अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لَمَا تَخَيَّرُونَ — जो तुम चुनना चाहो, जो तुम्हारी पसंद का हो।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में मुशरिकीन और काफ़िरों के उस बातिल ख़याल का रद्द कर रहे हैं जो वे रखते थे। वे कहते थे कि क़यामत के दिन हमें भी वही अच्छा बदला मिलेगा जो मोमिनों को मिलेगा। अल्लाह फ़रमाता है: क्या तुम्हारे पास कोई आसमानी किताब है जिसमें तुम पढ़ते हो कि तुम्हारे लिए वही कुछ है जो तुम चुनते हो? क्या तुम्हें इस बात की ज़मानत दी गई है कि तुम जो चाहोगे, वही तुम्हें मिलेगा?
यानी अल्लाह तआला फ़रमा रहे हैं कि अगर तुम्हारा ये दावा सच्चा है कि तुम्हें आख़िरत में वही मिलेगा जो तुम चाहोगे, तो लाओ कोई किताब जो अल्लाह की तरफ़ से नाज़िल हुई हो और जिसमें तुम पढ़ते हो कि तुम्हारे लिए वही कुछ है जो तुम अपने लिए चुनते हो। हालाँकि ऐसी कोई किताब मौजूद नहीं, न उनके पास कोई सबूत है, बल्कि ये सिर्फ़ उनकी ख़्वाहिशात और झूठी उम्मीदें हैं।
ये आयत हमें सिखाती है कि आख़िरत का इनाम सिर्फ़ अल्लाह की रहमत और उसकी इबादत से मिलता है, न कि अपनी ख़्वाहिशों और अरमानों से। जो लोग अल्लाह की इताअत से दूर रहते हैं और फिर भी जन्नत की उम्मीद रखते हैं, वे सिर्फ़ अपने आपको धोखा दे रहे हैं। अल्लाह तआला इंसाफ़ का मालिक है — जो नेकी करेगा उसे नेकी का बदला मिलेगा, और जो गुनाह करेगा उसे उसका अंजाम भुगतना होगा। कोई भी व्यक्ति अपनी मनमर्ज़ी से जन्नत हासिल नहीं कर सकता, बल्कि ईमान, नेक अमल और अल्लाह की रहमत ही जन्नत का ज़रिया है।
ये आयत हम मुसलमानों के लिए भी एक नसीहत है कि हम सिर्फ़ अपनी ख़्वाहिशों पर भरोसा न करें, बल्कि क़ुरआन और सुन्नत पर अमल करें। अल्लाह ने हमें क़ुरआन दिया है जो हमारे लिए रहनुमाई की किताब है — अगर हम उस पर अमल करेंगे तो ही हमें आख़िरत में कामयाबी मिलेगी। अल्लाह तआला से दुआ है कि वह हमें सच्चे ईमान और नेक अमल की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 36-40 — अल-क़लम
अनुवाद — अल-क़लम 38
सूरा अल-क़लम आयत 38 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कि जो चीज़ पसन्द करोगे तुम को वहाँ ज़रूर मिलेगीसूरा आयत 38/52 — अल-क़लम القلم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़लम सुनें, अल-क़लम अनुवाद, अल-क़लम mp3, अल-क़लम pdf. आयत 36–40. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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