अल-क़लम · 38/52
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़लम
إِنَّ لَكُمْ فِيهِ لَمَا تَخَيَّرُونَ ۝٣٨
Inna lakum feehi lamaa takhaiyaroon
📖 हिंदी अर्थ
कि जो चीज़ पसन्द करोगे तुम को वहाँ ज़रूर मिलेगी

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لَمَا تَخَيَّرُونَ — जो तुम चुनना चाहो, जो तुम्हारी पसंद का हो।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में मुशरिकीन और काफ़िरों के उस बातिल ख़याल का रद्द कर रहे हैं जो वे रखते थे। वे कहते थे कि क़यामत के दिन हमें भी वही अच्छा बदला मिलेगा जो मोमिनों को मिलेगा। अल्लाह फ़रमाता है: क्या तुम्हारे पास कोई आसमानी किताब है जिसमें तुम पढ़ते हो कि तुम्हारे लिए वही कुछ है जो तुम चुनते हो? क्या तुम्हें इस बात की ज़मानत दी गई है कि तुम जो चाहोगे, वही तुम्हें मिलेगा?

यानी अल्लाह तआला फ़रमा रहे हैं कि अगर तुम्हारा ये दावा सच्चा है कि तुम्हें आख़िरत में वही मिलेगा जो तुम चाहोगे, तो लाओ कोई किताब जो अल्लाह की तरफ़ से नाज़िल हुई हो और जिसमें तुम पढ़ते हो कि तुम्हारे लिए वही कुछ है जो तुम अपने लिए चुनते हो। हालाँकि ऐसी कोई किताब मौजूद नहीं, न उनके पास कोई सबूत है, बल्कि ये सिर्फ़ उनकी ख़्वाहिशात और झूठी उम्मीदें हैं।

ये आयत हमें सिखाती है कि आख़िरत का इनाम सिर्फ़ अल्लाह की रहमत और उसकी इबादत से मिलता है, न कि अपनी ख़्वाहिशों और अरमानों से। जो लोग अल्लाह की इताअत से दूर रहते हैं और फिर भी जन्नत की उम्मीद रखते हैं, वे सिर्फ़ अपने आपको धोखा दे रहे हैं। अल्लाह तआला इंसाफ़ का मालिक है — जो नेकी करेगा उसे नेकी का बदला मिलेगा, और जो गुनाह करेगा उसे उसका अंजाम भुगतना होगा। कोई भी व्यक्ति अपनी मनमर्ज़ी से जन्नत हासिल नहीं कर सकता, बल्कि ईमान, नेक अमल और अल्लाह की रहमत ही जन्नत का ज़रिया है।

ये आयत हम मुसलमानों के लिए भी एक नसीहत है कि हम सिर्फ़ अपनी ख़्वाहिशों पर भरोसा न करें, बल्कि क़ुरआन और सुन्नत पर अमल करें। अल्लाह ने हमें क़ुरआन दिया है जो हमारे लिए रहनुमाई की किताब है — अगर हम उस पर अमल करेंगे तो ही हमें आख़िरत में कामयाबी मिलेगी। अल्लाह तआला से दुआ है कि वह हमें सच्चे ईमान और नेक अमल की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 36-40 — सूरा अल-क़लम

36مَا لَكُمْ كَيْفَ تَحْكُمُونَ
(हरगिज़ नहीं) तुम्हें क्या हो गया है तुम तुम कैसा हुक्म लगाते हो
37أَمْ لَكُمْ كِتَابٌ فِيهِ تَدْرُسُونَ
या तुम्हारे पास कोई ईमानी किताब है जिसमें तुम पढ़ लेते हो
38إِنَّ لَكُمْ فِيهِ لَمَا تَخَيَّرُونَ
कि जो चीज़ पसन्द करोगे तुम को वहाँ ज़रूर मिलेगी
39أَمْ لَكُمْ أَيْمَانٌ عَلَيْنَا بَالِغَةٌ إِلَىٰ يَوْمِ الْقِيَامَةِ ۙ إِنَّ لَكُمْ لَمَا تَحْكُمُونَ
या तुमने हमसे क़समें ले रखी हैं जो रोज़े क़यामत तक चली जाएगी कि जो कुछ तुम हुक्म दोगे वही तुम्हारे लिए ज़रूर हाज़िर होगा
40سَلْهُمْ أَيُّهُم بِذَٰلِكَ زَعِيمٌ
उनसे पूछो तो कि उनमें इसका कौन ज़िम्मेदार है
अल-क़लमकुरान सूची
52आयत
मक्कीअवतरण स्थान
38आयत

अनुवाद — अल-क़लम 38

सूरा अल-क़लम आयत 38 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कि जो चीज़ पसन्द करोगे तुम को वहाँ ज़रूर मिलेगी

सूरा आयत 38/52 — सूरा अल-क़लम القلم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़लम सुनें, सूरा अल-क़लम अनुवाद, सूरा अल-क़लम mp3, सूरा अल-क़लम pdf. आयत 36–40. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Thursday, October 1, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए