अल-अनआम · 60/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
وَهُوَ الَّذِي يَتَوَفَّاكُم بِاللَّيْلِ وَيَعْلَمُ مَا جَرَحْتُم بِالنَّهَارِ ثُمَّ يَبْعَثُكُمْ فِيهِ لِيُقْضَىٰ أَجَلٌ مُّسَمًّى ۖ ثُمَّ إِلَيْهِ مَرْجِعُكُمْ ثُمَّ يُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ ۝٦٠
Wa Huwal lazee yatawaf faakum billaili wa ya`lamu maa jarahtum binnahaari summa yab`asukum fee liyuqdaaa ajalum musamman summa ilaihi marji`ukum summa yunabbi `ukum bimaa kuntum ta`maloon
📖 हिंदी अर्थ
वह वही (ख़ुदा) है जो तुम्हें रात को (नींद में एक तरह पर दुनिया से) उठा लेता हे और जो कुछ तूने दिन को किया है जानता है फिर तुम्हें दिन को उठा कर खड़ा करता है ताकि (ज़िन्दगी की) (वह) मियाद जो (उसके इल्म में) मुअय्युन है पूरी की जाए फिर (तो आख़िर) तुम सबको उसी की तरफ लौटना है फिर जो कुछ तुम (दुनिया में भला बुरा) करते हो तुम्हें बता देगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يَتَوَفَّاكُمْ: तुम्हारी आत्माओं को क़ब्ज़ कर लेता है (यहाँ नींद के समय आत्मा के क़ब्ज़ होने का अर्थ है)।
  • جَرَحْتُمْ: तुमने कमाया (अच्छे या बुरे कर्म)।
  • يَبْعَثُكُمْ: तुम्हें जगाता है (नींद से उठाता है)।
  • أَجَلٌ مُسَمًّى: निर्धारित समय (जीवन की निश्चित अवधि)।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह ही वह है जो रात में तुम्हारी आत्माओं को क़ब्ज़ कर लेता है—यानी नींद के समय वह तुम्हारी आत्मा को इस प्रकार अपने पास रखता है जैसे मृत्यु के समय क़ब्ज़ किया जाता है, लेकिन यह क़ब्ज़ अस्थायी होता है। वह दिन में तुम्हारे द्वारा किए गए सभी कर्मों को जानता है—चाहे वे अच्छे हों या बुरे, छोटे हों या बड़े। फिर वह तुम्हें नींद से जगाकर दिन में उठाता है, ताकि तुम अपने काम-काज कर सको और तुम्हारी निर्धारित आयु पूरी हो सके। यह प्रक्रिया (नींद और जागना) तब तक जारी रहती है जब तक कि तुम्हारा निर्धारित समय (मृत्यु) नहीं आ जाता। इसके बाद तुम्हें क़ब्रों से उठाकर अल्लाह की ओर लौटना है—यही तुम्हारा अंतिम पड़ाव है। फिर वह तुम्हें बताएगा कि तुम दुनिया में क्या-क्या करते रहे, और उसके अनुसार तुम्हें बदला (इनाम या सज़ा) देगा। यह आयत नींद को मृत्यु के समान और जागने को पुनर्जीवन के समान बताकर अल्लाह की क़ुदरत और उसके सामने हिसाब की याद दिलाती है।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. नींद अल्लाह की एक बड़ी निशानी है—यह मृत्यु की छोटी सी झलक है, और जागना पुनर्जीवन की याद दिलाता है। इससे इंसान को अख़िरत के दिन पर विश्वास मज़बूत होता है।
  2. अल्लाह हर पल हमारे कर्मों को देख रहा है और जान रहा है—चाहे हम छिपकर कुछ भी करें। यह एहसास इंसान को गुनाहों से बचाता है और नेक कामों की तरफ़ प्रेरित करता है।
  3. यह आयत बताती है कि जीवन की अवधि निर्धारित है, और हर इंसान को अपने अमल का हिसाब देना है। इसलिए हमें अपने हर काम में सावधानी बरतनी चाहिए और अल्लाह की रज़ा के अनुसार जीना चाहिए।
  4. अल्लाह की रहमत और इंसाफ़ का पता चलता है—वह हमें नींद देकर आराम देता है, फिर जगाकर काम करने का मौक़ा देता है, और अंत में न्यायपूर्ण तरीके से हमारा हिसाब लेगा। यह हमें अल्लाह पर भरोसा और उसकी इबादत के लिए प्रेरित करता है।


📜 आयत 58-62 — अल-अनआम

58قُل لَّوْ أَنَّ عِندِي مَا تَسْتَعْجِلُونَ بِهِ لَقُضِيَ الْأَمْرُ بَيْنِي وَبَيْنَكُمْ ۗ وَاللَّهُ أَعْلَمُ بِالظَّالِمِينَ
(उन लोगों से) कह दो कि जिस (अज़ाब) की तुम जल्दी करते हो अगर वह मेरे पास (एख्तियार में) होता तो मेरे और तुम्हारे दरमियान का फैसला कब का चुक गया होता और ख़ुदा तो ज़ालिमों से खूब वाक़िफ है
59۞ وَعِندَهُ مَفَاتِحُ الْغَيْبِ لَا يَعْلَمُهَا إِلَّا هُوَ ۚ وَيَعْلَمُ مَا فِي الْبَرِّ وَالْبَحْرِ ۚ وَمَا تَسْقُطُ مِن وَرَقَةٍ إِلَّا يَعْلَمُهَا وَلَا حَبَّةٍ فِي ظُلُمَاتِ الْأَرْضِ وَلَا رَطْبٍ وَلَا يَابِسٍ إِلَّا فِي كِتَابٍ مُّبِينٍ
और उसके पास ग़ैब की कुन्जियॉ हैं जिनको उसके सिवा कोई नही जानता और जो कुछ ख़ुशकी और तरी में है उसको (भी) वही जानता है और कोई पत्ता भी नहीं खटकता मगर वह उसे ज़रुर जानता है और ज़मीन की तारिक़ियों में कोई दाना और न कोई ख़ुश्क चीज़ है मगर वह नूरानी किताब (लौहे महफूज़) में मौजूद है
60وَهُوَ الَّذِي يَتَوَفَّاكُم بِاللَّيْلِ وَيَعْلَمُ مَا جَرَحْتُم بِالنَّهَارِ ثُمَّ يَبْعَثُكُمْ فِيهِ لِيُقْضَىٰ أَجَلٌ مُّسَمًّى ۖ ثُمَّ إِلَيْهِ مَرْجِعُكُمْ ثُمَّ يُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
वह वही (ख़ुदा) है जो तुम्हें रात को (नींद में एक तरह पर दुनिया से) उठा लेता हे और जो कुछ तूने दिन को किया है जानता है फिर तुम्हें दिन को उठा कर खड़ा करता है ताकि (ज़िन्दगी की) (वह) मियाद जो (उसके इल्म में) मुअय्युन है पूरी की जाए फिर (तो आख़िर) तुम सबको उसी की तरफ लौटना है फिर जो कुछ तुम (दुनिया में भला बुरा) करते हो तुम्हें बता देगा
61وَهُوَ الْقَاهِرُ فَوْقَ عِبَادِهِ ۖ وَيُرْسِلُ عَلَيْكُمْ حَفَظَةً حَتَّىٰ إِذَا جَاءَ أَحَدَكُمُ الْمَوْتُ تَوَفَّتْهُ رُسُلُنَا وَهُمْ لَا يُفَرِّطُونَ
वह अपने बन्दों पर ग़ालिब है वह तुम लोगों पर निगेहबान (फ़रिश्ततें तैनात करके) भेजता है-यहाँ तक कि जब तुम में से किसी की मौत आए तो हमारे भेजे हुये फ़रिश्ते उसको (दुनिया से) उठा लेते हैं और वह (हमारे तामीले हुक्म में ज़रा भी) कोताही नहीं करते
62ثُمَّ رُدُّوا إِلَى اللَّهِ مَوْلَاهُمُ الْحَقِّ ۚ أَلَا لَهُ الْحُكْمُ وَهُوَ أَسْرَعُ الْحَاسِبِينَ
फिर ये लोग अपने सच्चे मालिक ख़ुदा के पास वापस बुलाए गए-आगाह रहो कि हुक़ूमत ख़ास उसी के लिए है और वह सबसे ज्यादा हिसाब लेने वाला है
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अनुवाद — अल-अनआम 60

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सूरा आयत 60/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 58–62. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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