) जब बात कहो तो इन्साफ़ से अगरचे वह (जिसके तुम ख़िलाफ न हो) तुम्हारा अज़ीज़ ही (क्यों न) हो और ख़ुदा के एहद व पैग़ाम को पूरा करो यह वह बातें हैं जिनका ख़ुदा ने तुम्हे हुक्म दिया है कि तुम इबरत हासिल करो और ये भी (समझ लो) कि यही मेरा सीधा रास्ता है
153وَأَنَّ هَٰذَا صِرَاطِي مُسْتَقِيمًا فَاتَّبِعُوهُ ۖ وَلَا تَتَّبِعُوا السُّبُلَ فَتَفَرَّقَ بِكُمْ عَن سَبِيلِهِ ۚ ذَٰلِكُمْ وَصَّاكُم بِهِ لَعَلَّكُمْ تَتَّقُونَ
तो उसी पर चले जाओ और दूसरे रास्ते पर न चलो कि वह तुमको ख़ुदा के रास्ते से (भटकाकर) तितिर बितिर कर देगें यह वह बातें हैं जिनका ख़ुदा ने तुमको हक्म दिया है ताकि तुम परहेज़गार बनो
154ثُمَّ آتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ تَمَامًا عَلَى الَّذِي أَحْسَنَ وَتَفْصِيلًا لِّكُلِّ شَيْءٍ وَهُدًى وَرَحْمَةً لَّعَلَّهُم بِلِقَاءِ رَبِّهِمْ يُؤْمِنُونَ
फिर हमनें जो नेक़ी करें उस पर अपनी नेअमत पूरी करने के वास्ते मूसा को क़िताब (तौरौत) अता फरमाई और उसमें हर चीज़ की तफ़सील (बयान कर दी ) थी और (लोगों के लिए अज़सरतापा(सर से पैर तक)) हिदायत व रहमत है ताकि वह लोग अपनें परवरदिगार के सामने हाज़िर होने का यक़ीन करें
155وَهَٰذَا كِتَابٌ أَنزَلْنَاهُ مُبَارَكٌ فَاتَّبِعُوهُ وَاتَّقُوا لَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ
और ये किताब (क़ुरान) जिसको हमने (अब नाज़िल किया है क्या है-बरक़त वाली किताब) है तो तुम लोग उसी की पैरवी करो (और ख़ुदा से) डरते रहो ताकि तुम पर रहम किया जाए
156أَن تَقُولُوا إِنَّمَا أُنزِلَ الْكِتَابُ عَلَىٰ طَائِفَتَيْنِ مِن قَبْلِنَا وَإِن كُنَّا عَن دِرَاسَتِهِمْ لَغَافِلِينَ
(और ऐ मुशरेकीन ये किताब हमने इसलिए नाज़िल की कि तुम कहीं) यह कह बैठो कि हमसे पहले किताब ख़ुदा तो बस सिर्फ दो ही गिरोहों (यहूद व नसारा) पर नाज़िल हुई थी अगरचे हम तो उनके पढ़ने (पढ़ाने) से बेखबर थे
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अनुवाद — अल-अनआम 154

सूरा अल-अनआम आयत 154 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर हमनें जो नेक़ी करें उस पर अपनी नेअमत पूरी…

सूरा आयत 154/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 152–156. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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