अल-हाक़्का · 40/52
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हाक़्का
إِنَّهُ لَقَوْلُ رَسُولٍ كَرِيمٍ ۝٤٠
Innahoo laqawlu Rasoolin kareem
📖 हिंदी अर्थ
एक मोअज़िज़ फरिश्ते का लाया हुआ पैग़ाम है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • إِنَّهُ — यह (क़ुरआन)
  • لَقَوْلُ — अवश्य कथन / वचन है
  • رَسُولٍ كَرِيمٍ — एक सम्मानित और प्रतिष्ठित रसूल (संदेशवाहक) का

विस्तृत तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में क़ुरआन की महानता और उसके उच्च स्रोत को बयान कर रहे हैं। यहाँ अल्लाह तआला क़सम खाकर फ़रमा रहे हैं — उन चीज़ों की क़सम जो तुम देखते हो और उन चीज़ों की क़सम जो तुम्हारी आँखों से छिपी हैं — कि यह क़ुरआन किसी शायर का कलाम नहीं, न किसी काहिन (ज्योतिषी) का सजाबद्ध भाषण है, बल्कि यह अल्लाह का कलाम है, जिसे एक बहुत ही सम्मानित और महान रसूल — हज़रत मुहम्मद ﷺ — पेश कर रहे हैं।

यहाँ "रसूल करीम" से मुराद हमारे नबी मुहम्मद ﷺ हैं। यह क़ुरआन उनका अपना कथन नहीं है, बल्कि वे इसे अल्लाह की तरफ़ से पहुँचाने वाले हैं। वे इस अमानत को बिल्कुल सही और बिना किसी कमी-बेशी के उम्मत तक पहुँचाते हैं। यह उनकी सिफ़ात में से एक बहुत बड़ी सिफ़ात है कि वे "करीम" हैं — यानी बड़े ही साहिब-ए-इज़्ज़त, बुलंद अख़लाक़ और अल्लाह के नज़दीक बहुत ही मर्तबा वाले हैं।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि क़ुरआन कोई आम किताब नहीं, बल्कि यह अल्लाह का वह कलाम है जो उसने अपने सबसे प्यारे रसूल ﷺ के ज़रिए हम तक पहुँचाया है। इसलिए हमें इसकी तालीम पर अमल करना चाहिए और इसे अपनी ज़िंदगी का नुस्ख़ा बनाना चाहिए। जिस किताब को अल्लाह ने इतनी अज़मत दी हो और जिसे पहुँचाने के लिए उसने अपना सबसे करीम रसूल चुना हो, उस पर अमल करना ही हमारी कामयाबी है। यह क़ुरआन हमें सीधे रास्ते पर चलने की तालीम देता है, और जो इसे थाम लेता है, वह कभी गुमराह नहीं हो सकता।

याद रखिए! क़ुरआन सिर्फ़ पढ़ने की किताब नहीं, बल्कि जीने की किताब है। जो इसे पढ़ता है और उस पर अमल करता है, अल्लाह उसे दुनिया और आख़िरत दोनों में इज़्ज़त देता है। आइए, हम इस करीम कलाम को अपने दिलों में उतारें और इसे अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाएँ।



📜 आयत 38-42 — सूरा अल-हाक़्का

38فَلَا أُقْسِمُ بِمَا تُبْصِرُونَ
जो तुम्हें दिखाई देती हैं
39وَمَا لَا تُبْصِرُونَ
और जो तुम्हें नहीं सुझाई देती कि बेशक ये (क़ुरान)
40إِنَّهُ لَقَوْلُ رَسُولٍ كَرِيمٍ
एक मोअज़िज़ फरिश्ते का लाया हुआ पैग़ाम है
41وَمَا هُوَ بِقَوْلِ شَاعِرٍ ۚ قَلِيلًا مَّا تُؤْمِنُونَ
और ये किसी शायर की तुक बन्दी नहीं तुम लोग तो बहुत कम ईमान लाते हो
42وَلَا بِقَوْلِ كَاهِنٍ ۚ قَلِيلًا مَّا تَذَكَّرُونَ
और न किसी काहिन की (ख्याली) बात है तुम लोग तो बहुत कम ग़ौर करते हो
अल-हाक़्काकुरान सूची
52आयत
मक्कीअवतरण स्थान
40आयत

अनुवाद — अल-हाक़्का 40

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Monday, September 28, 2026

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