Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَمْ: क्या (प्रश्नवाचक, इसमें इन्कार और तिरस्कार का भाव है)
- كِتَابٌ: किताब, कोई आसमानी ग्रंथ
- تَدْرُسُونَ: तुम पढ़ते हो, अध्ययन करते हो, सीखते हो
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में उन लोगों से पूछ रहे हैं जो मुत्तक़ी (परहेज़गार) और गुनहगार को एक समान मानते हैं, या यह सोचते हैं कि अल्लाह के यहाँ नेक और बदकार का एक ही हुक्म होगा। अल्लाह फ़रमाता है: "क्या तुम्हारे पास कोई ऐसी किताब है जिसमें तुम पढ़ते हो कि आज्ञाकारी और अवज्ञाकारी (गुनहगार) बराबर हैं? क्या तुम्हारे पास कोई आसमानी ग्रंथ है जो तुम्हें यह सिखाता है कि जो अल्लाह की इताअत करता है और जो उसकी नाफ़रमानी करता है, दोनों का अंजाम एक जैसा होगा?"
यह एक ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर देना असंभव है, क्योंकि किसी भी आसमानी किताब में यह नहीं लिखा है कि नेक और बदकार बराबर हैं। बल्कि सभी आसमानी किताबों में यही पढ़ाया गया है कि नेकी का बदला नेकी है और बुराई का बदला बुराई है। अल्लाह तआला ने हर युग में अपने नबियों के माध्यम से यही संदेश भेजा है कि अच्छे और बुरे का अंजाम अलग-अलग होगा।
यह आयत उन लोगों के लिए एक चुनौती है जो क़ियामत के दिन अल्लाह के फ़ैसले पर शक करते हैं या यह समझते हैं कि अल्लाह इन्साफ़ नहीं करेगा। अल्लाह तआला फ़रमा रहे हैं: "अगर तुम्हारा यह दावा सच है, तो लाओ अपनी किताब, जिसमें तुम पढ़ते हो!"
इस आयत में एक बहुत बड़ी सीख है कि हमें कभी भी अल्लाह के इन्साफ़ पर शक नहीं करना चाहिए। अल्लाह तआला बिल्कुल इन्साफ़ करने वाला है, और उसका फ़ैसला पूर्ण न्याय पर आधारित होगा। जो लोग यह सोचते हैं कि नेक और बदकार का अंजाम एक जैसा होगा, वह अल्लाह के इन्साफ़ को समझ नहीं पाए हैं।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हमें अपने जीवन में नेकी और परहेज़गारी अपनानी चाहिए, क्योंकि अल्लाह के यहाँ हर अच्छे और बुरे काम का हिसाब होगा। अल्लाह तआला कभी किसी की मेहनत को बेकार नहीं जाने देगा, और न ही किसी गुनहगार को बिना सज़ा के छोड़ेगा। यही अल्लाह का वादा है, और अल्लाह का वादा सच्चा है।
📜 आयत 35-39 — सूरा अल-क़लम
अनुवाद — अल-क़लम 37
सूरा अल-क़लम आयत 37 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : या तुम्हारे पास कोई ईमानी किताब है जिसमें तुम पढ़…सूरा आयत 37/52 — सूरा अल-क़लम القلم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़लम सुनें, सूरा अल-क़लम अनुवाद, सूरा अल-क़लम mp3, सूरा अल-क़लम pdf. आयत 35–39. हिंदी अर्थ: اردو.
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Friday, October 2, 2026
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