अल-अनआम · 9/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
وَلَوْ جَعَلْنَاهُ مَلَكًا لَّجَعَلْنَاهُ رَجُلًا وَلَلَبَسْنَا عَلَيْهِم مَّا يَلْبِسُونَ ۝٩
Wa law ja`alnaahu malakal laja`alnaahu rajulanw wa lalabasnaa `alaihim maa yalbisoon
📖 हिंदी अर्थ
और अगर हम फरिश्ते को नबी बनाते तो (आख़िर) उसको भी मर्द सूरत बनाते और जो शुबहे ये लोग कर रहे हैं वही शुबहे (गोया) हम ख़ुद उन पर (उस वक्त भी) उठा देते

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَلَكًا: फ़रिश्ता
  • رَجُلًا: आदमी (मनुष्य)
  • لَلَبَسْنَا: हम उलझन में डाल देते, संदेह पैदा कर देते
  • مَا يَلْبِسُونَ: जो वे उलझन/संदेह में डालते हैं

तफ़सीर (व्याख्या):

जब काफ़िरों ने यह कहा कि यह रसूल आदमी क्यों है? फ़रिश्ता क्यों नहीं भेजा गया? तो अल्लाह तआला ने फ़रमाया: अगर हम उनके पास फ़रिश्ते को रसूल बनाकर भेजते, तो भी हम उसे आदमी के रूप में भेजते, क्योंकि वे फ़रिश्ते को उसकी असली सूरत में देख ही नहीं सकते। फ़रिश्ते की असली हालत में उनसे बात करना और उनका उससे सीखना संभव नहीं था। इसलिए हम उसे आदमी की शक्ल में भेजते, ताकि वे उससे बात कर सकें और उससे सीख सकें। लेकिन फिर भी उन्हें वही संदेह और उलझन होती जो आज मुहम्मद ﷺ के बारे में है। वे कहते कि यह तो आदमी है, फ़रिश्ता नहीं। इस तरह वे उसी उलझन में पड़े रहते, जिस उलझन में आज पड़े हुए हैं। यानी उनका यह बहाना कि रसूल फ़रिश्ता होना चाहिए, सिर्फ़ एक बहाना है। असल में उनका मक़सद सच्चाई को मानना नहीं, बल्कि हठ और इनकार है। अगर फ़रिश्ता भी आदमी की सूरत में आता, तो भी वे उसे न मानते।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. अल्लाह की रहमत और हिकमत देखिए कि उसने रसूलों को इंसानों में से ही चुना, ताकि लोग उनसे सीधे बात कर सकें, उनसे सीख सकें और उनके जीवन को अपने सामने देखकर अमल कर सकें। यह अल्लाह की बड़ी मेहरबानी है।
  2. जो लोग सच्चाई को नहीं मानना चाहते, वे हर हालत में बहाने ढूँढ़ लेते हैं। अगर एक बहाना ख़त्म भी हो जाए, तो दूसरा बहाना बना लेते हैं। इसलिए हमें अपने दिल को सच्चाई के लिए खुला रखना चाहिए।
  3. अल्लाह ने हमारे लिए नबी ﷺ को इंसान बनाकर भेजा, ताकि हम उनकी सीरत को अपने जीवन में आसानी से अपना सकें। अगर नबी फ़रिश्ता होते, तो हमारे लिए उनकी पैरवी करना बहुत मुश्किल होता।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की हर बात में हिकमत होती है, चाहे हमें वह समझ आए या न आए। हमें अल्लाह के फ़ैसलों पर भरोसा रखना चाहिए।


📜 आयत 7-11 — अल-अनआम

7وَلَوْ نَزَّلْنَا عَلَيْكَ كِتَابًا فِي قِرْطَاسٍ فَلَمَسُوهُ بِأَيْدِيهِمْ لَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا إِنْ هَٰذَا إِلَّا سِحْرٌ مُّبِينٌ
और (ऐ रसूल) अगर हम कागज़ पर (लिखी लिखाई) किताब (भी) तुम पर नाज़िल करते और ये लोग उसे अपने हाथों से छू भी लेते फिर भी कुफ्फार (न मानते और) कहते कि ये तो बस खुला हुआ जादू है
8وَقَالُوا لَوْلَا أُنزِلَ عَلَيْهِ مَلَكٌ ۖ وَلَوْ أَنزَلْنَا مَلَكًا لَّقُضِيَ الْأَمْرُ ثُمَّ لَا يُنظَرُونَ
और (ये भी) कहते कि उस (नबी) पर कोई फरिश्ता क्यों नहीं नाज़िल किया गया (जो साथ साथ रहता) हालॉकि अगर हम फरिश्ता भेज देते तो (उनका) काम ही तमाम हो जाता (और) फिर उन्हें मोहलत भी न दी जाती
9وَلَوْ جَعَلْنَاهُ مَلَكًا لَّجَعَلْنَاهُ رَجُلًا وَلَلَبَسْنَا عَلَيْهِم مَّا يَلْبِسُونَ
और अगर हम फरिश्ते को नबी बनाते तो (आख़िर) उसको भी मर्द सूरत बनाते और जो शुबहे ये लोग कर रहे हैं वही शुबहे (गोया) हम ख़ुद उन पर (उस वक्त भी) उठा देते
10وَلَقَدِ اسْتُهْزِئَ بِرُسُلٍ مِّن قَبْلِكَ فَحَاقَ بِالَّذِينَ سَخِرُوا مِنْهُم مَّا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ
(ऐ रसूल तुम दिल तंग न हो) तुम से पहले (भी) पैग़म्बरों के साथ मसख़रापन किया गया है पस जो लोग मसख़रापन करते थे उनको उस अज़ाब ने जिसके ये लोग हॅसी उड़ाते थे घेर लिया
11قُلْ سِيرُوا فِي الْأَرْضِ ثُمَّ انظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُكَذِّبِينَ
(ऐ रसूल उनसे) कहो कि ज़रुर रुए ज़मीन पर चल फिर कर देखो तो कि (अम्बिया के) झुठलाने वालो का क्या (बुरा) अन्जाम हुआ
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
मक्कीRevelation
9आयत

अनुवाद — अल-अनआम 9

सूरा अल-अनआम आयत 9 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अगर हम फरिश्ते को नबी बनाते तो (आख़िर) उसको…

सूरा आयत 9/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 7–11. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए