अल-अनआम · 36/165
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनआम
۞ إِنَّمَا يَسْتَجِيبُ الَّذِينَ يَسْمَعُونَ ۘ وَالْمَوْتَىٰ يَبْعَثُهُمُ اللَّهُ ثُمَّ إِلَيْهِ يُرْجَعُونَ ۝٣٦
Innamaa yastajeebul lazeena yasma`oon; walmawtaa yab`asuhumul laahu summa ilaihi yurja`oon
📖 हिंदी अर्थ
(तुम्हारा कहना तो) सिर्फ वही लोग मानते हैं जो (दिल से) सुनते हैं और मुर्दो को तो ख़ुदा क़यामत ही में उठाएगा फिर उसी की तरफ लौटाए जाएंगें

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَسْتَجِيبُ: स्वीकार करना, उत्तर देना, मान लेना।
  • يَسْمَعُونَ: सुनना (स्वीकृति और समझ के साथ)।
  • وَالْمَوْتَى: मुर्दे, यहाँ अर्थ है वे लोग जिनके दिल बाात समझने और कबूल करने से मर चुके हैं।
  • يَبْعَثُهُمُ: उन्हें उठाएगा, जीवित करेगा।
  • يُرْجَعُونَ: लौटाए जाएँगे।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आपकी पुकार और आपके द्वारा लाई गई हिदायत को सिर्फ वही लोग कबूल करते हैं जो सुनने की सच्ची क्षमता रखते हैं—यानी जो दिल से सुनते हैं, समझते हैं और उसे मान लेते हैं। यह सुनना सिर्फ कानों का नहीं, बल्कि दिल की आँखों से देखना और समझना है। ऐसे लोग ही हिदायत की रोशनी से अपने जीवन को रोशन करते हैं।

जहाँ तक काफिरों का सवाल है, वे मुर्दों की तरह हैं, क्योंकि उनके दिल बात समझने और कबूल करने से मर चुके हैं। उनके कान हैं, लेकिन वे सच्चाई को सुनकर उस पर अमल नहीं करते। उनकी यह हालत देखकर आपको अफसोस नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह आपकी दावत की कमी नहीं, बल्कि उनके दिलों की मौत है।

लेकिन याद रखिए! ये मुर्दे (काफिर) भी हमेशा मुर्दा नहीं रहेंगे। अल्लाह ही है जो सभी मुर्दों को क़यामत के दिन कब्रों से उठाएगा, और फिर सबको उसी की तरफ लौटना है। उस दिन हर कोई अपने किए का हिसाब देगा, और अल्लाह हर एक को उसके अमल का पूरा बदला देगा।

दावत और नसीहत:

यह आयत हमें सिखाती है कि हिदायत पाने के लिए सबसे पहले सुनने की नीयत और समझने की तैयारी चाहिए। जो लोग दिल से सच्चाई को सुनने और कबूल करने के लिए तैयार होते हैं, अल्लाह उन्हें राह दिखाता है। और जो लोग घमंड या अंधेरे में डूबे रहते हैं, वे मुर्दों की तरह हैं, लेकिन अल्लाह की रहमत से कोई भी दिल ज़िंदा हो सकता है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने दिलों को ज़िंदा रखें, कुरान और सुन्नत की बातों को ध्यान से सुनें और उस पर अमल करें। याद रखें, एक दिन हम सबको अल्लाह के सामने खड़ा होना है, और उस दिन की कामयाबी उन्हीं के लिए है जो आज सच्चाई को सुनकर उसे अपना लें।



📜 आयत 34-38 — सूरा अल-अनआम

34وَلَقَدْ كُذِّبَتْ رُسُلٌ مِّن قَبْلِكَ فَصَبَرُوا عَلَىٰ مَا كُذِّبُوا وَأُوذُوا حَتَّىٰ أَتَاهُمْ نَصْرُنَا ۚ وَلَا مُبَدِّلَ لِكَلِمَاتِ اللَّهِ ۚ وَلَقَدْ جَاءَكَ مِن نَّبَإِ الْمُرْسَلِينَ
और (कुछ तुम ही पर नहीं) तुमसे पहले भी बहुतेरे रसूल झुठलाए जा चुके हैं तो उन्होनें अपने झुठलाए जाने और अज़ीयत (व तकलीफ) पर सब्र किया यहाँ तक कि हमारी मदद उनके पास आयी और (क्यों न आती) ख़ुदा की बातों का कोई बदलने वाला नहीं है और पैग़म्बर के हालात तो तुम्हारे पास पहुँच ही चुके हैं
35وَإِن كَانَ كَبُرَ عَلَيْكَ إِعْرَاضُهُمْ فَإِنِ اسْتَطَعْتَ أَن تَبْتَغِيَ نَفَقًا فِي الْأَرْضِ أَوْ سُلَّمًا فِي السَّمَاءِ فَتَأْتِيَهُم بِآيَةٍ ۚ وَلَوْ شَاءَ اللَّهُ لَجَمَعَهُمْ عَلَى الْهُدَىٰ ۚ فَلَا تَكُونَنَّ مِنَ الْجَاهِلِينَ
अगरचे उन लोगों की रदगिरदानी (मुँह फेरना) तुम पर शाक़ ज़रुर है (लेकिन) अगर तुम्हारा बस चले तो ज़मीन के अन्दर कोई सुरगं ढँढ निकालो या आसमान में सीढ़ी लगाओ और उन्हें कोई मौजिज़ा ला दिखाओ (तो ये भी कर देखो) अगर ख़ुदा चाहता तो उन सब को राहे रास्त पर इकट्ठा कर देता (मगर वह तो इम्तिहान करता है) बस (देखो) तुम हरगिज़ ज़ालिमों में (शामिल) न होना
36۞ إِنَّمَا يَسْتَجِيبُ الَّذِينَ يَسْمَعُونَ ۘ وَالْمَوْتَىٰ يَبْعَثُهُمُ اللَّهُ ثُمَّ إِلَيْهِ يُرْجَعُونَ
(तुम्हारा कहना तो) सिर्फ वही लोग मानते हैं जो (दिल से) सुनते हैं और मुर्दो को तो ख़ुदा क़यामत ही में उठाएगा फिर उसी की तरफ लौटाए जाएंगें
37وَقَالُوا لَوْلَا نُزِّلَ عَلَيْهِ آيَةٌ مِّن رَّبِّهِ ۚ قُلْ إِنَّ اللَّهَ قَادِرٌ عَلَىٰ أَن يُنَزِّلَ آيَةً وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
और कुफ्फ़ार कहते हैं कि (आख़िर) उस नबी पर उसके परवरदिगार की तरफ से कोई मौजिज़ा क्यों नहीं नाज़िल होता तो तुम (उनसे) कह दो कि ख़ुदा मौजिज़े के नाज़िल करने पर ज़रुर क़ादिर है मगर उनमें के अक्सर लोग (ख़ुदा की मसलहतों को) नहीं जानते
38وَمَا مِن دَابَّةٍ فِي الْأَرْضِ وَلَا طَائِرٍ يَطِيرُ بِجَنَاحَيْهِ إِلَّا أُمَمٌ أَمْثَالُكُم ۚ مَّا فَرَّطْنَا فِي الْكِتَابِ مِن شَيْءٍ ۚ ثُمَّ إِلَىٰ رَبِّهِمْ يُحْشَرُونَ
ज़मीन में जो चलने फिरने वाला (हैवान) या अपने दोनों परों से उड़ने वाला परिन्दा है उनकी भी तुम्हारी तरह जमाअतें हैं और सब के सब लौह महफूज़ में मौजूद (हैं) हमने किताब (क़ुरान) में कोई बात नहीं छोड़ी है फिर सब के सब (चरिन्द हों या परिन्द) अपने परवरदिगार के हुज़ूर में लाए जायेंगे।
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
मक्कीअवतरण स्थान
36आयत

अनुवाद — अल-अनआम 36

सूरा अल-अनआम आयत 36 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (तुम्हारा कहना तो) सिर्फ वही लोग मानते हैं जो (दिल…

सूरा आयत 36/165 — सूरा अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनआम सुनें, सूरा अल-अनआम अनुवाद, सूरा अल-अनआम mp3, सूरा अल-अनआम pdf. आयत 34–38. हिंदी अर्थ: اردو.





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Thursday, October 1, 2026

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