अल-अनआम · 59/165
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनआम
۞ وَعِندَهُ مَفَاتِحُ الْغَيْبِ لَا يَعْلَمُهَا إِلَّا هُوَ ۚ وَيَعْلَمُ مَا فِي الْبَرِّ وَالْبَحْرِ ۚ وَمَا تَسْقُطُ مِن وَرَقَةٍ إِلَّا يَعْلَمُهَا وَلَا حَبَّةٍ فِي ظُلُمَاتِ الْأَرْضِ وَلَا رَطْبٍ وَلَا يَابِسٍ إِلَّا فِي كِتَابٍ مُّبِينٍ ۝٥٩
Wa `indahoo mafaatihul ghaibi laa ya`lamuhaaa illaa Hoo; wa ya`lamu maa fil barri walbahr; wa maa tasqutu minw waraqatin illaa ya`lamuhaa wa laa habbatin fee zulumaatil ardi wa laa ratbinw wa laa yaabisin illaa fee Kitaabim Mubeen
📖 हिंदी अर्थ
और उसके पास ग़ैब की कुन्जियॉ हैं जिनको उसके सिवा कोई नही जानता और जो कुछ ख़ुशकी और तरी में है उसको (भी) वही जानता है और कोई पत्ता भी नहीं खटकता मगर वह उसे ज़रुर जानता है और ज़मीन की तारिक़ियों में कोई दाना और न कोई ख़ुश्क चीज़ है मगर वह नूरानी किताब (लौहे महफूज़) में मौजूद है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَفَاتِحُ الْغَيْبِ: ग़ैब (अदृश्य) की कुंजियाँ या ख़ज़ाने।
  • ظُلُمَاتِ الْأَرْضِ: धरती के अंधेरे, यानी धरती के भीतर के छिपे हुए हिस्से।
  • كِتَابٍ مُّبِينٍ: स्पष्ट और खुले लेख, जिसका अर्थ लौह-ए-महफ़ूज़ (सुरक्षित पट्टिका) है।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला के पास ही ग़ैब की सभी कुंजियाँ हैं, यानी अदृश्य चीज़ों के ख़ज़ाने और उन तक पहुँचने के रास्ते केवल उसी के पास हैं। इन्हें कोई और नहीं जानता, न कोई फ़रिश्ता, न कोई नबी। इनमें क़यामत का समय, बारिश का उतरना, माँ के पेट में बच्चे की हालत, भविष्य में इंसान क्या कमाएगा, और हर इंसान की मौत की जगह जैसे मामले शामिल हैं। वह ज़मीन और समुद्र में मौजूद हर चीज़ को जानता है—चाहे वह जानवर हो, पौधा हो या बेजान चीज़। कोई पत्ता पेड़ से नहीं गिरता, मगर उसे उसका पता होता है। धरती के अंधेरों में छिपा हुआ कोई अनाज का दाना, कोई हरी या सूखी चीज़—सब कुछ उसके ज्ञान में है और सब कुछ एक स्पष्ट किताब (लौह-ए-महफ़ूज़) में लिखा हुआ है, जिसमें कोई भ्रम या कमी नहीं।

फ़ायदे (सबक़):

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह का ज्ञान हर चीज़ को घेरे हुए है—बड़ी से बड़ी और छोटी से छोटी चीज़ उससे छिपी नहीं है। यह हमारे दिलों में अल्लाह की अज़मत और क़ुदरत का एहसास पैदा करता है और हमें यक़ीन दिलाता है कि हमारे हर अच्छे या बुरे काम का हिसाब होगा, क्योंकि सब कुछ उसके इल्म में है। यह हमें ग़ैब के मामलों में केवल अल्लाह पर भरोसा करना सिखाता है, क्योंकि ग़ैब की कुंजियाँ सिर्फ़ उसी के पास हैं। साथ ही, यह हमें ज़िम्मेदारी का एहसास देता है कि हम अपने कामों में सावधानी बरतें, क्योंकि अल्लाह हर पत्ते के गिरने तक को जानता है, तो हमारे कर्म तो उससे किसी भी हाल में छिपे नहीं हैं। यह आयत हमें अल्लाह के इल्म की असीमता पर ग़ौर करने की दावत देती है और हमारे दिल में उसकी मोहब्बत और ख़ौफ़ दोनों पैदा करती है।



📜 आयत 57-61 — सूरा अल-अनआम

57قُلْ إِنِّي عَلَىٰ بَيِّنَةٍ مِّن رَّبِّي وَكَذَّبْتُم بِهِ ۚ مَا عِندِي مَا تَسْتَعْجِلُونَ بِهِ ۚ إِنِ الْحُكْمُ إِلَّا لِلَّهِ ۖ يَقُصُّ الْحَقَّ ۖ وَهُوَ خَيْرُ الْفَاصِلِينَ
तुम कह दो कि मै तो अपने परवरदिगार की तरफ से एक रौशन दलील पर हूं और तुमने उसे झुठला दिया (तो) तुम जिस की जल्दी करते हो (अज़ाब) वह कुछ मेरे पास (एख्तियार में) तो है नहीं हुकूमत तो बस ज़रुर ख़ुदा ही के लिए है वह तो (हक़) बयान करता है और वह तमाम फैसला करने वालों से बेहतर है
58قُل لَّوْ أَنَّ عِندِي مَا تَسْتَعْجِلُونَ بِهِ لَقُضِيَ الْأَمْرُ بَيْنِي وَبَيْنَكُمْ ۗ وَاللَّهُ أَعْلَمُ بِالظَّالِمِينَ
(उन लोगों से) कह दो कि जिस (अज़ाब) की तुम जल्दी करते हो अगर वह मेरे पास (एख्तियार में) होता तो मेरे और तुम्हारे दरमियान का फैसला कब का चुक गया होता और ख़ुदा तो ज़ालिमों से खूब वाक़िफ है
59۞ وَعِندَهُ مَفَاتِحُ الْغَيْبِ لَا يَعْلَمُهَا إِلَّا هُوَ ۚ وَيَعْلَمُ مَا فِي الْبَرِّ وَالْبَحْرِ ۚ وَمَا تَسْقُطُ مِن وَرَقَةٍ إِلَّا يَعْلَمُهَا وَلَا حَبَّةٍ فِي ظُلُمَاتِ الْأَرْضِ وَلَا رَطْبٍ وَلَا يَابِسٍ إِلَّا فِي كِتَابٍ مُّبِينٍ
और उसके पास ग़ैब की कुन्जियॉ हैं जिनको उसके सिवा कोई नही जानता और जो कुछ ख़ुशकी और तरी में है उसको (भी) वही जानता है और कोई पत्ता भी नहीं खटकता मगर वह उसे ज़रुर जानता है और ज़मीन की तारिक़ियों में कोई दाना और न कोई ख़ुश्क चीज़ है मगर वह नूरानी किताब (लौहे महफूज़) में मौजूद है
60وَهُوَ الَّذِي يَتَوَفَّاكُم بِاللَّيْلِ وَيَعْلَمُ مَا جَرَحْتُم بِالنَّهَارِ ثُمَّ يَبْعَثُكُمْ فِيهِ لِيُقْضَىٰ أَجَلٌ مُّسَمًّى ۖ ثُمَّ إِلَيْهِ مَرْجِعُكُمْ ثُمَّ يُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
वह वही (ख़ुदा) है जो तुम्हें रात को (नींद में एक तरह पर दुनिया से) उठा लेता हे और जो कुछ तूने दिन को किया है जानता है फिर तुम्हें दिन को उठा कर खड़ा करता है ताकि (ज़िन्दगी की) (वह) मियाद जो (उसके इल्म में) मुअय्युन है पूरी की जाए फिर (तो आख़िर) तुम सबको उसी की तरफ लौटना है फिर जो कुछ तुम (दुनिया में भला बुरा) करते हो तुम्हें बता देगा
61وَهُوَ الْقَاهِرُ فَوْقَ عِبَادِهِ ۖ وَيُرْسِلُ عَلَيْكُمْ حَفَظَةً حَتَّىٰ إِذَا جَاءَ أَحَدَكُمُ الْمَوْتُ تَوَفَّتْهُ رُسُلُنَا وَهُمْ لَا يُفَرِّطُونَ
वह अपने बन्दों पर ग़ालिब है वह तुम लोगों पर निगेहबान (फ़रिश्ततें तैनात करके) भेजता है-यहाँ तक कि जब तुम में से किसी की मौत आए तो हमारे भेजे हुये फ़रिश्ते उसको (दुनिया से) उठा लेते हैं और वह (हमारे तामीले हुक्म में ज़रा भी) कोताही नहीं करते
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
मक्कीअवतरण स्थान
59आयत

अनुवाद — अल-अनआम 59

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Thursday, October 1, 2026

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