अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- إِنَّهُ — यह (क़ुरआन)
- لَقَوْلُ — अवश्य कथन / वचन है
- رَسُولٍ كَرِيمٍ — एक सम्मानित और प्रतिष्ठित रसूल (संदेशवाहक) का
विस्तृत तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में क़ुरआन की महानता और उसके उच्च स्रोत को बयान कर रहे हैं। यहाँ अल्लाह तआला क़सम खाकर फ़रमा रहे हैं — उन चीज़ों की क़सम जो तुम देखते हो और उन चीज़ों की क़सम जो तुम्हारी आँखों से छिपी हैं — कि यह क़ुरआन किसी शायर का कलाम नहीं, न किसी काहिन (ज्योतिषी) का सजाबद्ध भाषण है, बल्कि यह अल्लाह का कलाम है, जिसे एक बहुत ही सम्मानित और महान रसूल — हज़रत मुहम्मद ﷺ — पेश कर रहे हैं।
यहाँ "रसूल करीम" से मुराद हमारे नबी मुहम्मद ﷺ हैं। यह क़ुरआन उनका अपना कथन नहीं है, बल्कि वे इसे अल्लाह की तरफ़ से पहुँचाने वाले हैं। वे इस अमानत को बिल्कुल सही और बिना किसी कमी-बेशी के उम्मत तक पहुँचाते हैं। यह उनकी सिफ़ात में से एक बहुत बड़ी सिफ़ात है कि वे "करीम" हैं — यानी बड़े ही साहिब-ए-इज़्ज़त, बुलंद अख़लाक़ और अल्लाह के नज़दीक बहुत ही मर्तबा वाले हैं।
इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि क़ुरआन कोई आम किताब नहीं, बल्कि यह अल्लाह का वह कलाम है जो उसने अपने सबसे प्यारे रसूल ﷺ के ज़रिए हम तक पहुँचाया है। इसलिए हमें इसकी तालीम पर अमल करना चाहिए और इसे अपनी ज़िंदगी का नुस्ख़ा बनाना चाहिए। जिस किताब को अल्लाह ने इतनी अज़मत दी हो और जिसे पहुँचाने के लिए उसने अपना सबसे करीम रसूल चुना हो, उस पर अमल करना ही हमारी कामयाबी है। यह क़ुरआन हमें सीधे रास्ते पर चलने की तालीम देता है, और जो इसे थाम लेता है, वह कभी गुमराह नहीं हो सकता।
याद रखिए! क़ुरआन सिर्फ़ पढ़ने की किताब नहीं, बल्कि जीने की किताब है। जो इसे पढ़ता है और उस पर अमल करता है, अल्लाह उसे दुनिया और आख़िरत दोनों में इज़्ज़त देता है। आइए, हम इस करीम कलाम को अपने दिलों में उतारें और इसे अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाएँ।
📜 आयत 38-42 — अल-हाक़्का
अनुवाद — अल-हाक़्का 40
सूरा अल-हाक़्का आयत 40 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : एक मोअज़िज़ फरिश्ते का लाया हुआ पैग़ाम हैसूरा आयत 40/52 — अल-हाक़्का الحاقة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हाक़्का सुनें, अल-हाक़्का अनुवाद, अल-हाक़्का mp3, अल-हाक़्का pdf. आयत 38–42. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








