Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَيْمَانٌ: क़समें, वादे और अहद।
- بَالِغَةٌ: पूरी और मज़बूत, जो अटल हो।
- تَحْكُمُونَ: तुम अपने लिए फ़ैसला करते हो, यानी जो तुम चाहते हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में मुशरिकीन और मुनकिरीन से पूछ रहे हैं कि क्या तुम्हारे पास हमारे साथ कोई ऐसा अहद और वादा है जो क़यामत के दिन तक के लिए पक्का हो? क्या हमने तुम्हें क़समें देकर यह ज़माना दिया है कि तुम्हारे लिए वही होगा जो तुम ख़ुद चाहोगे और फ़ैसला करोगे? यानी क्या तुम्हारे पास कोई ऐसा दस्तावेज़ या मंज़ूरी है जिसके आधार पर तुम यह दावा करते हो कि तुम्हें जन्नत मिलेगी और तुम पर अज़ाब नहीं आएगा?
यह आयत उन लोगों की बात का खंडन करती है जो यह समझते थे कि वे अल्लाह के ख़ास बंदे हैं और उनके साथ अल्लाह का कोई विशेष रिश्ता है, जिसके कारण उन्हें दुनिया और आख़िरत में जो चाहे मिलेगा। अल्लाह फ़रमाता है कि यह महज़ तुम्हारा ख़्याली पुलाव है। तुम्हारे पास न कोई किताब है, न कोई सबूत, न कोई अहद। अल्लाह की राह में जो चीज़ मायने रखती है वह है ईमान, नेक अमल और अल्लाह का डर, न कि महज़ ख़्वाहिशें और झूठे दावे।
इस आयत में अल्लाह तआला ने यह भी सिखाया है कि इंसान को अपने दावों में सच्चा होना चाहिए और बिना सबूत के किसी चीज़ का दावा नहीं करना चाहिए। यह एक बहुत बड़ी शिक्षा है कि अल्लाह के यहाँ वही लोग कामयाब होंगे जो अल्लाह के हुक्मों पर चलेंगे, न कि वे जो सिर्फ़ ज़ुबान से दावे करते हैं।
दावती पहलू:
यह आयत हमें बताती है कि इस्लाम एक ऐसा दीन है जो इंसान को हक़ीक़त की तरफ़ बुलाता है। यहाँ कोई जात-पात, रंग-रूप या दौलत का सहारा नहीं चलता। अल्लाह के यहाँ हर इंसान बराबर है, और कामयाबी सिर्फ़ उसी को मिलेगी जो अल्लाह और उसके रसूल ﷺ पर ईमान लाए और नेक अमल करे। यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत की तरफ़ ले जाता है। आइए हम अपने दावों को सच्चे अमल से साबित करें और अल्लाह की रहमत के हक़दार बनें।
📜 आयत 37-41 — सूरा अल-क़लम
अनुवाद — अल-क़लम 39
सूरा अल-क़लम आयत 39 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : या तुमने हमसे क़समें ले रखी हैं जो रोज़े क़यामत…सूरा आयत 39/52 — सूरा अल-क़लम القلم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़लम सुनें, सूरा अल-क़लम अनुवाद, सूरा अल-क़लम mp3, सूरा अल-क़लम pdf. आयत 37–41. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


