अल-हाक़्का · 41/52
अनुवाद उच्चारण — अल-हाक़्का
وَمَا هُوَ بِقَوْلِ شَاعِرٍ ۚ قَلِيلًا مَّا تُؤْمِنُونَ ۝٤١
Wa ma huwa biqawli shaa`ir; qaleelam maa tu`minoon
📖 हिंदी अर्थ
और ये किसी शायर की तुक बन्दी नहीं तुम लोग तो बहुत कम ईमान लाते हो

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • قَوْلِ شَاعِرٍ – कवि का कथन (शायरी)
  • قَلِيلًا مَا تُؤْمِنُونَ – तुम बहुत कम ईमान लाते हो

व्याख्या:

इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ पर उतारे गए कुरआन की महानता और पवित्रता को स्पष्ट कर रहे हैं। यह बताया जा रहा है कि यह कुरआन किसी शायर का कथन नहीं है, जैसा कि कुछ लोग झूठा दावा करते थे। कुरआन की शैली, उसकी बुलंदी, उसकी गहराई और उसका प्रभाव — ये सब इस बात के साक्षी हैं कि यह किसी इंसान की रचना नहीं, बल्कि अल्लाह का कलाम है।

कुरआन में वह शक्ति और प्रभाव है जो किसी शायर की शायरी में नहीं हो सकती। शायरी दिलों को छू सकती है, लेकिन वह आत्मा को जीवन नहीं दे सकती। कुरआन वह किताब है जो ज़िंदा दिलों को रोशनी देती है, मुर्दा समाजों को ज़िंदगी देती है, और इंसान को उसके रब से जोड़ती है।

फिर अल्लाह तआला फरमाता है: "तुम बहुत कम ईमान लाते हो" — यानी तुम लोगों का ईमान इतना कमज़ोर और कम है कि तुम इतनी बड़ी नेमत (कुरआन) को पहचान नहीं पाते। अगर तुम सच्चे दिल से सोचो तो समझ जाओ कि यह कलाम किसी इंसान का नहीं हो सकता।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि कुरआन को सिर्फ पढ़ने की चीज़ नहीं समझना चाहिए, बल्कि उस पर गहराई से विचार करना चाहिए। जिस किताब में इंसानियत की भलाई हो, जो हर युग में जवाब देती हो, जो दिलों को सुकून देती हो — क्या वह किसी इंसान की रचना हो सकती है? हरगिज़ नहीं।

आओ, हम कुरआन को अपनी ज़िंदगी में उतारें, उस पर अमल करें, और उसके ज़रिए अपने रब से रिश्ता मज़बूत करें। यही हमारी कामयाबी है, यही हमारी नजात है। अल्लाह हमें सच्चा ईमान और कुरआन को समझने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 39-43 — अल-हाक़्का

39وَمَا لَا تُبْصِرُونَ
और जो तुम्हें नहीं सुझाई देती कि बेशक ये (क़ुरान)
40إِنَّهُ لَقَوْلُ رَسُولٍ كَرِيمٍ
एक मोअज़िज़ फरिश्ते का लाया हुआ पैग़ाम है
41وَمَا هُوَ بِقَوْلِ شَاعِرٍ ۚ قَلِيلًا مَّا تُؤْمِنُونَ
और ये किसी शायर की तुक बन्दी नहीं तुम लोग तो बहुत कम ईमान लाते हो
42وَلَا بِقَوْلِ كَاهِنٍ ۚ قَلِيلًا مَّا تَذَكَّرُونَ
और न किसी काहिन की (ख्याली) बात है तुम लोग तो बहुत कम ग़ौर करते हो
43تَنزِيلٌ مِّن رَّبِّ الْعَالَمِينَ
सारे जहाँन के परवरदिगार का नाज़िल किया हुआ (क़लाम) है
अल-हाक़्काकुरान सूची
52आयत
मक्कीRevelation
41आयत

अनुवाद — अल-हाक़्का 41

सूरा अल-हाक़्का आयत 41 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ये किसी शायर की तुक बन्दी नहीं तुम लोग…

सूरा आयत 41/52 — अल-हाक़्का الحاقة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हाक़्का सुनें, अल-हाक़्का अनुवाद, अल-हाक़्का mp3, अल-हाक़्का pdf. आयत 39–43. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए