अल-अनआम · 82/165
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनआम
الَّذِينَ آمَنُوا وَلَمْ يَلْبِسُوا إِيمَانَهُم بِظُلْمٍ أُولَٰئِكَ لَهُمُ الْأَمْنُ وَهُم مُّهْتَدُونَ ۝٨٢
Allazeena aamanoo wa lam yalbisooo eemaanahum bizulmin ulaaa`ika lahumul amnu wa hum muhtadoon
📖 हिंदी अर्थ
जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अपने ईमान को ज़ुल्म (शिर्क) से आलूदा नहीं किया उन्हीं लोगों के लिए अमन (व इतमिनान) है और यही लोग हिदायत याफ़ता हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَلْبِسُوا: मिलाना, मिश्रित करना।
  • بِظُلْمٍ: यहाँ 'ज़ुल्म' से अभिप्राय 'शिर्क' (बहुदेववाद) है, जैसा कि हज़रत लुक़मान (अलैहिस्सलाम) की नसीहत में आया है: "वास्तव में शिर्क बहुत बड़ा ज़ुल्म है।"

तफ़सीर:

यह आयत उन लोगों के बारे में है जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर ईमान लाया और उसके दीन पर अमल किया, लेकिन साथ ही उन्होंने अपने इस ईमान को शिर्क की गंदगी से मिलाया नहीं। यानी उनका ईमान खालिस और पवित्र है, उसमें किसी प्रकार का बहुदेववाद या मूर्तिपूजा शामिल नहीं है। ऐसे ही लोगों के लिए अल्लाह की ओर से वादा है कि उन्हें पूर्ण सुरक्षा और शांति प्राप्त होगी—दुनिया में भी और आख़िरत में भी। वे किसी भय या चिंता में नहीं होंगे। और वही सच्चे मार्गदर्शन पर हैं, क्योंकि अल्लाह ने उन्हें सीधा रास्ता दिखाया और उन्हें अपनी तौफ़ीक़ से हिदायत दी। यह आयत उन लोगों के लिए एक स्पष्ट निर्णय है जो ईमान और शिर्क को मिला देते हैं—उनके लिए न तो अम्न (सुरक्षा) है और न ही सच्ची हिदायत।

फ़ायदे:

  1. ईमान की पवित्रता और खालिसपन अल्लाह के यहाँ सबसे महत्वपूर्ण है। शिर्क से बचना ही सच्चे ईमान की निशानी है।
  2. यह आयत हमें सिखाती है कि सच्ची शांति और मन की तसल्ली सिर्फ़ अल्लाह पर पूर्ण भरोसा और उसकी इबादत में एकाग्रता से मिलती है, न कि दुनिया के माल या ओहदे से।
  3. जो व्यक्ति अपने ईमान को शिर्क और बिदअत से बचाए रखता है, अल्लाह उसे दुनिया और आख़िरत दोनों में अम्न (सुरक्षा) अता करता है और उसे सीधे रास्ते पर चलाता है।
  4. यह आयत मुसलमानों को तौहीद (एकेश्वरवाद) पर स्थिर रहने और हर उस चीज़ से दूर रहने की तरग़ीब देती है जो अल्लाह के साथ किसी को शरीक ठहराए, चाहे वह बड़ा हो या छोटा।


📜 आयत 80-84 — सूरा अल-अनआम

80وَحَاجَّهُ قَوْمُهُ ۚ قَالَ أَتُحَاجُّونِّي فِي اللَّهِ وَقَدْ هَدَانِ ۚ وَلَا أَخَافُ مَا تُشْرِكُونَ بِهِ إِلَّا أَن يَشَاءَ رَبِّي شَيْئًا ۗ وَسِعَ رَبِّي كُلَّ شَيْءٍ عِلْمًا ۗ أَفَلَا تَتَذَكَّرُونَ
और उनकी क़ौम के लोग उनसे हुज्जत करने लगे तो इबराहीम ने कहा था क्या तुम मुझसे ख़ुदा के बारे में हुज्जत करते हो हालॉकि वह यक़ीनी मेरी हिदायत कर चुका और तुम मे जिन बुतों को उसका शरीक मानते हो मै उनसे डरता (वरता) नहीं (वह मेरा कुछ नहीं कर सकते) मगर हॉ मेरा ख़ुदा खुद (करना) चाहे तो अलबत्ता कर सकता है मेरा परवरदिगार तो बाएतबार इल्म के सब पर हावी है तो क्या उस पर भी तुम नसीहत नहीं मानते
81وَكَيْفَ أَخَافُ مَا أَشْرَكْتُمْ وَلَا تَخَافُونَ أَنَّكُمْ أَشْرَكْتُم بِاللَّهِ مَا لَمْ يُنَزِّلْ بِهِ عَلَيْكُمْ سُلْطَانًا ۚ فَأَيُّ الْفَرِيقَيْنِ أَحَقُّ بِالْأَمْنِ ۖ إِن كُنتُمْ تَعْلَمُونَ
और जिन्हें तुम ख़ुदा का शरीक बताते हो मै उन से क्यों डरुँ जब तुम इस बात से नहीं डरते कि तुमने ख़ुदा का शरीक ऐसी चीज़ों को बनाया है जिनकी ख़ुदा ने कोई सनद तुम पर नहीं नाज़िल की फिर अगर तुम जानते हो तो (भला बताओ तो सही कि) हम दोनों फरीक़ (गिरोह) में अमन क़ायम रखने का ज्यादा हक़दार कौन है
82الَّذِينَ آمَنُوا وَلَمْ يَلْبِسُوا إِيمَانَهُم بِظُلْمٍ أُولَٰئِكَ لَهُمُ الْأَمْنُ وَهُم مُّهْتَدُونَ
जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अपने ईमान को ज़ुल्म (शिर्क) से आलूदा नहीं किया उन्हीं लोगों के लिए अमन (व इतमिनान) है और यही लोग हिदायत याफ़ता हैं
83وَتِلْكَ حُجَّتُنَا آتَيْنَاهَا إِبْرَاهِيمَ عَلَىٰ قَوْمِهِ ۚ نَرْفَعُ دَرَجَاتٍ مَّن نَّشَاءُ ۗ إِنَّ رَبَّكَ حَكِيمٌ عَلِيمٌ
और ये हमारी (समझाई बुझाई) दलीलें हैं जो हमने इबराहीम को अपनी क़ौम पर (ग़ालिब आने के लिए) अता की थी हम जिसके मरतबे चाहते हैं बुलन्द करते हैं बेशक तुम्हारा परवरदिगार हिक़मत वाला बाख़बर है
84وَوَهَبْنَا لَهُ إِسْحَاقَ وَيَعْقُوبَ ۚ كُلًّا هَدَيْنَا ۚ وَنُوحًا هَدَيْنَا مِن قَبْلُ ۖ وَمِن ذُرِّيَّتِهِ دَاوُودَ وَسُلَيْمَانَ وَأَيُّوبَ وَيُوسُفَ وَمُوسَىٰ وَهَارُونَ ۚ وَكَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ
और हमने इबराहीम को इसहाक़ वा याक़ूब (सा बेटा पोता) अता किया हमने सबकी हिदायत की और उनसे पहले नूह को (भी) हम ही ने हिदायत की और उन्हीं (इबराहीम) को औलाद से दाऊद व सुलेमान व अय्यूब व यूसुफ व मूसा व हारुन (सब की हमने हिदायत की) और नेकों कारों को हम ऐसा ही इल्म अता फरमाते हैं
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
मक्कीअवतरण स्थान
82आयत

अनुवाद — अल-अनआम 82

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Friday, October 2, 2026

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